रघुराम राजन ने नहीं किया बैंक ऑफ़ इंग्लैंड के लिए आवेदन

  • 22 जुलाई 2019
रघुराम राजन

भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कहा है कि उन्होंने बैंक ऑफ़ इंग्लैंड (बीओई) के अगले गवर्नर पद के लिए कोई आवेदन नहीं दिया है.

बीबीसी के कार्यक्रम हार्डटॉक में सारा मांटेग्यू से उन्होंने कहा, "मैं अपनी नौकरी से बिल्कुल ख़ुश हूं और ये कोई कूटनीतिक टिप्पणी नहीं बल्कि सच्चाई है."

राजन ने कहा, "हाल के सालों में केंद्रीय बैंकर की नौकरी बहुत राजनीतिक हो गई है और अब ये अहम हो गया है कि कोई देश उस व्यक्ति को ये ज़िम्मेदारी सौंपता है जो उस देश के राजनीतिक ढांचे की समझ रखता हो और तालमेल बिठाना जानता हो."

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि जब केंद्रीय बैंक का गवर्नर बनाने का फ़ैसला किया जाता है तो इन चीजों का ध्यान रखा जाता है."

जब उनसे ब्रेक्ज़िट के मद्देनज़र चुनौतियों के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था, "ये स्वाभाविक है कि मैं एक बाहरी व्यक्ति हूं और इस देश की राजनीति के उतार-चढ़ाव को लेकर मेरी बहुत कम समझ है."

भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर पद से मुक्त होने के बाद रघुराम राजन इस समय शिकागो बूथ स्कूल ऑफ़ बिज़नेस में पढ़ा रहे हैं.

वो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के मुख्य अर्थशास्त्री की भूमिका भी निभा चुके हैं.

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नोटबंदी के बारे में क्या कहते हैं रघुराम राजन?

ब्रेक्ज़िट को लेकर इंग्लैंड में राजनीतिक उथल-पुथल का दौर जारी है और टेरीज़ा मे के इस्तीफ़े के बाद अगले हफ़्ते नए प्रधानमंत्री के सत्ता संभालने की संभावना है.

हालांकि पहले से ही नए गर्वनर की तलाश चल रही थी और ऐसी ख़बरें थीं कि इसके लिए राजन से संपर्क भी किया गया था.

क्योंकि सारा मांटेग्यू ने जब रघुराम राजन से पूछा कि क्या आवेदन करने के लिए आपसे सम्पर्क साधा गया था, उनका जवाबा था- "मैंने आवेदन नहीं किया है."

ब्रितानी सरकार मौजूदा सेंट्रल बैंक के गवर्नर मार्क कार्ने का वारिस ढूंढ रही है क्योंकि उनका जनवरी 2020 में कार्यकाल ख़त्म हो रहा है.

मुद्रा नीति में बदलाव और अपनी प्रतिक्रिया की वजह से मार्क कार्ने ब्रेक्ज़िट की बहस के केंद्र में भी रहे हैं.

कार्ने पर ब्रेक्ज़िट के संबंध में आर्थिक ख़तरों के प्रति अधिक निराशावादी होने का भी आरोप लगा है. कार्ने 2013 से ही इस पद पर हैं और दो बार उनका कार्यकाल बढ़ाया जा चुका है.

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