इंडोनेशियन सिंगर एंडेन अपने मुंह पर टेप लगा कर क्यों सोती है?

  • 13 जुलाई 2019
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इंडोनेशिया की मशहूर सिंगर एंडेन ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट डालकर अपने प्रशंसकों को हैरत में डाल दिया है. उन्होंने इंस्टाग्राम पर सांस लेने की प्रक्रिया को लेकर एक लंबी स्टोरी डाली.

जिसमें एंडेन, उनके पति और उनका बच्चा मुंह पर टेप लगाए हुए नज़र आए.

इंस्टाग्राम पर उन्होंने लिखा, "अगर आप इसके बारे में सोचें तो पता चलेगा कि यह कितना मज़ेदार है. हम बहुत-सी ऐसी चीज़ों के बारे में तो सीखते हैं जो हम नहीं करते हैं, लेकिन हम उन चीज़ों के बारे में नहीं सीखते हैं जो हम हर समय करते हैं: जैसे सांस लेना."

उन्होंने ख़ुलासा किया है कि उनका परिवार पिछले तीन महीने से बुटेको की परैक्टिस कर रहा था. बुटेको एक प्रक्रिया है जिसमें सांस लेने के तरीक़े शामिल हैं. जिनमें से एक तरीक़ा है मुंह पर टेप लगाना.

एंडेन ने दावा किया है कि बुटेको करने से उन्हें अच्छी नींद आती है.

बुटेको क्या है?

बुटेको तकनीक का आविष्कार 1950 में सोवियत डॉक्टर कोंस्टनटिन पाव्लोविक बुटेको ने किया था.

उनका मनना था कि सांस से संबंधित बीमारियों का सम्बन्ध सांस लेने के तरीक़े से है. उनका कहना था कि अगर मरीज़ सही तरीक़े से अपनी नाक से सांस लेना सीख लें तो उनके फेफड़ों की बीमारियां दूर हो जाएगीं.

लगभग सात दशक बाद भी ये वैकल्पिक तरीक़ा अभी तक प्रचलित है. दुनिया भर में बुटेको करने वाले लोग मुंह पर टेप लगा कर सो रहे हैं और सांस लेने की इस कसरत से फ़ायदा उठा रहे हैं.

बुटेको द्वारा मधुमेह से लेकर क्रोनिक थकान, एडीएचडी और अवसाद जैसी बीमारियों में सुधार लाने का दावा किया गया है. लेकिन जिस स्थिति में ये ज़्यादा कारगार साबित हुआ है, वो है स्लीप एपनिया.

स्लीप एपनिया तब होता है जब किसी के सांस की नली में कोई रुकावट हो या उन्हें सांस लेने में मुश्किल होती हो. इसकी वजह से उन्हें नींद ठीक नहीं आती है, जिससे थकान, अवसाद और दूसरी बीमारियां हो सकती हैं. इसी से ख़र्राटे लेने की परेशानी भी पैदा होती है.

इंटरनेशनल ब्यूटेको क्लिनिक के संस्थापक पैट्रिक मैककाउन ने बीबीसी को बताया कि "मुंह से सांस लेना स्लीप एपनिया का एक बड़ा कारक है क्योंकि मुंह से सांस लेने में जीभ पीछे की ओर जाती है और वायुमार्ग बाधित हो जाता है. मुंह पर टेप लगाकर सोने से ऐसी परेशानियों से बचा जा सकता है."

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लेकिन डॉक्टर इससे असहमत हैं

डेट्रायट की एक वरिष्ठ ईएनटी सर्जन और नींद विशेषज्ञ डॉ कैथलीन येरमचुक ने बीबीसी को बताया, "मैं समझती हूं कि ज्यादातर लोग अपना मुंह तब तक नहीं खोलते जब तक कि उनको नाक से सांस लेने में परेशानी न हो."

वह कहती हैं कि ओएसए से पीड़ित व्यक्ति का "सिर्फ़ अपना मुंह बंद करके सोना" समस्या का हल नहीं है.

"ओएसए के लिए जिन उपकरणों का उपयोग होता है वो सिर्फ़ मुंह बंद नहीं करते हैं वो वायुमार्ग को खोलने में मदद करते हैं."

उसके ख़तरे क्या हैं?

डाक्टरों ने मुंह पर टेप लगाकर सोने को ख़तरनाक बताया है.

डॉक्टर येरमचुक चेतावनी देते हुए कहते हैं, "यदि आप बीमार हैं और आपको उल्टी करनी है, तो आप नहीं कर पाएंगे, सबसे ख़राब स्थिति यह है कि इस से किसी का दम भी घुट सकता है."

मैककाउन ने बच्चों के मुंह पर टेप लगाने को ख़तरनाक बताया है.

वे कहते हैं कि एंडेन के इंस्टाग्राम पर उनके बच्चों की फोटो देखी. बुटेको में ऐसा कुछ नहीं कहा गया है जैसा एंडेन कर रही हैं.

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प्रोफेसर कुमार कहते हैं कि इससे बच्चों को अपनी नाक से सांस लेने में कठिनाई हो सकती है, साथ ही बच्चे बीमार भी हो सकते हैं.

"छोटे बच्चों के लिए, जो शायद पाँच साल की उम्र के हैं, सीधे उनके होंठों पर टेप नहीं लगानी चाहिए."

एंडियन ने अपने दो साल के बच्चे के मुंह पर टेप लगाया, "हम ऐसा न करने की सलाह देंगे, क्योंकि इस से मरने का ख़तरा है"

यदि आप ख़र्राटे ले रहे हैं या आपको सांस लेने में अन्य समस्याएं हो रही हैं, तो इलाज के लिए किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाएं.

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