क्या है फ़लस्तीन के लिए अमरीका का ख़ास योजना?

  • 23 जून 2019
डॉनल्ड टरंप और जेरेड कुशनर इमेज कॉपीरइट EPA

ट्रंप प्रशासन ने मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से पचास अरब डॉलर की अपनी एक योजना जारी कर दी है.

'पीस टू प्रोस्पेरिटी' यानी 'शांति से संपन्नता तक' नाम की इस योजना के अनुसार अमरीका फ़लस्तीनी इलाकों को जोड़ते हुए एक नया कॉरिडोर बनाएगा जिसके ज़रिए इस प्रांत में व्यापार को बढ़ावा दिया जाएगा.

अमरीका का कहना है कि फ़लस्तीन की अर्थव्यवस्था में सुधार लाने के लिए और उसे पड़ोसी अरब मुल्कों से रेल और सड़क माध्यम से जोड़ने के लिए एक ग्लोबल इंवेस्टमेन्ट फंड की आवश्यकता है.

व्हाइट हाउस ने इस महत्वाकांक्षी योजना के बारे में जानकारी देते हुए लिखा है कि "फ़लस्तीन में कई पीढ़ियों ने मुश्किल परिस्थितयों में जीवन गुज़ारा है लेकिन अब इसका अगला अध्याय आज़ादी और सम्मान का होगा."

व्हाइट हाउस का दावा है कि फ़लस्तीनी लोगों के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा बनाई जा रही ये योजना अब तक की सबसे महत्वाकांक्षी और विस्तृत योजना है.

व्हाइट हाउस ने इस योजना को लागू करने के लिए दस साल का वक्त बताया है.

अमरीका के अनुसार इसके ज़रिए फ़लस्तीन के समाज, वहां रहने वाले लोगों और वहां की सरकार को मदद मिलेगी. साथ ही वहां नौकरियां बढ़ेंगी और तेज़ी से आर्थिक तरक्की होगी.

हालांकि इस योजना को लागू करने के लिए मध्यपूर्व की राजनीतिक स्थिति को लेकर समाधान पर सहमति बनना ज़रूरी है.

अमरीका को उमीद है कि किसी शांति समझौते तक पहुंचने की सूरत में इस प्रांत का विकास किया जा सकता है.

फ़लस्तीन ने ट्रंप प्रशासन की इस योजना को ख़ारिज कर दिया है और कहा है कि फ़लस्तीन के इलाकों पर इसराइली कब्ज़े को नज़रअंदाज़ कर योजना बनाई गई है.

पीएलओ का कहना है कि ये योजना फ़लस्तीन के लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं करती और इस कारण ये सफल नहीं होगी.

क्या है पीस योजना?

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व्हाइट हाउस द्वारा जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके तहत सबसे अधिक निवेश गज़ा और वेस्ट बैंक में किया जाएगा, जबकि कुछ निवेश जॉर्डन, मिस्र और लेबनन में भी होगा.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार पांच अरब डॉलर का निवेश केवल वेस्ट बैंक को गज़ा से जोड़ने के लिए नई सड़कों के निर्माण और पुरानी सड़कों को दुरुस्त करने के लिए होगा. इस पूरी योजना में निर्माण और व्यापार से जुड़ी करीब 179 छोटी-बड़ी परियोजनाएं शामिल हैं.

अमरीका के अनुसार इस योजना को बनाने में दो साल का वक्त लगा है और राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद और व्हाइट हाउस के वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर बहरीन के मनामा में जून 25 और 26 को होने वाले एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में इस योजना की पूरी रूपरेखा पेश करेंगे.

जेरेड कुशनर का कहना है कि अगर इसे आगे बढ़ाया जाए तो ये "सदी में एक बार मिलने वाला अवसर" साबित होगा.

बहरीन का कहना है कि इस योजना से नए आर्थिक मौक़े बनेंगे जिसका लाभ पूरे प्रांत को मिल सकता है.

योजना से नाराज़ फ़लस्तीन

फ़लस्तीन में ट्रंप प्रशासन की इस योजना को ख़ारिज कर दिया है.

पीएलओ की कार्यकारी समिति की सदस्य हनान अश्रवी ने सोशल मीडिया पर लिखा, "पहले आप गज़ा की घेराबंदी ख़त्म करें और हमारी ज़मीन, संसाधनों और धन की जो चोरी इसराइल कर रहा है उसे रोकें. हमें हमारी आज़ादी दें और हमारी सीमाओं, हवाई क्षेत्र और पानी पर हमारा अधिकार दें. हम स्वतंत्र और संप्रभु लोगों को आप एक समृद्ध अर्थव्यवस्था बनाते देखेंगे."

फ़लस्तीन ने बहरीन में हो रहे सम्मेलन का बहिष्कार करने का भी ऐलान किया है.

पीएलओ का कहना है कि इलाके में शांति, सहभागिता और स्थायित्व के लिए अंतरराषट्रीय क़ानूनों का पालन होना चाहिए और संयुक्त राष्ट्र के उन प्रस्तावों को लागू किया जाना चाहिए जिससे फ़लस्तीन के इलाकों के इसराइली कब्ज़े को ख़त्म किया जा सके.

2017 में राष्ट्रपति ट्रंप के इसराइल के राजधानी के रूप में यरूशलम को मान्यता दे दी थी. इसके बाद से फ़लस्तीन अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप से बातचीत से इनकार करता रहा है.

फ़लस्तीन का कहना है कि वो एक स्वतंत्र देश है और पूर्वी येरूशलम उसकी राजधानी है. फ़लस्तीन की समस्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय की खड़ी की हुई है और इसका सामाधान तलाशना भी उन्हीं की काम है.

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