अमरीका ने ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामनेई पर प्रतिबंध क्यों लगाए?

  • 25 जून 2019
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Image caption ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़मेनेई

अमरीका और ईरान के बीच का तनाव जग ज़ाहिर है और ये लगतार बढ़ता जा रहा है. ईरान पहले से अमरीका के प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और अब अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने उसपर और कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं.

ग़ौर करने वाली बात ये है कि इन नए प्रतिबंधों के दायरे में ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामनेई को भी लाया गया है. ख़ामनेई ईरान के आध्यात्मिक नेता और सर्वोच्च अधिकारी हैं.

डोनल्ड ट्रंप का कहना है कि अयातुल्लाह ख़ामनेई पर प्रतिबंध इसलिए लगाए गए हैं, "क्योंकि ईरान शासन में हो रहे प्रतिकूल कामों के लिए वहीं ज़िम्मेदार हैं."

वॉशिंगटन में मौजूद बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लेट अयातुल्लाह ख़ामनेई पर लगाए गए इन प्रतिबंधों को महत्वपूर्ण बताती हैं.

वो कहती हैं, ''वो वास्तव में ईरान के सर्वोच्च नेता हैं. ईरान के राजनीतिक और सैन्य मामलों में आख़िरी फ़ैसला उन्हीं का होता है. उनके पास बहुत सी आर्थिक ताक़त भी है.''

ख़ामनेई 'सेताद' नाम की संस्था की देखरेख भी करते हैं. इस संस्था ने 1979 की क्रांति के बाद छोड़ी गई संपत्तियों को अपने नियंत्रण में ले लिया था और इससे 95 अरब डॉलर का एक बड़ा बिज़नेस खड़ा किया गया.

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सेताद पर पहले से अमरीकी प्रतिबंध लगे हुए हैं, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने अब इसपर और कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं. इसके ज़रिए अयातुल्लाह ख़ामनेई से जुड़े लोगों को निशाने पर लिया गया है. इनमें कंपनी में काम करने वाले लोग या उनकी 'शैडो गवर्नमेंट' के अधिकारी शामिल हैं.

डॉनल्ड ट्रंप के मुताबिक़ ईरान जो कुछ भी कर रहा है, उसके पीछे ख़ामनेई का दिमाग़ है. उनका कहना है कि ख़ामनेई के अंतर्गत सबसे ख़तरनाक चीज़ें आती हैं, जिसमें इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड्स की सेना भी है.

ट्रंप के कार्यकारी आदेश के मुताबिक़ ताज़ा प्रतिबंधों के बाद ईरान के सर्वोच्च नेता, उनका दफ्तर और उनसे जुड़े अन्य सभी लोग किसी भी तरह के वित्तीय सहयोग से वंचित हो जाएंगे.

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अयातुल्लाह ख़ामनेई के बारे में

अयातुल्लाह ख़ामनेई बार-बार पश्चिम, ख़ासकर अमरीका की निंदा करते रहे हैं.

हालांकि वो किसी भी तरह की बातचीत का समर्थन करते हैं.

लेकिन ईरान के विवादित परमाणु कार्यक्रम पर विश्व शक्तियों के साथ चर्चा के बाद निकले निष्कर्ष को लेकर उनका रुख़ निराशाजनक रहा है.

अयातुल्लाह ख़ामनेई ने 1989 में ईरान गणराज्य के संस्थापक और पहले सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह ख़ोमैनी की जगह ली थी. इससे पहले वो 1981-1989 तक दो बार राष्ट्रपति रहे.

सात साल पहले ईरान और दुनिया में अयातुल्लाह ख़ामनेई की मौत की अफ़वाह उड़ गई थी. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने बताया ही नहीं कि उन्हें फ्लू हो गया है, जिसकी वजह से वो सार्वजनिक समारोह में शामिल नहीं हो पा रहे थे. ईरान में अयातुल्लाह की सेहत के विषय को गोपनीय रखा जाता है.

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शक्तियों को लेकर सवाल

राष्ट्रपति रहते हुए अयातुल्लाह ख़ामनेई के प्रधानमंत्री मीर हुसैन मौसव्वी से ख़ासे मतभेद रहे.

सर्वेच्च नेता बनने के बाद अयातुल्लाह ख़ामनेई ने देश के संविधान में बदलाव कर प्रधानमंत्री का पद ही ख़त्म कर दिया.

सर्वोच्च नेता के तौर पर अपने पद को और मज़बूत करने के लिए ख़ामनेई ने ईरान की विभिन्न संस्थाओं और सुरक्षाबलों, ख़ासकर शक्तिशाली इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प से अपने रिश्ते मज़बूत किए.

अयातुल्लाह ख़ामनेई की शक्तियां और उनके फैसले कई बार विवादों में भी आए.

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दबाव

नए प्रतिबंधों के तहत ईरानी संपत्ति के अरबों डॉलर फ्रीज़ कर दिए जाएंगे.

अमरीका ने पहले ही ईरान पर तेल और आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए हैं. ऐसे में और प्रतिबंध लगाकर वो ईरान पर झुकने और बातचीत के लिए हां करने का दबाव बनाना चाहता है.

अमरीका चाहता है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम बंद कर दे. साथ ही अपने मिसाइल उत्पादन पर रोक लगाए और अपने सहयोगी अरब मिलिशिया को समर्थन देना भी बंद कर दे.

अमरीका के विदेश मंत्री का कहना है कि इस "अत्यधिक दबाव" की वजह से ईरान की हालत ऐसी हो जाएगी, कि वो अपनी क्षेत्रीय सेना के संचालन के लिए भी पैसे नहीं जुटा पाएगा.

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पिछले कुछ हफ्तों में अमरीकी और ईरान के बीच तल्ख़ी बढ़ी है.

अमरीकी राष्ट्रपति के मुताबिक़ ताज़ा प्रतिबंध अमरीकी ड्रोन पर हुए हमलों और कई अन्य वजहों से लगाए गए हैं.

ईरान ने भी इन प्रतिबंधों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. ईरान के विदेश मंत्री जावेद ज़रीफ़ ने ट्वीट कर कहा है कि ट्रंप प्रशासन "युद्ध का प्यासा" है.

वहीं अमरीकी वित्त मंत्री स्टीव म्नुचिन ने पत्रकारों को बताया कि अमरीका ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार है.

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