अमरीका में हिंदू पुजारी पर जानलेवा हमला

  • 27 जुलाई 2019
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अमरीका के न्यूयॉर्क शहर के फ़्लोरल पार्क इलाक़े में एक हिंदू पुजारी पर जानलेवा हमला हुआ जिसमें उसे गंभीर चोटें आई हैं.

शिव शक्ति पीठ मंदिर के पुजारी हरीशचंद्र पुरी ने बीबीसी को बताया कि 'यह हमला पिछले हफ़्ते हुआ था. वो मंदिर के क़रीब ही सड़क किनारे फ़ुटपाथ पर जा रहे थे, तभी एक व्यक्ति ने उन पर अचानक हमला कर दिया.' उस समय पुरी ने गेरुआ वस्त्र पहन रखा था.

पुरी ने बताया, "हम सड़क के किनारे चल रहे थे, तभी एक आदमी ने पीछे से हमला करके गिरा दिया और मारपीट की. चेहरे, सिर, हाथ और पैर सभी जगह चोटें आईं. वो चिल्ला रहा था 'आई किल यू', हम तो बच गए यही बहुत है."

62 साल के स्वामी हरिशचंद्र पुरी बताते हैं कि हमलावर ने अपने छाते से उनके सिर, चेहरे, सीने और हाथ-पांव पर हमले किए. सड़क पर ज़ख़्मी हालत में उन्होंने वहां से गुज़र रही एक महिला से मदद मांगी और पुलिस को फ़ोन करने के लिए कहा.

उस अमरीकी महिला के फ़ोन करने पर पुलिस आई और उन्हे फ़ौरन अस्पताल ले गई.

पुलिस ने 52 साल के लैटिन मूल के सर्गियो गुईवा को इस हमले के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया है.

मूल रूप से भारत के उत्तराखंड के रहने वाले स्वामी पुरी क़रीब 30 साल पहले अमरीका आकर बस गए थे. उन्होंने बताया कि इससे पहले भी कई बार हमले होते रहे हैं.

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हेट क्राइम की जांच

न्यूयॉर्क के गवर्नर एंड्रू कूमो ने प्रांतीय हेट क्राइम टास्क फ़ोर्स के अधिकारियों को आदेश दिया है कि इस मामले की जांच में वो न्यूयॉर्क शहर की पुलिस की मदद करें.

मामले की इस एंगल से भी जांच हो रही है कि कहीं ये नस्ल, धर्म और रंग के आधार पर भेदभाव से प्रेरित हमला तो नहीं है.

कूमो ने कहा, "क्वींस में शिव शक्ति पीठ मंदिर के पास हिंदू पुजारी पर किए गए हमले से मैं बहुत दुखी हूं. इसकी हेट क्राइम होने की आशंका के तौर पर जांच की जा रही है."

उन्होंने कहा, "हर न्यूयॉर्क वासी इस तरह की हिंसा के खिलाफ़ है. नफ़रत के आधार पर हिंसक हमलों के ज़रिए समुदायों को डराने और बांटने की कोशिश की जा रही है. हम सबको इसके ख़िलाफ़ खड़ा होना होगा."

कूमो खुद भी क्वींस में ही पैदा हुए और पले-बढ़े हैं. वो इन इलाकों से और वहां रहने वाले समुदायों से अच्छी तरह वाकिफ़ हैं.

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डरे हुए हैं लोग

वहीं ग्लेन ओक्स स्थित इस मंदिर में पूजा के लिए आने वाले कई लोगों में इस तरह के हमले के बाद गुस्सा और डर है.

इनमें से कई लोग मानते हैं कि हमालवर ने पुजारी को जानबूझ कर निशाना बनाया और हमले के समय वो चिल्ला रहा था, "यह मेरा मोहल्ला है."

एक भारतीय मूल के अमरीकी युवा अभिषेक इसी मंदिर में पूजा पाठ की तैयारी में हाथ बंटाते हैं.

वो कहते हैं, "आप कैसे किसी को इस तरह से मारना शुरू कर सकते हैं. हमारे इलाके में स्वामी को तो लोग बहुत पसंद करते हैं और वह बहुत दयालु व्यक्ति हैं. इस हमले से हमें बहुत तकलीफ़ हुई."

मंदिर के पास ही रहने वाली एक भारतीय मूल की महिला मयूरी कहती हैं कि हमले के बाद से वह डरी हुई हैं, "बुरा लगा कि इस तरह स्वामी जी पर हमला किया गया. ऐसे नहीं होना चाहिए. डर तो लगता है न."

शहर के कई नेताओं ने मंदिर पहुंचकर स्वामी पुरी से मुलाकात की और उनके साथ हमदर्दी जताई. न्यूयॉर्क की एटॉर्नी जनरल लटिशिया जेम्स ने हमलावर को सज़ा दिलाने की बात कही.

अमरीका में रहने वाले मुसलमानों की एक संस्था काउंसिल ऑन अमरीकन इस्लामिक रिलेशन्स की न्यूयॉर्क शाखा ने भी बयान जारी कर हमले की निंदा की है.

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शाखा की निदेशक अफ़ाफ़ नाशेर ने कहा, "इस मुश्किल की घड़ी में हम अपने हिंदू भाइयों के साथ खड़े हैं. किसी भी इंसान को उसकी चमड़ी के रंग या धर्म के कारण निशाना नहीं बनाना चाहिए."

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक हाल के महीनों में न्यूयॉर्क में नस्ल, धर्म और रंग के आधार पर हिंसा में पिछले साल के मुकाबले 64 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई है.

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