कुलभूषण पर ICJ के फ़ैसले को अपनी जीत क्यों बता रहा है पाकिस्तानी मीडिया

  • 18 जुलाई 2019
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भारतीय नौसेना में अधिकारी रहे कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान में मिली मौत की सज़ा पर नीदरलैंड्स में हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत ने रोक जारी रखते हुए पाकिस्तान से इस पर फिर से विचार करने को कहा है.

जजों ने निर्विरोध माना है कि इस मामले में भारत का अंतरराष्ट्रीय अदालत का दरवाज़ा खटखटाना सही है और ये मामला अदालत के अधिकार क्षेत्र में आता है.

अदालत के 16 न्यायाधीशों में 15 ने भारत का साथ देते हुए पाकिस्तान के इस पर विरोध को ख़ारिज कर दिया है. केवल पाकिस्तान के एडहॉक जज जिलानी ने अपना विरोध जताया.

कुलभूषण जाधव की गिरफ़्तारी के तुरंत बाद उन्हें वियना संधि के आर्टिकल 36 के तहत वकील की सेवा दी जानी थी जो कि पाकिस्तान ने नहीं दी. इस पर भी कोर्ट ने आपत्ति जताई और कहा कि पाकिस्तान नियमों के मुताबिक़ कुलभूषण को वकील की सेवा दे.

भारत की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस फ़ैसले को भारत की जीत बताया है. वहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्री महमूद क़ुरैशी ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आईसीजे के फ़ैसले को पाकिस्तान की बड़ी और नैतिक जीत बताया.

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Image caption पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी

क़ुरैशी ने कहा कि कुलभूषण जाधव भारतीय नौसेना के अधिकारी थे और वो ख़ुफ़िया एजेंसी रॉ के लिए काम करते थे. अब वो पाकिस्तान में ही रहेंगे और पाकिस्तान के क़ानून के अनुसार ही उन पर कार्रवाई की जाएगी.

इस ख़बर को पाकिस्तानी मीडिया में पाकिस्तान की जीत बताई जा रही है. वहां यह लिखा जा रहा है कि कुलभूषण पर भारत की मांग को इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस ने ख़ारिज कर दिया है. कुलभूषण को भारत को नहीं सौंपा जाएगा.

एक्सप्रेस न्यूज़ लिखता है कि अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ने कुलभूषण मामले में भारत की मांग को ख़ारिज कर दिया है.

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द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने लिखा- आईसीजे में पाकिस्तान ने बाज़ी मारी. भारतीय जासूस कुलभूषण जाधव को मिली मौत की सज़ा ख़त्म करने की भारत की याचिका को अंतरराष्ट्रीय अदालत ने ख़ारिज कर दिया है.

अख़बार का कहना है कि इस मामले में किसी भी अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की भारत की उम्मीद भी धराशायी हो गई है. अख़बार के अनुसार, ''हालांकि इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (आईसीजे) के अध्यक्ष अब्दुलक़ावी अहमद यूसुफ़ ने भारतीय वकील को जाधव से मिलने की अनुमति दे दी है.''

पाकिस्तान के उर्दू अख़बार जंग ने लिखा- भारत ने वियना संधि के ज़रिए नाजायज़ फ़ायदा उठाने की कोशिश की. जिलानी ने अपने नोट में लिखा कि वियना संधि जासूसों पर लागू नहीं होती.

पाकिस्तान टुडे में छपी ख़बर के मुताबिक इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस ने कहा है कि कुलभूषण को फांसी की सज़ा से वियना समझौते का हनन नहीं हुआ और कोर्ट ने भारत की सभी आपत्तियों को ख़ारिज कर दिया.

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अपनी वेबसाइट पर इससे जुड़ी कम से कम आठ ख़बरें छापी हैं. उसने लिखा है कि अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के ज़रिए किसी भी उपाय की भारतीय उम्मीदें धराशायी हो गई हैं.

द न्यूज़ ने लिखा- आईसीजे ने अपने फ़ैसले में कुलभूषण जाधव को रिहा करने या दोबारा सुनावाई की अनुमति नहीं दी है. आईसीजे ने कहा है कि भले ही पाकिस्तान ने वियना कन्वेंशन ऑन काउंसलर रिलेशंस के अनुच्छेद 36 का उल्लंघन किया है, लेकिन जाधव को दोषी साबित करना और सज़ा देना वियना कन्वेंशन के अनुच्छेद 36 का उल्लंघन नहीं माना जा सकता है.

डॉन ने कुलभूषण पर विस्तृत कवरेज दी है. डॉन ने लिखा है कि कुलभूषण को लौटाने की याचिका आईसीजे में ख़ारिज, काउंसलर मिल सकेंगे.

इस पाकिस्तानी अख़बार के अनुसार, ''आईसीजे ने कुलभूषण की सज़ा के फ़ैसले पर पाकिस्तान को समीक्षा और पुनर्विचार करने का फ़ैसला सुनाने के साथ जाधव को वकील की सेवा देने की बात कही है. आईसीजे ने भारत की सभी दलीलों को ख़ारिज कर दिया है.''

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इस पर वॉशिंगटन पोस्ट में भी एक स्टोरी छपी है. इसमें लिखा गया है कि पाकिस्तान में मौत की सज़ा पर कथित भारतीय जासूस को फांसी से राहत.

कुल मिलाकर पाकिस्तान के सभी प्रमुख अख़बारों और न्यूज़ वेबसाइट यही लिख रहे हैं कि कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्तान की जीत हुई है. साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि हेग की अंतरराष्ट्रीय अदालत ने पाकिस्तान को इस पर पुनर्विचार करने और वकील की सेवा देने का आदेश भी दिया है.

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