हॉन्गकॉन्गः दूसरे दिन भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प

  • 28 जुलाई 2019
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हॉन्गकॉन्ग में लगातार दूसरे दिन लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई.

पुलिस की कार्रवाई के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों पर चीन के सरकारी दफ़्तरों के पास पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे.

रविवार को इजाज़त न मिलने के बावजूद, हॉन्ग कॉन्ग के सबसे व्यस्त इलाक़े साई वान और कॉज़वे के पास दसियों हज़ार प्रदर्शनकारी सड़क पर उतरे.

हॉन्गकॉन्ग में सरकार विरोधी और लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों का ये आठवां हफ़्ता है.

प्रदर्शनकारी सरकारी दफ़्तरों के पास सड़क पर बैरिकेड खड़ा करते हुए 'फ़्री हॉन्ग कॉन्ग' के नारे लगा रहे थे. वे सुरक्षा के लिए मास्क और हैलमेट पहने हुए थे.

पुलिस ने पहले ही चेतावनी दी थी कि इस तरह का प्रदर्शन ग़ैरक़ानूनी माना जाएगा.

इससे एक दिन पहले शनिवार को भी यूएन लोंग में प्रदर्शनकारियों ने बिना इजाज़त मार्च निकाला जिस पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और रबर की गोलियां चलाईं.

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कैसे शुरु हुआ प्रदर्शन

हॉन्गकॉन्ग दुनिया की सबसे सुरक्षित जगहों में शुमार किया जाता है लेकिन हाल के दिनों में यहां लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं और इस दौरान पुलिस, प्रदर्शनकारियों और लाठी डंडों से लैस नकाबपोशों के बीच झड़पें हो रही हैं.

पुलिस ने रविवार को प्रदर्शनकारियों के लिए चैटर गार्डन्स में धरने की जगह तय कर दी थी लेकिन मार्च निकालने की इजाज़त नहीं दी थी.

हालांकि वहां इकट्ठा हुए प्रदर्शनकारियों का हुजूम जल्द ही वहां से बाहर निकलकर साई वान की ओर मार्च करने लगा. ये इलाक़ा चीन की सरकारी इमारतों वाला है.

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ये विरोध प्रदर्शन एक विवादित विधेयक के लाए जाने के ख़िलाफ़ शुरू हुए थे जिसमें प्रावधान किया गया था कि अपराधियों को चीन में मुकदमा चलाने के लिए प्रत्यर्पित किया जा सकेगा.

हालांकि सरकार ने इस विधेयक को रोक लिया है लेकिन प्रदर्शनकारी अब पुलिसिया हिंसा की जांच कराए जाने की मांग कर रहे हैं.

ये मामला तब और बिगड़ गया, जब पुलिस पर आरोप लगा कि उसने प्रत्यर्पण विधेयक विरोधी प्रदर्शनकारियों पर ज़रूरत से ज़्यादा बल प्रयोग किया.

बीते रविवार को हालात और बेकाबू हो गए जब आपराधिक गैंग ट्राएड के संदिग्ध सदस्यों ने युएन लोंग स्टेशन पर प्रदर्शनकारियों को घेरकर डंडों से हमला कर दिया. इसमें राहगीरों और पत्रकारों तक को नहीं छोड़ा गया.

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अबतक का घटनाक्रम

3 अप्रैल: हॉन्ग कॉन्ग ने प्रत्यर्पण से सबंधित क़ानून पेश किया.

9 जून: एक अनुमान के मुताबिक क़रीब 10 लाख लोगों ने इस क़ानून के ख़िलाफ़ सरकारी मुख्यालय की ओर मार्च किया.

12 जून: प्रत्यर्पण विरोधी प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर बैरिकेड खड़ा कर दिए और सरकारी इमारत को अपने कब्ज़े में लेने की कोशिश की. पुलिस ने आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियां फ़ायर कीं.

15 जून: हॉन्ग कॉन्ग के नेता कैरी लैम ने इस क़ानून को रोकने के आदेश दिए.

16 जून: इस दौरान एक अनुमान के मुताबिक 20 लाख लोग सड़कों पर उतरे.

21 जून: पुलिस के ख़िलाफ़ लोगों का गुस्सा भड़का और उन्होंने पुलिस मुख्यालय को 15 घंटे तक घेरे रखा.

1 जुलाई: ब्रिटेन की ओर से चीन को हॉन्ग कॉन्ग सौंपने की सालगिरह पर प्रदर्शनकारियों ने विधान परिषद की इमारत पर हमला कर दिया.

21 जुलाई: प्रदर्शनकारियों ने हॉन्ग कॉन्ग के लाइज़न के कार्यालय पर पेंट पोत दिया. उसी रात सफेद शर्ट पहने लोगों ने प्रदर्शनकारियों पर हमला बोला था.

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