पश्चिम बंगाल में चौथे दिन भी जारी है डाक्टरों की हड़ताल

  • 14 जून 2019
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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की धमकियों और चेतावनियों के बावजूद पश्चिम बंगाल में जूनियर डाक्टरों की हड़ताल जस की तस है. अब तक राज्य के विभिन्न मेडिकल कालेज अस्पतालों के 406 डाक्टरों ने आंदोलन के समर्थन में दिया सामूहिक इस्तीफ़ा दे दिया है.

अपर्णा सेन समेत कई फिल्मकारों और बुद्धिजीवियों ने भी आंदोलन का समर्थन किया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इस गतिरोध को शीघ्र दूर करने की अपील की.पश्चिम बंगाल के जूनियर डाक्टरों ने अपना आंदोलन वापस लेने के लिए छह शर्तें रखीं. इनमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से बिना शर्त माफ़ी की मांग भी शामिल है.

शुक्रवार को हड़ताल के चौथे दिन इसकी आंच अब राजधानी दिल्ली के अलावा देश के दूसरे शहरों तक पहुंचने लगी हैं. हड़ताल जारी रहने की वजह से राज्य के दूर-दराज़ के इलाकों से पहुंचने वाले हजारों लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है. इसके चलते विभिन्न इलाकों में दो शिशुओं समेत कम से कम पांच मरीजों की मौत हो चुकी है.

अब इस मामले पर सियासी रंग भी चढ़ने लगा है. ममता ने बीजेपी पर इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने और डाक्टरों से मुस्लिम मरीजों का इलाज नहीं करने को कहने का आरोप लगाया है.

इस बीच, खुद ममता के भतीजे आबेश बनर्जी भी जूनियर डाक्टरों के आंदोलन के समर्थन में विरोध जताने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं. मुख्यमंत्री के करीबी और कोलकाता नगर निगम के मेयर फिरहाद हकीम की पुत्री शब्बा हकीम, जो खुद डाक्टर हैं, ने भी आंदोलन से निपटने के ममता के तरीके के लिए उनकी खिंचाई की है. इससे तृणमूल कांग्रेस प्रमुख के लिए असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है.

हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

दूसरी ओर, कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले में हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए राज्य सरकार को इस समस्या का समाधान करने का निर्देश दिया है.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को सरकारी एसएसकेएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल का दौरा कर हड़ताली डाक्टरों को फौरन काम पर लौटने की चेतावनी दी थी. उन्होंने धमकी दी थी कि काम पर नहीं लौटने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उनको हॉस्टल से निकाल दिया जाएगा.

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लेकिन बावजूद उसके जूनियर डाक्टर अपनी मांगे पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं. उनकी मांगों में अस्पतालों में सुरक्षा मुहैया कराना और दो जूनियर डाक्टरों पर हमला करने वाले तमाम लोगों को शीघ्र गिरफ्तार करना शामिल है. ममता के बयान और धमकियों ने इस आंदोलन की आग में घी डालने का काम किया है.

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मरीज़ों को हो रही है परेशानी

लगातार चौथे दिन हड़ताल जारी रहने की वजह से हजारों मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और अब तक कम से कम पांच मरीजों की मौत हो चुकी है. इनमें दो शिशु भी शामिल हैं. आज महानगर के नील रतन सरकार मेडिकल कालेज समेत महज दो अस्पतालो में ही आपातकालीन सेवाएं चालू हैं. सरकारी अस्पतालों के अलावा कई निजी अस्पतालों में भी आउटडोर विभाग का कामकाज बंद है.

आंदोलन का नेतृत्व करने वाले ज्वायंट फोरम आफ जूनियर डाक्टर्स के प्रवक्ता डा. अरदिंम दत्त कहते हैं, "मांगे पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा. मुख्यमंत्री ने जिस अंदाज में कल धमकी दी थी उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता. यह चिकित्सा हमारे पेशे का अपमान है और उनको अपने बयान के लिए माफी मांगनी होगी." दत्त ने कहा कि वह लोग बाहरी नहीं हैं. हम सामूहिक इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं. ध्यान रहे कि कल ममता ने कहा था कि बाहरी लोग ही गड़बड़ी फैला रहे हैं.

इस बीच, वरिष्ठ डॉक्टरों ने भी जूनियर डॉक्टरों की मांगों का समर्थन किया है. जिस एनआरएस मेडिकल कॉलेज अस्पताल से विवाद की शुरुआत हुई थी उसके प्रिंसिपल प्रोफेसर शैबाल मुखर्जी और मेडिकल सुपरिटेंडेंट प्रोफेसर सौरभ चटर्जी ने इस्तीफा दे दिया है.

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आंदोलनकारी डॉक्टरों की एक टीम ने गुरूवार को राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी को एक ज्ञापन सौंप कर उनसे इस मामले में हस्तक्षेप की अपील की थी. लेकिन उसका भी कोई असर नहीं पड़ा है.

राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने शुक्रवार को डाक्टरों से मतभेदों और गलतफहमियों से किनारे रख कर आंदोलन खत्म करने की अपील की है. उन्होंने कहा, "जिस तरह डॉक्टरों को सुरक्षा की जरूरत है उसी तरह मरीजों को इलाज की जरूरत है."

हड़ताल को दिया जा रहा है सियासी रंग

दूसरी ओर, ममता की टिप्पणी ने इस मुद्दे को सियासी रंग दे दिया है. उन्होंने बीजेपी पर सीपीएम की सहायता साजिश कर आंदोलन को भड़काने का आरोप लगाया है.

उनका आरोप है कि बीजेपी के कुछ नेता डॉक्टरों को मुस्लिम मरीजों को इलाज नहीं करने के लिए उकसा रहे हैं. वह कहती हैं, "बीजेपी इस हड़ताल को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास कर रही है और बीजेपी प्रमुख अमित शाह इस मामले को बढ़ावा दे रहे हैं."

बीजेपी नेता मुकुल राय ने आरोप लगाया था कि तृणमूल कांग्रेस से जुड़े एक खास तबके के लोगों ने ही डॉक्टरों पर हमला किया था.

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दूसरी ओर, बीजेपी और सीपीएम ने ममता के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि हालात पर अंकुश लगाने में नाकाम रहने की वजह से उनको स्वास्थ्य मंत्री के पद से इस्तीफा दे देना चाहिए.

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प्रदेश बीजेपी उपाध्यक्ष जय प्रकाश मजुमदार कहते हैं, "समस्या को सुलझाने की बजाय ममता इस मुद्दे पर राजनीति करने में जुट गई हैं." सीपीएम की केंद्रीय समिति के सदस्य सुजन चक्रवर्ती भी यही आरोप दोहराते हैं. वह कहते हैं, "मुख्यमंत्री के रवैए से लगता है कि इस गतिरोध को दूर करने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है."

उधर, महानगर के केपीसी मेडिल कॉलेज में पढ़ने वाले ममता के भतीजे आबेश बनर्जी के भी विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने की वजह से तृणमूल कांग्रेस प्रमुख को झटका लगा है. कोलकाता नगर निगम के मेयर और ममता के करीबी फिरहाद हकीम की डाक्टर पुत्री शब्बा हकीम ने अपने एक फेसबुक पोस्ट में मुख्यमंत्री के रवैए की आलोचना करते हुए आंदोलन का समर्थन किया है. उनका कहना है कि मरीजों के हितों की बात करने वालों को डॉक्टरो के हितों के बारे में भी सोचना चाहिए. शब्बा कहती हैं, "एक तृणमूल कार्यकर्ता के तौर पर वे शर्मिंदा हैं."

इस बीच, कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले में कोई अंतरिम आदेश देने से इंकार कर दिया है. मुख्य न्यायधीश टीबीएन राधाकृष्णन और न्यायमूर्ति शउभ्रा घोष की खंडपीठ ने शुक्रवार को राज्य सरकार को हड़ताली डॉक्टरों पर काम पर लौटाने और मरीजों को सामान्य सेवाएं मुहैया कराने की पहल करने का निर्देश दिया.

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मुख्य न्यायधीश ने सुनवाई के दौरान हड़ताली डॉक्टरों को मरीजों की सेवा करने की उनकी शपथ की भी याद दिलाई. इस मामले की अगली सुनवाई 21 जून को होगी.

कल की धमकी के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फिलहाल आगे की रणनीति का खुलासा नहीं किया है. लेकिन राज्य सरकार और आंदोलनकारियो के अड़ियल रवैए से फिलहाल स्वास्थ्य सेवाओं के बहाल होने की उम्मीदें काफी क्षीण ही हैं.

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