उत्तर कोरिया को मदद भेजेगा दक्षिण कोरिया

  • 20 जून 2019
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सूखे की मार झेल रहे उत्तर कोरिया को दक्षिण कोरिया 50 हज़ार टन चावल भेजने की योजना बना रहा है.

बीते एक दशक में ये पहली बार है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एक तरह से अलग-थलग पड़े उत्तर कोरिया को दक्षिण कोरिया मानवीय राहत देने वाला है.

उत्तर कोरिया फिलहाल भयंकर सूखे की चपेट में है, और उस पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों के कारण वहां खाद्यान्न की कमी का संकट पैदा हो गया है.

दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्रालय ने कहा है कि वो "जल्द से जल्द" अपने पड़ोसी मुल्क तक चावल पहुंचाएंगे.

संयुक्त राष्ट्र का विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) मानवीय राहत पहुंचाने की इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी.

दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्री किम इयोन चुल ने कहा, "उत्तर कोरिया के लोगों की स्थिति को सरकार नजरअंदाज नहीं कर सकती."

इससे पहले दक्षिण कोरिया ने साल 2010 में उत्तर कोरिया को मानवीय मदद दी थी. उस वक्त उसने पांच हज़ार टन चावल अपने पड़ोसी के पास भेजा था.

दोनों देशों के बीच हाल में रिश्तों में कुछ गर्माहट आई है. कुछ दिनों पहले दक्षिण कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यक्रम के लिए 80 लाख डॉलर का दान दिया था. इस कार्यक्रम के तहत उत्तर कोरिया की महिलाओं और बच्चों को पोषक खाद्य और स्वास्थ्य सुविधाएं देने की योजना थी.

बीते महीने संयुक्त राष्ट्र ने एक रिपोर्ट पेश की थी जिसमें कहा गया था कि "उत्तर कोरिया को जल्द से जल्द खाद्यान्न के रूप में मानवीय मदद की ज़रूरत है."

कितनी गंभीर है उत्तर कोरिया का खाद्य संकट?

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Image caption दक्षिण कोरिया के एकीकरण मंत्री किम इयोन चुल

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार इस साल उत्तर कोरिया के लोगों के 300 ग्राम प्रतिदिन के भोजन पर निर्भर करना पड़ रहा है.

उत्तर कोरिया में इस साल खाद्यान्न की कमी सूखे के कारण है जो बीते 37 सालों का सबसे भयंकर सूखा बताया जा रहा है. सूखे का असर पूरे देश में खेती पर पड़ा है और इस साल कम उपज हुई है.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार 2008 के बाद से अब तक, 2018 में उत्तर कोरिया की कृषि पैदावार सबसे रही है.

एक आकलन के अनुसार उत्तर कोरिया के 40 फीसदी लोगों को फौरी तौर पर मानवीय मदद की ज़रूरत है जबकि 70 फीसदी लोग अब भी राशन पर निर्भर कर रहे हैं.

लंबे वक्त से उत्तर कोरिया कृषि उत्पादन के संकट से जूझता रहा है. 1990 के दौर में देश में भयंकर सूखा पड़ा था. माना जाता है कि उस वक्त यहां हज़ारों की संख्या में लोगों की मौत हुई थी.

दावा किया जाता है कि परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के कारण लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का असर न केवल उत्तर कोरिया की अर्थव्यवस्था पर हुआ है बल्कि लोगों के लिए खाद्यान्न जुटाने की उसकी क्षमता पर भी पड़ा है.

उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच संबंध

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Image caption 12 जून 2019 को जारी इस तस्वीर में किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग दक्षिण कोरियाई अधिकारियों से मुलाक़ात करती हुईं. वो दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति किम डेई-जुंग की पत्नी के निधन पर शोक प्रकट करने पहुंची थीं.

उत्तर कोरिया के साथ दक्षिण कोरिया के संबंधों में हाल के वर्षों में कुछ सुधार हुआ है.

2018 में उत्तर कोरिया ने कहा कि वो परमाणु निरस्त्रीकरण और लंबी दूरी की मिसाइल परीक्षणों पर लगाम लगाएगा. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच बातचीत और सहयोग का एक नया मार्ग खुला.

लेकिन फरवरी में दोनों देशों की इन कोशिशों को तब धक्का लगा जब वियतनाम में अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया शासक किम जोंग-उन की मुलाक़ात बेनतीजा रही.

इसके बाद उत्तर कोरिया ने कम दूरी के मिसाइलों का परीक्षण एक बार फिर शुरु किया जिस कारण अमरीका और दक्षिण कोरिया के बीत संबंधों में तनाव आ गया.

आलोचकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के तहत उत्तर कोरिया को खाद्यान्न के रूप में मानवीय मदद नहीं दी जानी चाहिए. लेकिन दक्षिण कोरियाई सरकार का मानना ​​है कि मानवीय मदद का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए.

साथ ही संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के तहत उत्तर कोरिया को मानवीय मदद देने पर कोई प्रतिबंध नहीं है. हालांकि इसके लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति की मंजूरी ज़रूरी है.

दक्षिण कोरिया की योनहाप समाचार एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण कोरिया को उम्मीद है कि मानवीय राहत से दोनों देशों के संबंध और बेहतर होंगे.

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Image caption 2017 की इस तस्वीर में उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग-उन खेतों का दौरा करते हुए

फरवरी में वियतनाम शिखरवार्ता के नाकाम होने के बाद से कोरियाई प्रांत के परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर बातचीत ठप है.

उम्मीद की जा रही है कि इसी सप्ताह होने वाले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उत्तर कोरियाई दौरे में एक बार फिर इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है.

इस बीच डोनल्ड ट्रंप भी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जेई-इन से मुलाक़ात के लिए दक्षिण कोरिया का दौरा करने वाले हैं.

बुधवार को उत्तर कोरिया के लिए दक्षिण कोरिया के विशेष दूत ली डो-हून ने प्योंगयांग से आग्रह किया था कि वो ट्रंप के दौरे से पहले अगर उत्तर और दक्षिण कोरिया दोनों देशों के शिखर सम्मेलन का निमंत्रण स्वीकार करें.

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