प्रदूषण को हराने के लिए भारत कैसे इलेक्ट्रिक वाहनों का रुख़ कर रहा है

  • 24 जुलाई 2019
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लेखिका वंदना गोम्बार कहती हैं कि अपनी स्वच्छ ऊर्जा नीति को एक महत्वपूर्ण मोड़ देते हुए भारत इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल पर ज़ोर दे रहा है.

2017 में परिवहन मंत्री नितिन गडगरी ने ऑटोमोबाइल उद्योग को एक बड़ा झटका दिया. नितिन गडगरी ने घोषणा की थी कि उनका इरादा है कि 2030 तक भारत में सभी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक कर दिया जाए.

एक उद्योग सम्मेलन में नितिन गडकरी ने कहा, "मैं बिल्कुल ऐसा ही करने वाला हूं चाहे आप लोग इसे पसंद करें या न करें. मैं इसके लिए आपसे पूछने वाला नहीं हूं."

ये एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य था जो नितिन गडकरी ने दिया. ब्रिटेन और फ्रांस भी 2040 तक इंजन वाली गाड़ियों को पूरी तरह से हटाना चाहते हैं.

लेकिन गडकरी और बीजेपी का लक्ष्य अब 100 प्रतिशत से घटकर 30 प्रतिशत इलेक्ट्रिक यात्री कारों का हो गया है.

उद्योगों के दबाव और कई नौकरियों के जाने के डर से सरकार ने ये क़दम उठाया है.

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सरकार ने अब कारों के नीचे वाले सेगमेंट पर ध्यान देने का फ़ैसला किया है. जिनमें टू व्हीलर और थ्री- व्हीलर (ज़्यादातर ऑटो रिक्शा) शामिल हैं.

भारतीय ऑटोमोबाइल निर्माताओं की ओर से जारी किए गए आकड़ों के अनुसार मार्च में समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के दौरान देश भर में 34 लाख यात्री कारें बिकीं, जबकि दो करोड़ से ज़्यादा टू-व्हीलर्स बिके. साथ ही सात लाख थ्री व्हीलर्स ख़रीदे गए.

नए प्रस्ताव के अनुसार 2023 तक देश भर में इलेक्ट्रिक थ्री व्हलीर्स का परिचालन होना है और 2025 तक इलेक्ट्रिक टू व्हीलर्स का.

सरकार के दो प्रमुख उद्देश्य हैं - प्रदूषण को नियंत्रित करना और इस उभरते हुए उद्योग में सबसे आगे निकलना.

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चीन सबसे आगे

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस महीने की शुरुआत में अपने बजट भाषण में कहा था कि भारत इलेक्ट्रिक वाहनों के विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनना चाहता है.

लेकिन इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्माण और उनसे बाज़ार में लाभ पैदा करना भारत के लिए एक बड़ी चुनौती होगी. भारत के पास न तो इसके लिए कोई बुनियादी ढांचा है और न ही उतना पैसा जितना इलेक्ट्रिक क्षेत्र में आज सबसे आगे खड़े चीन के पास है.

चीन इलेक्ट्रिक वाहनों का विश्व का सबसे बड़ा बाज़ार है. ये इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने के स्टेशन का बड़ा क्षेत्र है. इसके अलावा विश्व का सबसे बड़ा बैटरी निर्माता है.

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अमरीकी इलेक्ट्रिक कार निर्माता टेस्ला शंघाई में एक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट खोलने जा रहा है, जो 2019 के आख़िर में चालू हो सकता है.

भारत कुछ चीज़ें चीन से सीख सकता है. सरकार ने वहां के सबसे भीड़ भाड़ वाले और प्रदूषित शहरों में पेट्रोल डीज़ल से चलने वाले वाहनों की बिक्री पर बहुत हद तक रोक लगा दी.

इसके अलावा कार निर्माताओं को ये भी सुनिश्चित करना होता है कि वे जो भी वाहन बनाएंगे उससे किसी भी तरह की हानिकारक गैस पैदा ना हो.

भारत के लिए दूसरी प्रेरणा नार्वे हो सकता है. जहां पिछले साल कुल कारों की बिक्री में से आधी इलेक्ट्रिक गाड़ियां थीं. नार्वे में 2025 तक इंजन से चलने वाले वाहनों को हटा दिया जाएगा.

लेकिन भारत में भी इसे लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं.

पहला, भारत में सरकारी कार्यालयों और मॉल में चार्जिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं. सरकारी स्वामित्व वाली बिजली कंपनियां जैसे भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स और एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेस ने जल्द ही चार्जिंग स्टेशन शुरू करने की योजना बनाई है. अगले दो सालों में 10,000 स्टेशन बनाए जाएंगे.

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कंपनियों ने लॉन्च किए इलेक्ट्रिक वाहन

दूसरा, देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के मॉडल्स पेश किए जा रहे हैं. हुंडई ने जुलाई में ही अपनी इलेक्ट्रिक कोना कार लॉन्च की थी इसके अलावा निसान कंपनी भी जल्द ही अपना मॉडल लॉन्च करेगी.

भारतीय कार निर्माता कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा मोटर्स दोनों ही इलेक्ट्रिक कार बेचती हैं. कई शहरों में इलेक्ट्रिक बसें भी देखी जा सकती हैं. राजधानी दिल्ली में लगभग एक हज़ार इलेक्ट्रिक बसें देखी जा सकती हैं.

इसके अलावा होम डिलवरी करने वाले ऐप भी इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल करने लगे हैं. कार सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनी ओला भी इलेक्ट्रिक बाइक और थ्री व्हीलर्स लॉन्च करने का विचार कर रही है.

इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स के पहले से ही कई मॉडल हैं और बाईक शेयरिंग कंपनियां भी अब इलेक्ट्रिक होने जा रही हैं.

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चार्ज करने वाली बैटरियों की बजाय एक और तरीक़ा हो सकता है जिसमें स्टेशनों पर चार्ज बैटरी ही उपलब्ध कराई जाए. जिससे फटाफट बैटरी बदल कर इस्तेमाल की जा सके. कई कंपनियां ऐसे प्रयोग कर रही हैं.

सरकार मेक इन इंडिया पहल के तहत इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी की स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित कर रही है.

बैटरी की गिरती लागत भारत की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी योजनाओं को बढ़ावा दे सकती है और इससे इलेक्ट्रिक वाहनों का इंजन से चलने वाले वाहनों के साथ मुक़ाबला करना आसान हो जाएगा. ये साफ़ हवा के लिए अच्छा है.

इससे भारत अपनी अनूठी शैली में और अपनी अनूठी गति से इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ता जाएगा.

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