जमाल ख़ाशोगी केस: 'सऊदी प्रिंस के ख़िलाफ़ हो जांच'

  • 19 जून 2019
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Image caption जमाल ख़ाशोगी (बाएं), सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (दाएं)

संयुक्त राष्ट्र के एक विशेषज्ञ का कहना है कि यह मानने के पर्याप्त सबूत हैं कि पत्रकार जमाल ख़ाशोगी की हत्या के लिए सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और दूसरे उच्च स्तरीय अधिकारी व्यक्तिगत तौर पर ज़िम्मेदार हैं.

विशेष प्रतिवेदक एग्नेस कैलामार्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, आगे एक स्वतंत्र और निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए ये सबूत पर्याप्त हैं.

ख़ाशोगी की पिछले साल अक्टूबर में इस्तांबुल में सऊदी दूतावास के भीतर सऊदी एजेंट्स ने हत्या कर दी थी.

सऊदी अधिकारियों का कहना है कि वो क्राउन प्रिंस मोहम्मद के आदेशों पर काम नहीं कर रहे थे.

सऊदी अरब में 11 अज्ञात लोगों पर बंद कमरों के भीतर मुक़दमा चलाया जा रहा है और इनमें से पांच के लिए सज़ा-ए-मौत की मांग की जा रही है.

हालांकि कैलामार्ड की रिपोर्ट में कहा गया है कि मुक़दमे अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया और गुणवत्ता के मुताबिक नहीं चलाए जा रहे हैं. उन्होंने इन मुक़दमों को निलंबित करने की मांग की है.

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58 वर्षीय जमाल ख़ाशोगी अमरीका में रहते थे और वॉशिंगटन पोस्ट के लिए कॉलम लिखते थे. वह सऊदी अरब के क्राउन प्रिंसह मोहम्मद की आलोचना के लिए जाने जाते थे.

2 अक्टूबर 2018 को वह तुर्की में सऊदी दूतावास में गए थे जहां उनकी हत्या कर दी गई थी.

कैलामार्ड ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि दूतावास के भीतर ख़ाशोगी को बर्बरता से मार डाला गया था.

सऊदी अरब के उप अभियोजक शलान शलान ने नवंबर में पत्रकारों से कहा था कि हत्या उस 'समझौता दल' के प्रमुख के आदेशों पर की गई थी. उनका दावा है कि यह टीम सऊदी ख़ुफिया एजेंसी के उपप्रमुख ने ख़ाशोगी को वापस सऊदी में आकर रहने के लिए मज़बूर करने के मक़सद से भेजी थी.

कब क्या हुआ था

2 अक्टूबर 2018:जमाल ख़ाशोगी इस्तांबुल स्थित सऊदी दूतावास में दस्तावेज़ लेने गए थे. उनकी फियांसे हैटिस बाहर इंतज़ार कर रही थीं लेकिन ख़ाशोगी नहीं लौटे.

4 अक्टूबर: सऊदी अरब का बयान आया कि दूतावास से निकलने के बाद ख़ाशोगी लापता हैं और उनके साथ क्या हुआ, यह पता करने की कोशिश की जा रही है.

6 अक्टूबर:अमरीकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट ने ख़बर दी कि तुर्की ख़ुफिया एजेंसी यह मानती है कि ख़ाशोगी की दूतावास के भीतर सऊदी अरब की 15 सदस्यीय टीम ने हत्या कर दी.

10 अक्टूबर: सामने आई सीसीटीवी फुटेज में कथित 'हिट स्क्वॉड' यानी हत्यारों का दल तुर्की में नज़र आया.

13 अक्टूबर: सऊदी अरब ने ख़ाशोगी की हत्या के आरोपों को झूठा और निराधार बताया. बीबीसी को पता चला कि तुर्की के पास एक ऑडियो रिकॉर्डिंग है जिससे पता चलता है कि ख़ाशोगी की दूतावास में हत्या कर दी गई थी.

15 अक्टूबर: अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सऊदी किंग सलमान से बात की. किंग सलमान ने ख़ाशोगी की हत्या में सऊदी अरब की भूमिका से इनकार किया.

20 अक्टूबर: पहली बार सऊदी अरब ने माना कि ख़ाशोगी की मौत हो चुकी है. साथ ही ये दावा भी किया कि उनकी मौत एक संघर्ष के दौरान हुई. दो वरिष्ठ सऊदी अधइकारियों को निलंबित कर दिया गया.

22 अक्टूबर: सऊदी अरब ने अपना बयान बदला. क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के आदेशों पर ख़ाशोगी की हत्या से इनकार किया और कहा कि उनकी हत्या एक 'अराजक ऑपरेशन' में हुई. सीसीटीवी की नई फुटेज में ख़ाशोगी जैसा दिखने वाला एक हमशक्ल ख़ाशोगी के कपड़ों में दूतावास से बाहर निकलता दिख रहा था.

16 नवंबर: वॉशिंगटन पोस्ट ने ख़बर छापी कि सीआईए को पता चला है कि मोहम्मद बिन सलमान के आदेश पर ही ख़ाशोगी की हत्या की गई. हालांकि बाद में ट्रंप ने इसे ख़ारिज़ किया.

22 नवंबर: सभी सऊदी संदिग्धों पर फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने प्रतिबंध लगा दिया. जर्मनी ने सऊदी अरब को हथियारों की बिक्री पर भी रोक लगा दी.

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