बांग्लादेश: लड़की को ज़िंदा जलाने के मामले में 16 लोगों पर केस

  • 30 मई 2019
नुसरत जहां रफ़ी इमेज कॉपीरइट FAMILY HANDOUT

बांग्लादेश में 16 लोगों पर एक किशोरी को ज़िंदा जलाने के आरोप में केस दर्ज किया गया है.

19 साल की नुसरत जहां रफ़ी को उनके इस्लामिक स्कूल की छत पर मिट्टी का तेल डालकर कुछ लोगों ने आग लगा दी थी. यह घटना छह अप्रैल की है.

घटना वाले दिन के कुछ दिन पहले ही नुसरत ने अपने साथ हुई यौन हिंसा को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी.

स्कूल के प्रधानाचार्य सिराज उद दौला इस मामले में मुख्य आरोपी हैं. उनके अलावा 15 अन्य लोगों पर भी मामला दर्ज किया गया है.

पुलिस का कहना है कि प्रधानाचार्य ने जेल से ही नुसरत की हत्या के आदेश दिए थे. ऐसा इसलिए क्योंकि नुसरत ने सिराज उद दौला के ख़िलाफ़ दर्ज मामला वापस लेने से इनकार कर दिया था.

पुलिस का कहना है कि नुसरत की हत्या की तैयारी कुछ इस तरह की गई जैसे कोई मिलिट्री प्लान हो.

लोगों में नाराज़गी

बांग्लादेश में इस घटना को लेकर लोगों में काफ़ी नाराज़गी है. इसके साथ ही देश में यौन हिंसा और यौन हिंसा के पीड़ितों की स्थिति पर भी बहस शुरू हो गई है.

नुसरत ने मार्च महीने के अंत में सिराज उद दौला के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई थी जिसके बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया था.

छह अप्रैल को नुसरत फ़ाइनल एग्ज़ाम देने के लिए स्कूल में ही थीं. उन्हें फुसलाकर स्कूल की छत पर बुलाया गया जहां कुछ लोगों ने उन पर मिट्टी का तेल डालकर उन्हें आग लगा दी. इन सभी अभियुक्तों ने बुर्क़े पहन रखे थे.

पुलिस का कहना है कि अभियुक्तों ने पूरी कोशिश की थी कि इस हादसे को आत्महत्या का रंग दे सकें. लेकिन लगभग 80 फ़ीसदी जल चुकी नुसरत ने दस अप्रैल को मरने से पहले अपना बयान दर्ज करा दिया था.

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देश की राजधानी ढाका से करीब 160 किलोमीटर दूर फेनी नाम के कस्बे में इस मामले के तहत 16 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है.

इन अभियुक्तों में से कुछ मदरसे के छात्र हैं और दो स्थानीय नेता. ये दोनों स्थानीय नेता सत्तारूढ़ आवामी लीग पार्टी के हैं जिसकी स्कूल में अच्छी पैठ है.

जांचकर्ताओं ने इस मामले में अभियुक्तों के लिए मौत की सज़ा की मांग की है. पुलिस का कहना है कि प्रधानाचार्य ने कोर्ट के सामने नुसरत को मारने के लिए आदेश देने की बात स्वीकार कर ली है.

12 अभियुक्तों ने हत्या में शामिल होने की बात स्वीकार भी कर ली है जबकि दोनों राजनेताओं ने किसी भी तरह की भागीदारी से इनक़ार किया है.

इस मामले पर संज्ञान लेते हुए बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने इस मामले में पूरा न्याय होने का आश्वासन दिया है.

उन्होंने कहा, "कोई भी आरोपी न्याय प्रक्रिया से बच नहीं पाएगा."

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एक हत्या जिससे पूरा देश स्तब्ध है

नुसरत की हत्या के बारे में पूरे देश में चर्चा हो रही है. कुछ लोग तो अब भी यक़ीन नहीं कर पा रहे हैं कि ऐसा कुछ हो सकता है. हालांकि हत्या के विरोध में हो रहे तमाम तरह के प्रदर्शन फिलहाल रुक गए हैं लेकिन लोगों के ज़हन में अब भी यह घटना ज़िंदा है.

जांच में पाया गया कि यह हत्या पूरी तैयारी और योजना बनाकर की गई. लेकिन सबसे दुखद ये है कि हत्या ऐसी जगह पर हुई, जहां जाकर बच्चे खुद को सबसे अधिक महफ़ूज़ समझते हैं. मदरसे में हत्या होने से डर और बढ़ गया है.

नुसरत की मौत ने देश में कई दूसरे यौन हिंसा के मामलों को दोबारा से उभारने का काम किया है. ख़ासतौर पर उन मामलों को जिनमें अभी तक न्याय नहीं मिल सका है. ऐेसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या इस घटना के बाद देश में स्थिति बदलेगी?

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क्या हुआ था नुसरत के साथ?

27 मार्च को 19 साल की नुसरत ने प्रधानाचार्य के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई थी. नुसरत ने शिकायत दर्ज कराई थी कि प्रधानाचार्य ने उसे अपने कमरे में बुलाकर ग़लत तरीक़े से छूना शुरू कर दिया था. इससे पहले कि बात और बिगड़ती, वो वहां से भाग गईं.

नुसरत और उनका परिवार उसी दिन पुलिस के पास पहुंचे और पुलिस स्टेशन में बयान दर्ज कराया.

नुसरत के बयान को रिकॉर्ड किया गया था जिसमें वो साफ़ तौर पर परेशान नज़र आ रही हैं. मदरसा के प्रधानाचार्य को मामला दर्ज होने के बाद हिरासत में ले लिया गया था जिसके बाद कुछ लोग सड़कों पर प्रदर्शन करने लगे और प्रधानाचार्य की रिहाई की मांग करने लगे.

पुलिस ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन के प्रमुख बनाज कुमार मजूमदार ने बताया कि हत्या में शामिल लोग सिराज उद दौला से मिलने के लिए जेल में आए थे. जहां उन्हें कहा गया था कि वे नुसरत के परिवार से केस वापस लेने को कहें.

लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो सिराज ने नुसरत की मौत के आदेश दे दिए.

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Image caption प्रतीकात्मक तस्वीर

जली हुई हालत में नुसरत ने जो बयान दर्ज कराया, उसमें उन्होंने कहा कि एक साथी लड़की उन्हें फुसलाकर छत पर ले गई. जहां कुछ लोग पहले से ही मौजूद थे.

उन्होंने केस वापस लेने का दबाव बनाया और सादे काग़ज पर हस्ताक्षर करने को कहा. नुसरत ने कहा कि जब वो नहीं मानीं तो उन लोगों ने तेल डालकर उन्हें आग लगा दी.

जिस समय नुसरत को अस्पताल ले जाया जा रहा था, संभवत: उन्हें अंदाज़ा हो गया था कि वो नहीं बच पाएंगी. इसलिए उन्होंने अपना बयान रिकॉर्ड कर दिया था. उन्होंने मदरसे के कुछ छात्रों के नाम भी गिनाए जो उन्हें जलाने में शामिल थे.

इस वीडियो में नुसरत कह रही हैं, "टीचर ने मुझे छुआ. मैं अपनी अंतिम सांस तक इस अपराध से लडूंगी."

इस मामले में मुक़दमा शुरू होने की तारीख़ अभी तक तय नहीं हुई है.

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