पाकिस्तान की ये गायिकाएं अपने ही घरों में क्यों नहीं हैं सुरक्षित?

  • 9 मई 2019
मीना ख़ान
Image caption पुलिस का कहना है कि मीना ख़ान और उनके पति के बीच पैसों को लेकर विवाद चल रहा था

पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में तक़रीबन एक दशक के अधिक समय से कलाकार समुदाय और उनमें गायिकाओं को अपने समुदाय में निशाना बनाया जाता रहा है.

इनमें से कइयों को तो अपनी जान से हाथ तक धोना पड़ा है.

महिला कलाकारों के ख़िलाफ़ बढ़ती हुई हिंसा की घटनाओं के कारण ये मुद्दा अब गंभीर हो चुका है और ये बात सामने आई है कि इन कलाकार महिलाओं को अपने ही घरों में असुरक्षा का ख़तरा बना रहता है.

मंगलवार को ऐसी ही एक और महिला की मौत का मामला सामने आया जब स्वात ज़िले में स्थानीय गायक और डांसर मीना ख़ान को उनके पति ने गोलियां मारकर क़त्ल कर दिया.

डांस से अपने करियर की शुरुआत करने वाली 25 साल की मीना ख़ान गायिका भी थीं और स्थानीय स्तर पर एक लोकप्रिय कलाकार समझी जाती थीं.

पुलिस का कहना है कि पति-पत्नी के बीच पैसे का कोई झगड़ा चल रहा था और गायिका के पति शौकत ने रोज़े के इफ़्तार से चंद मिनट पहले ग़ुस्से में आकर पिस्तौल निकाली और क़रीब से तीन फ़ायर किए. इसके बाद मीना की वहीं मौत हो गई.

मीना की मां नेक हरम ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि उनकी बेटी के घर में कुछ समय से तनाव चल रहा था और पति-पत्नी के बीच लड़ाई-झगड़े होते थे.

उन्होंने कहा कि उनका संबंध बेहद ग़रीब परिवार से है लेकिन इसके बावजूद उनका दामाद अक्सर अपनी पत्नी से पैसे मांगता था.

नेक हरम ने ये दावा भी किया कि क़त्ल से एक दिन पहले भी उन्होंने अपने दामाद को डेढ़ लाख रुपये की रक़म दी थी लेकिन वह और पैसे मांग रहा था.

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मीना ऐसी कोई पहली कलाकार नहीं

ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में मीना ख़ान वह पहली कलाकार नहीं जो परिवारवालों की हिंसा का निशाना बनी हों.

पहले भी स्वात से ही संबंध रखने वाली पश्तो गायिका ग़ज़ाला जावेद को उनके पति ने गोलियां मारकर हत्या कर दी थी. इस वजह थी कि वह चाहते थे कि उनकी पत्नी यह पेशा छोड़ दें.

ऐसा ही कुछ मामला पश्तो की एक और गायिका एमन अदास का था जो पेशावर में अपनी भाइयों के हाथों मार दी गई थीं. बताया जाता है कि एमन को उनके भाइयों ने कई बार चेताया था कि वह कला की दुनिया छोड़ दें लेकिन वह इसके लिए तैयार नहीं थीं.

पेशावर में संगीत और पश्तो संस्कृति पर गहरी नज़र रखने वाले विश्लेषक शेर आलम शनवारी का कहना है कि ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में बदक़िस्मती से कलाकारों को समाज में गंभीर असुरक्षा का सामना करना पड़ता है और उन्हें वह इज़्ज़त और रुतबा नहीं मिलता जो आमतौर पर अन्य लोगों को मिलता है.

उनके मुताबिक़, दुर्भाग्य से अधिकतर महिला कलाकारों के लिए उनकी शोहरत और पैसा उनकी जान का दुश्मन बन जाता है.

शेर आलम शनवारी ने कहा कि जब कलाकार शोहरत की बुलंदियों को छूती है तो सबसे पहले उनसे घर में मांगें बढ़ जाती हैं और अगर वह उनकी उम्मीदों के अनुसार पूरी न हों तो उनका ख़ानदान ही उनका दुश्मन बन जाता है.

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