डोनल्ड ट्रंप के बयान के ख़िलाफ़ अमरीकी संसद में प्रस्ताव पारित

  • 17 जुलाई 2019
ट्रंप ने ज़ोर देकर कहा, 'मैं नस्लवादी नहीं हूं' इमेज कॉपीरइट BRENDAN SMIALOWSKI/AFP/Getty Images

चार महिला सांसदों पर कथित नस्लीय टिप्पणी के बाद अमरीका की प्रतिनिधि सभा ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की निंदा का प्रस्ताव पारित किया है.

प्रस्ताव में ट्रंप की टिप्पणी को नस्लवादी बताते हुए कहा गया है कि यह नए अमरीकियों के भय और नफ़रत को वैध करार देता है.

187 डेमोक्रेटिक सदस्यों वाली प्रतिनिधि सभा में यह प्रस्ताव 240 वोटों से पास हुआ है. इसका सीधा मतलब है कि बाकी सदस्यों ने इस पर अपना समर्थन जताया है.

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के चार महिला सांसदों पर किए गए ट्विटर हमले की व्यापक आलोचना हो रही है, लोग उन्हें नस्लवादी कह रहे हैं. जिसके बाद राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ज़ोर देकर कहा है कि वह नस्लवादी नहीं हैं.

ट्रंप ने चार महिला सांसदों को - जो अमरीकी नागरिक हैं - उन्हें अमरीका "छोड़ देने" की सलाह दी थी.

अपनी आलोचना का जवाब देते हुए ट्रंप ने ट्वीट किया, "वे ट्वीट नस्लवादी नहीं थे. मैं नस्लवादी नहीं हूं."

उनका ये बयान तब आया है, जब अमरीका की प्रतिनिधि सभा में उनकी टिप्पणियों की निंदा करने के लिए एक सांकेतिक प्रस्ताव लाए जाने की तैयारी की जा रही है.

इस प्रस्ताव की कोई क़ानूनी बाध्यता नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि डेमोक्रेट्स के बहुमत वाले सदन में ये पास हो जाएगा.

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इससे पहले ट्रंप के निशाने पर रहीं महिला सांसदों - एलेक्जेंड्रिया ओकासियो कोरटेज़, रशीदा तलीब, अइयाना प्रेस्ली और इल्हान ओमार ने उनकी टिप्पणियों को ध्यान भटकाने वाला बताकर ख़ारिज कर दिया था.

उन्होंने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में अमरीकी लोगों से इन टिप्पणियों को नज़रअंदाज़ करने की अपील की.

राष्ट्रपति ने रविवार को अपने शुरुआती ट्वीट्स में साफ़तौर पर इन महिलाओं का नाम नहीं लिया था, लेकिन संदर्भ से लोग समझ गए कि ये ट्वीट डेमोक्रेटिक महिला सांसदों के लिए किए गए हैं - जिन्हें सक्वाड कहा जाता है.

उन्होंने ये कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि ये महिलाएं मूल रूप से उन देशों की हैं, "जिनकी सरकारें पूरी तरह से विनाशकारी हैं."

जबकि इनमें से तीन महिलाएं अमरीका में ही जन्मी हैं और चौथी ओमार सोमालिया में जन्मी थीं, लेकिन बचपन में ही अमरीका आ गई थीं.

विवाद बढ़ने के बाद चारों महिलाओं ने पत्रकारों से कहा कि वे चाहती हैं कि राष्ट्रपति की नीतियों पर फिर से ध्यान दिया जाए.

प्रेस्ली ने कहा, "ये भयंकर अराजकता और इस प्रशासन के भ्रष्ट कल्चर से ध्यान भटकाने की एक कोशिश है."

तलीब और ओमार ने ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग चलाए जाने की बात दोहराई है.

मंगलवार को ट्रंप ने इन महिलाओं पर "बहुत ख़राब और नफ़रत भरी बातें" कहने का आरोप लगाया.

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महिला सांसदों ने क्या कहा?

प्रेस्ली ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की टिप्पणियों को ये कहते हुए ख़ारिज किया कि ये हमें "दबाने और चुप कराने" की कोशिश है.

उन्होंने कहा कि हमारी सक्वाड में वो हर व्यक्ति शामिल है जो न्यायसंगत दुनिया चाहता है.

चारो महिलाओं ने ज़ोर देकर कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं, बंदूक हिंसा और ख़ासकर, मेक्सिको से लगने वाले अमरीका की सीमा पर प्रवासियों के डिटेंशन पर फ़ोकस होना चाहिए.

ओमार ने कहा, इतिहास की आंखें हमें देख रही हैं. उन्होंने बड़े स्तर पर "निर्वासन छापों की और सीमा पर हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन की निंदा की है."

ओमार ने कहा कि ट्रंप का ग़ैर-यूरोपीय अमरीकन महिलाओं पर "नस्लीय हमला" "श्वेत राष्ट्रवादियों का एजेंडा है." उन्होने ये भी कहा कि राष्ट्रपति देश को बांटना चाहते हैं.

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विवाद किस बारे में है?

शुक्रवार को ओकासियो कोरटेज़, रशीदा तलीब, अइयाना प्रेस्ली ने सदन की समिति के सामने एक प्रवासी डिटेंशन सेंटर की स्थितियों के बारे में बताया था. ये तीनों इस सेंटर का दौरा करके आई थीं.

उन्होंने "अमरीका के झंडे तले" लोगों के साथ हो रहे ग़लत व्यवहार पर चिंता ज़ाहिर की थी.

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राष्ट्रपति ने इसके जवाब में ट्वीट करके कहा था कि बच्चों के डिटेंशन सेंटर के बारे में बहुत "अच्छे रिव्यू" मिले हैं और जिन इलाक़ों में बड़ों को रखा गया है वहां अपराध का प्रतिशत बहुत ज़्यादा है.

ट्रंप ये ज़ोर देकर कहते हैं कि सीमा एक संकट का सामना कर रही है और वो अपने बॉर्डर एजेंट्स की कार्रवाई का बचाव भी कर चुके हैं.

उनके प्रशासन ने एक नया नियम भी बनाया है, जो 16 जुलाई से प्रभावी हो गया है.

इसके मुताबिक उन लोगों को शरण नहीं दी जाएगी, जिन्होंने दक्षिणी सीमा पार करने से पहले रास्ते में पड़ने वाले "कम से कम एक तीसरे देश" में सुरक्षा के लिए आवेदन ना किया हो.

इन महिला सांसदों के हाउस की समिति को दिए बयान के बाद ट्रंप ने ट्वीट करके हमले किए और कहा, "अगर आप खुश नहीं हैं, अगर आप हर वक्त शिकायत करती रहती हैं, तो आप जा सकती हैं."'

न्यूज़ीलैंड और कनाडा समेत अमरीका के कई सहयोगी देशों ने ट्रंप की टिप्पणियों की आलोचना की है.

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