श्रीलंका के ईस्टर धमाके को ये शख़्स रोक सकता था

  • 1 जून 2019
तस्लीम की पत्नी फ़ातिमा और परिवार
Image caption तस्लीम की पत्नी फ़ातिमा और परिवार के दूसरे सदस्य

श्रीलंका की चर्चों और होटलों में ईस्टर के दिन हुए बम धमाकों में 200 लोग मारे गए. इन धमाकों के पहले शायद कुछ ही लोगों को इस बात का एहसास था कि श्रीलंका इस्लामी चरमपंथ के निशाने पर है. इन्हीं में से एक थे मोहम्मद रज़ाक तस्लीम.

वो अस्पताल में अपने जख़्म से जूझ रहे हैं. उनके शरीर का बायां हिस्सा पूरी तरह लकवाग्रस्त हो चुका है, लेकिन उनका दाहिना हाथ काम कर रहा है.

उनकी देख भाल पत्नी फ़ातिमा कर रही हैं. उनके सिर का एक हिस्सा धंस गया है. मार्च में उन्हें सिर में गोली लगी थी. तब से वो न तो बोल पा रहे हैं न चल पा रहे हैं.

पुलिस का मानना है कि श्रीलंका में इस्लामिक स्टेट के चरमपंथी नेटवर्क के 'पहले शिकार' तस्लीम थे.

इसी ग्रुप ने अप्रैल में ईस्टर रविवार के दिन सिलसिलेवार आत्मघाती धमाके किए थे जिसमें 200 से अधिक लोग मारे गए.

अधिकारियों के अनुसार, इस नेटवर्क के सरगना ज़ाहरान हाशिम के आदेश पर ही तस्लीम को गोली मारी गई थी.

धमाकों के कई महीने पहले से श्रीलंका के मुस्लिम बहुल इलाक़े मावानेल्ला के स्थानीय नेता 37 वर्षीय तस्लीम, चरमपंथी नेटवर्क की जांच के केंद्र में रहे हैं.

तस्लीम की कहानी बताती है कि कैसे देश का मुस्लिम समाज सक्रिय रूप से अपने बीच पनप रहे चरमपंथ को रोकने की कोशिश में लगा था और कैसे ईस्टर हमलों से पहले प्रशासन ने आ रहे ख़तरों के संकेतों को लगातार नज़रअंदाज़ किया.

कोलंबों से कुछ ही घंटों की दूरी पर मावानेल्ला कस्बे में बौद्ध और मुसलमानों की अच्छी ख़ासी आबादी है.

Image caption अस्पताल में मोहम्मद रज़ाक तस्लीम

पहले हुई दंगे भड़काने की कोशिश

पिछले साल दिसंबर में कस्बे में बुद्ध की गई मूर्तियों को तोड़ दिया गया था. अधिकारियों का मानना है कि ये तनाव बढ़ाने और सांप्रदायिक हिंसा भड़काने की कोशिश थी.

तस्लीम मावानेल्ला कस्बे के काउंसिल के सदस्य थे और एक कैबिनेट मंत्री के सेक्रेटरी के रूप में भी काम कर चुके थे.

उनकी पत्नी फ़ातिमा ने बताया कि तस्लीम अन्य समुदाय के लोगों की मदद में भी आगे रहते थे. पिछले सालों में प्राकृतिक आपदा के दौरान स्थानीय लोगों को संगठित करने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

इसलिए जब मूर्तियों को क्षतिग्रस्त किया गया तो तस्लीम ने इसकी जांच में मदद की.

फ़ातिमा ने बताया, "वो कहते थे कि- उन लोगों ने ग़लत किया है, हमारा धर्म इसकी इजाज़त नहीं देता है. जो ज़िम्मेदार हैं उन्हें पकड़ने की ज़रूरत है."

पुलिस ने कई गिरफ़्तारियां की लेकिन मुख्य संदिग्ध सादिक़ और अब्दुल-हक़ हाथ नहीं लगे.

इन दोनों भाईयों को मोस्टवांटेड की लिस्ट में डाला गया है.

हालांकि इन हमलों में उनकी कथित भूमिका साफ़ नहीं है लेकिन जांचकर्ताओं का मानना है कि अब्दुल हक़ ने 2014 में सीरिया का दौरा किया था जहां वो इस्लामिक स्टेट के कुछ नेताओं से मिले थे.

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जांच में मदद कर रहे थे तस्लीम

मावानेल्ला में इन भाईयों के क़रीबी व्यक्ति ने दावा किया कि, 'वो कहा कहते थे कि श्रीलंका अल्लाह की धरती है और यहां किसी और की पूजा नहीं हो सकती. ग़ैर मुस्लिमों को या तो धर्म बदलना होगा या उन्हें जज़िया देना होगा.'

दोनों भाई एक धार्मिक परिवार से थे और उनके दोस्त बताते हैं कि वो अक्सर जिहाद के बारे में बातें करते थे.

इन भाईयों के एक रिश्तेदार, जो एक मुस्लिम स्टूडेंट संगठन के नेता थे, ने बताया कि वो लगातार इनसे इस बात पर बहस करता था कि इस्लाम में हिंसा और आक्रामक व्यवहार की इजाज़त नहीं है. साल 2015 में दोनों भाइयों को इस छात्र संगठन से निकाल दिया गया था.

रिश्तेदारों ने कहा कि इन दोनों भाइयों पर 2018 में पास के कैंडी शहर में हुए दंगों का काफ़ी असर पड़ा था. इन दंगों में बौद्धों की भीड़ ने मुस्लिमों को निशाना बनाया था.

रिश्तेदारों का दावा है कि अब्दुल हक़ ने कथित रूप से कहा था, "वो हमसे हमारी ज़िंदगी और संपत्ति छीन रहे हैं. हमें कुछ करना होगा."

जब हक़ भाई फरार थे, तस्लीम उन्हें पकड़ने की कोशिशों में पुलिस की मदद कर रहे थे.

एक समय तो वो सुरक्षाकर्मियों के साथ जंगल के भीतर तक गए थे, जहां दोनों भाइयों के छिपे होने की आशंका थी.

जनवरी में जांचकर्ताओं ने उन्हें बताया था कि बौद्ध मूर्तियों को नुकसान पहुंचाने के कुछ संदिग्धों से पूछताछ में कुछ अहम जानकारियां मिलीं. पता चला कि वहां से 160 किलोमीटर दूर खेतों में विस्फ़ोटक छुपा कर रखे गए थे.

तस्लीम पुलिस टीम के साथ वहां गए थे, जहां से 100 किलो विस्फ़ोटक, डिटोनेटर्स, टेंट और एक कैमरा बरामद किया गया.

Image caption जांच के दौरान मिले विस्फ़ोटक

मुख्य संदिग्ध का रुझान सबको पता था

तस्लीम की पत्नी कहती हैं कि जब वो घर लौटे तो बहुत दुखी थे, "उन्होंने शक जताया कि वहां और भी विस्फोटक होना चाहिए. हमें एक समुदाय के रूप में इकट्ठा रहना होगा और ज़िम्मेदार लोगों को तलाशना होगा."

इतने बड़े पैमाने पर मिले विस्फ़ोटों से ही अधिकारियों को जिहादी हमले के ख़तरों के प्रति सतर्क हो जाना चाहिए था.

लेकिन चार लोगों की गिरफ़्तारी के बाद पुलिस ने इस्लामिक हिंसा की आशंका को नज़रअंदाज़ किया.

अब पता चला है कि जो विस्फ़ोटक बरामद हुए उनका संबंध आत्मघाती हमले अंजाम देने वालों से सीधे जुड़ा था, जिनमें मास्टरमाइंट ज़ाहरान हाशिम का नाम भी शामिल है.

हाशिम श्रीलंका के पूर्वी इलाके में मौलवी थे. हमलों के बहुत पहले उनकी पहचान एक चरमपंथी के रूप में की गई थी.

कई सालों से मुख्यधारा के मुस्लिम ग्रुपों से उनकी लगातार बहस होती थी. घर में भी और बाहर भी. उन्होंने मावानेल्ला के पास के गांव का भी दौरा किया था.

उन्हें सोशल मीडिया पर भड़काऊ वीडियो डालने के लिए जाना जाता था. उनकी एक पोस्ट में 9/11 हमलों की तस्वीर है.

श्रीलंका मुस्लिम काउंसिल के वाइस प्रेसिडेंट हिल्मी अहमद कहते हैं कि सोशल मीडिया में उनके नफ़रत भरे भाषणों से काउंसिल के सदस्य भी हैरान थे और इस बारे में ख़ुफ़िया एजेंसियों को बताया भी गया था.

Image caption ज़ाहरान हाशिम का वीडियो

हाशिम के आदेश पर तस्लीम को गोली मारी गई

लेकिन प्रशासन हाशिम को पकड़ने और मुकदमा चलाने में असफल रहा. अहमद ने माना कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि हाशिम एक दिन पूरे देश के लिए ख़तरा बन जाएंगे.

लेकिन अब पता चला है कि हाशिम श्रीलंका में हमले की साजिश रच रहे थे और विस्फोटकों की बरामदगी के बाद उन्हें लगा कि तस्लीम उनके रास्ते की रुकावट बन रहे हैं.

श्रीलंका पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हाशिम के एक क़रीबी सहयोगी ने कबूल किया कि हाशिम ने ही तस्लीम को मारने का आदेश दिया था.

ईस्टर हमलों के एक महीने पहले मार्च में एक बंदूकधारी बिल्कुल सुबह ही तस्लीम के घर में घुस आया. वो अपनी पत्नी और छोटे बेटे के साथ बिस्तर पर लेटे हुए थे. बंदूकधारी ने उनके सिर में गोली मार दी.

तस्लीम की पत्नी ने बताया, "पहले तो मुझे लगा कि फ़ोन का चार्जर फट गया है, लेकिन जब उधर देखा तो वो ठीक था. तब मैंने उन्हें जगाने की कोशिश की. उसी समय मुझे बारूद की गंध मिली. वो बेहोश पड़े थे."

तस्लीम को अस्पताल ले जाया गया. इस हमले में वो बच तो गए लेकिन वो पूरी तरह ठीक हो पाएंगे या नहीं, इसका पता नहीं.

श्रीलंका के सैन्य कमांडर लेफ़्टिनेंट जनरल महेश सेनानायके ईस्टर धमाकों की जांच की अगुवाई कर रहे हैं.

Image caption फ़ातिमा को अपने पति की कुर्बानी पर गर्व है.

धमाकों की पहले ही थी आशंका

उन्होंने बताया कि तस्लीम को गोली मारने, विस्फ़ोटकों की बरामदगी और बौद्ध मूर्तियों को खंडित करने के पीछे एक ही नेटवर्क काम कर रहा था.

उन्होंने स्वीकार किया कि पहले की घटनाओं से ही प्रशासन को जिहादी हमलों के प्रति सतर्क हो जाना चाहिए था.

यहां तक कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों से चेतावनी मिलने के बाद भी इस पर ध्यान नहीं दिया गया.

वो इसका कारण अलग अलग विभागों के बीच ख़ुफ़िया जानकारियों के साझा किए जाने की समस्या मानते हैं.

तस्लीम का परिवार कहता है कि घायल होने के बावजूद, वो सुन और समझ पा रहे हैं और कभी कभार प्रतिक्रिया भी देते हैं.

फ़ातिमा ने बताया, ,"जब उन्हें ईस्टर धमाकों के बारे में पता चला तो उन्होंने लिखकर कहा, 'मैंने तुम्हें बताया था कि ऐसा कुछ हो सकता है'... और रोने लगे."

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