सूडानः आज़ादी की आवाज़ बुलंद करती महिलाओं का सेना ने किया रेप

  • 16 जून 2019
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सूडान में लोकतंत्र के पक्ष में सेना मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों में मौजूद महिलाओं के साथ सेना की एक टुकड़ी ने कथित तौर पर बलात्कार किया. इस मामले में प्रत्यक्षदर्शी रहे एक शख्स ने बीबीसी को बताया है कि 12 दिन पहले यानी 3 जून को सेना ने इन प्रदर्शकारियों पर कार्रवाई के दौरान ऐसा किया.

सेना ने इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया है, लेकिन ख़ालिद (बदला हुआ नाम) नामक शख्स ने बीबीसी को बताया कि जब सैन्य कार्रवाई प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ की जा रही थी उसी दौरान कुछ महिलाओं का बलात्कार भी किया गया.

उनके मुताबिक़, जब सुबह की प्रार्थना के बाद शूटिंग शुरू हुई तो वह अपने एक अन्य प्रदर्शन कर रहे साथी के साथ पास की एक इमारत में भागे. लेकिन जैसे ही वह इमारत के ऊपरी हिस्से के एक कमरे में पहुंचे तो दोनों ने चीख-पुकार सुनी. उन्होंने सीढ़ियों से बाहर निकल कर देखा.

ख़ालिद कहते हैं, ''हमने देखा कि छह सैनिक मिलकर दो लड़कियों का रेप कर रहे थे.''

ये जवान रैपिड सपोर्ट बल का हिस्सा थे जिसे स्थानीय भाषा में जांजवेद कहते हैं.

ख़ालिद और उनके साथी 'दूर हटो' चिल्लाते हुए उन सैनिकों की ओर दौड़े लेकिन अपनी ओर बढ़ता देख सैनिकों ने उन पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं.

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'उन्होंने मेरा रेप करने की कोशिश की'

सूडान की राजधानी खार्तूम में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के कारण तख्तापलट हुआ, जिसने अप्रैल की शुरुआत में उमर अल-बशीर को लगभग 30 साल बाद सत्ता से बाहर कर दिया था और इसके बाद भी प्रदर्शनकारियों ने सेना मुख्यालय के सामने नागरिक शासन की वापसी के लिए अपना प्रदर्शन जारी रखा.

ख़ालिद कहते हैं कि जब हम किसी तरह बचकर नीचे की ओर आ रहे थे तो हमें दो महिलाएं और मिलीं जो काफ़ी परेशान दिख रही थीं. ये चारों महिलाएं सेना मुख्यालय के सामने प्रदर्शन कर रहे लोगों में मौजूद थीं.

उन्होंने कहा, ''लड़कियां कुछ बोल नहीं रही थीं. वो बस रो और चिल्ला रही थीं. मैं उन्हें शांत करने की कोशिश कर रहा था. मैंने कई कोशिशें कीं ताकि वे बेहतर महसूस करें लेकिन वे बस रो रही थीं.''

हम लोगों ने तय किया कि हम इन महिलाओं को एक मस्जिद में ले जाएं. जहां वे सुरक्षित महसूस कर सकें. दोनों इन कोशिशों में जुट गए कि कैसे महिलाओं को लेकर इस गोलीबारी से निकला जा सकता है.

जैसे ही वे लोग मस्जिद की ओर निकले उन्हें रास्ते में जांजवेद का एक दस्ता मिला. उनमें से एक शख्स वो था जो इमारत में महिलाओं का रेप करने वाले छह सैनिकों में शामिल था.

ख़ालिद कहते हैं, "उसने मुझे धक्का दिया और मैं गिर गया."

इसके बाद उन्होंने बताया कि हमें वहीं दोबार ले जाया गया जहां महिलाओं का रेप किया गया था.

वह कहते हैं, ''वह मेरे कपड़े उतारने की कोशिश करने लगे और मेरा रेप करने की कोशिश की. मैं चिल्ला रहा था ताकि कोई मेरी आवाज़ सुन ले और बचा ले. तीन-चार मिनट के बाद इमारत के अंदर गोलियों की आवाज़ आने लगी और उन्होंने जल्दी मुझे छोड़ दिया.''

खालिद बताते है कि वह किसी तरह वहां से निकले हालांकि घर आते वक्त रास्ते में कई बार उन्हें जांजावेदों ने मारा.

'दुनिया को गुमराह करने की कोशिश'

इन कथित अत्याचारों की पूरी तस्वीर क्या है इसका पता लगाना मुश्किल हो गया है, हजारों जांजवेद के लड़ाके प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने उतरे थे. हालात को देखते हुए इंटरनेट काट दिया गया था और लोग अब बोलने से डर रहे हैं.

विपक्ष के मुताबिक़ सेना की इस कार्रवाई में कुल 100 लोगों की मौत हो चुकी है. कई लोगों को नील नदी में फ़ेंक दिया गया.

ट्रांज़िशनल मिलिट्री काउंसिल ने अब मान लिया है कि प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का आदेश उसने दिया था लेकिन यौन हिंसा के आरोपों से उन्होंने इंकार किया है.

प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल शम्स अल-दीन कबाशी ने कहा, "झूठी जानकारी जो हमारे लोगों को लेकर और दुनिया के बाकी हिस्सों में फैलाई जा रही है, ऐसा दुनिया को गुमराह करने के लिए किया जा गया है."

एक अन्य गवाह, एक एम्बुलेंस ड्राइवर ने पहचान न ज़ाहिर करने की शर्त पर बीबीसी से कहा कि उसने देखा कि सेना के लोग इस बात पर बहस कर रहे थे कि कौन महिला का रेप करेगा.

एक महिला को इलाज के लिए उनकी एबुलेंस में लाया जा रहा था लेकिन सेना की एक टुकड़ी ने उन्हें रोक लिया और वे लोग इस पर बहस करने लगे कि उस महिला के साथ रेप करेगा.

जैसे ही सेना के लोग वहां से निकले हम महिला की ओर दौड़े ताकि उसे अस्पताल ले जाया जा सके लेकिन हमने देखा की उसकी मौत हो चुकी थी.

वह कहते हैं, ''हमें पता चला कि वह लड़की पहले ही मर चुकी थी लेकिन उन्होंने फ़िर भी उसे नहीं छोड़ा. ''

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क्रांति को रोकने का हथियार?

अफहाद यूनिवर्सिटी में ट्रॉमा सेंटर की प्रमुख हिमा इस्हाक शरीफ़ कहती हैं, '' हम लोग 12 ऐसी महिलाओं का इलाज कर रहे हैं जिनका रेप तीन जून को किया गया है.''

वह मानती हैं कि रेप की ख़बरें उन्हें हैरान नहीं कर रही हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि ये संख्या असल में काफ़ी ज़्यादा होगी. कई रेप की घटनाएं रिपोर्ट नहीं की जाती क्योंकि ये शर्म की बात मानी जाती है.

मानसिक स्वास्थ कार्यकर्ताओं की मानें तो ये घटना जांजवेदों की बर्बरता को दर्शाता है. वह कहते हैं, ''कई लोग ग़ायब हैं, जहां ये प्रदर्शनकारी गए थे वहां हम हालात का जायज़ा लेने पहुंचे. सब कुछ तबाह कर दिया गया है. ऐसा लगता है कि हम दारफ़ुर के किसी गांव से निकल रहे हों, जहां इन लोगों ने कुछ वक्त पहले लोगों की हत्या और लूट की थी.''

शरीफ़ मानती हैं कि ''ये महज़ एक सेक्स की बात नहीं है, इस तरह से लोगों को आंतरिक तौर पर रौंदा जाता है. ये एक हथियार क्रांति को ख़त्म कर देने का है.''

ख़ालिद भी मानते हैं कि मानसिक चोट से बाहर निकलना बेहद मुश्किल होता है.

वह कहते हैं, ''मैं घर पर बैठे-बैठे चिल्लाने लगता हूं, अकेला रोता हूं. '' वह मानते हैं कि ये जांजवेद सड़कों पर भारी संख्या में मौजूद रहते हैं ऐसे में काउंसलिंग का असर भी इंसान पर नहीं हो पाता. जब भी आप उन्हें देखते हैं, आपका भूत वर्तमान बनकर आपके साथ चलने लगते हैं."

लेकिन वह कहते हैं कि ''किसी को बोलना होगा. इस दुनिया को सच पता चलना चाहिए. ''

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