सऊदी अरब के लिए अमरीकी कांग्रेस के ख़िलाफ़ क्यों गए ट्रंप?

  • 26 जुलाई 2019
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अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को आठ अरब डॉलर की क़ीमत के हथियार बेचने के सौदे पर वीटो का प्रयोग किया है.

अमरीकी कांग्रेस ने इस डील को लेकर अपनी चिंताए जताते हुए इस डील को रोकने के लिए प्रस्ताव जारी किया था.

लेकिन ट्रंप ने कहा है कि ये प्रस्ताव वैश्विक स्तर पर अमरीकी प्रतिस्पर्धा को कमज़ोर करेगी और अमरीकी सहयोगियों के साथ रिश्ते ख़राब करेगी.

कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने इस डील के प्रति चिंता जताते हुए कहा था कि उन्हें डर है कि यह हथियार यमन की जंग में शहरी आबादी के ख़िलाफ़ प्रयोग किए जा सकते हैं.

इन सदस्यों ने यमन की जंग और पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या में भी सऊदी अरब की भूमिका की निंदा की थी.

सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी के प्रवक्ता मिच मैकोनेल ने कहा है कि सीनेट अगले कुछ दिनों में इस ट्रंप के वीट को ख़ारिज किए जाने पर मतदान करेगी.

लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि ये तय है कि सीनेट को ऐसा क़दम उठाने के लिए दो तिहाई बहुमत मिल जाएगा.

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Image caption यमन की जंग में सबसे अधिक बच्चे और महिलाएं प्रभावित हुई हैं

तीसरी बार ट्रंप ने विशेषाधिकार का किया प्रयोग

सत्ता सँभालने के बाद से अब तक यह तीसरा मौक़ा है कि जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने विशेषाधिकार का प्रयोग किया है.

इसी साल मई महीने में व्हाइट हाउस ने आपातकाल का ऐलान करके विधायिका को किनारे रखकर हथियारों की डील को आगे बढ़ाया था. इस दौरान ट्रंप ने अपने फ़ैसले के लिए ईरान के साथ बढ़ते तनाव को ज़िम्मेदार ठहराया था.

लेकिन उनके इस फ़ैसले के बाद वॉशिंगटन में उनके ख़िलाफ़ विरोध को जन्म दिया था.

रिपब्लिकन पार्टी से जुड़े कई सीनेट सदस्यों ने भी कहा था कि कांग्रेस को किनारे रखकर फैसला करने का ये कोई उचित कारण नहीं था.

वहीं, ट्रंप ने कहा है कि अमरीकी हथियारों की बिक्री को रोकने से यमन में जारी जंग लंबी खिच सकती है और सटीक निशाने वाले हथियारों की अनुपस्थिति में ज़्यादा आम नागरिकों के मारे जाने की आशंका है.

उन्होंने ये भी कहा कि सऊदी अरब और सयुंक्त अरब अमीरात ईरान के ख़िलाफ़ एक दीवार की तरह हैं.

ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से ईरान और अमरीका के बीच तनाव में काफ़ी बढ़ोतरी हो गई है. ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित रखने के लिए अमरीका को परमाणु समझौते से बाहर निकाल लिया था.

इसके बाद बीते कुछ दिनों से होर्मूज़ की खाड़ी पर तेल टैंकरों के आवागमन को लेकर दोनों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है.

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