पाकिस्तान में कब खुलेंगे बंद पड़े हज़ारों हिंदू मंदिर

  • 31 जुलाई 2019
पाकिस्तानी हिंदू मंदिर इमेज कॉपीरइट ANI
Image caption शवाला तेजा सिंह मंदिर

पाकिस्तान के सियालकोट में एक हिंदू मंदिर के खुलने की चर्चा भारतीय मीडिया में ज़ोर-शोर से हो रही है. इसका नाम है शवाला तेजा सिंह मंदिर और हिंदुस्तानी मीडिया में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इसे सोमवार को पूजा-अर्चना के लिए खोला गया.

हालांकि पाकिस्तानी पत्रकारों का कहना है कि मंदिर इस साल मई महीने में ही खोल दिया गया था.

दिवंगत लेखक और इतिहासकार राशिद नियाज़ की लिखी किताब 'हिस्ट्री ऑफ़ सियालकोट के मुताबिक़ ये मंदिर लगभग 1,000 साल पुराना है.

इमेज कॉपीरइट Rana Usman Khan

साल 1992 में बाबरी मस्जिद के गिराए जाने के बाद इस मंदिर पर हमला हुआ था और यह आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था. पाकिस्तान में हिंदू समुदाय सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है.

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक़ यहां क़रीब 75 लाख हिंदू रहते हैं और भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद यानी लगभग 72 साल बाद इसे खोला गया.

भारत-पाक विभाजन के दौरान और बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद पाकिस्तान में मंदिरों और हिंदुओं के अन्य धार्मिक स्थलों को काफ़ी नुक़सान पहुंचाया गया था. इसलिए शवाला तेजा सिंह मंदिर को 72 साल बाद खोले जाने को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

इमेज कॉपीरइट Rana Usman Khan

बीबीसी ने पाकिस्तान के सियालकोट में 'जियो न्यूज़' के संवाददाता ओमर एज़ाज़ और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ़ के सांसद डॉक्टर रमेश कुमार वांकवानी से बात की और इस मंदिर के खोले जाने के मायनों और उसके अलग-अलग पहलुओं पर बात की.

ये भी पढ़ें: पाक में हिंदुओं को मिली मंदिर और श्मशान की जगह

पाकिस्तानी पत्रकार ओमर एज़ाज़ का नज़रिया

हिंदुस्तानी मीडिया की रिपोर्ट्स के उलट ये मंदिर मई महीने में ही खुल गया था और इसमें पूजा भी हो रही थी. सियालकोट में तक़रीबन 150 हिंदू परिवार रहते हैं और उनकी दरख़्वास्त पर ही इस मंदिर को खोला गया.

यहां रह रहे हिंदू परिवारों ने मंदिर को खुलवाने की अर्ज़ी दी जिसके बाद इसे फ़ौरी तौर पर खोला गया और पूजा-पाठ की व्यवस्था भी कराई गई. मंदिर खुलवाने के लिए ख़ुद ज़िला प्रशासन के अधिकारी यहां आए थे.

मंदिर खुलवाने के बाद बाक़ायदा इसकी साफ़-सफ़ाई कराई गई. अब ऐसी भी ख़बरें मिल रही हैं कि मंदिर के पुनर्निमाण के लिए फ़ंड का ऐलान किया जाएगा.

ये मंदिर भारत-पाकिस्तान बंटवारे के वक़्त से ही बंद था और अब ये 72 साल बाद खुला है. एक पाकिस्तानी पत्रकार के तौर पर बताऊं तो हम यहां हिंदू समुदाय के त्योहारों और कार्यक्रमों की रिपोर्टिंग करते हैं. मैंने देखा है कि हिंदुओं को हरसंभव सुरक्षा देने की कोशिश भी की जाती है.

ये मंदिर किस देवी या देवता का है, इसका मुझे ठीक-ठीक इल्म नहीं है लेकिन ये ज़रूर मालूम है कि मंदिर में मूर्तियां हैं. मंदिर की दीवारों पर भी कुछ देवी-देवताओं के चित्र बने हैं.

मंदिर खुलने से हिंदू समुदाय बहुत ख़ुश हैं. वो इस बात से ख़ुश हैं कि मुस्लिम बहुल इलाका होन के बावजूद उनकी एक अर्ज़ी पर मंदिर खोल दिया गया.

ये भी पढ़ें: बाबरी विध्वंस के बाद पाकिस्तान में टूटे थे कई मंदिर

सांसद रमेश वांकवानी का नज़रिया

पाकिस्तान में कई ऐसे मंदिर और गुरुद्वारे हैं जो आज भी बंद हैं. बंटवारे के बाद जब हिंदू समुदाय के लोग पाकिस्तान छोड़कर भारत चले गए तो मंदिरों और गुरुद्वारों की देखभाल करने वाला कोई नहीं बचा. ऐसे में कोई मंदिर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बन गया तो कोई प्लाज़ा.

पाकिस्तान में जब 'इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड' बना, तब यहां 1130 मंदिर और 517 ऐसे गुरुद्वारे थे जो बोर्ड की कस्टडी में दिए गए.

आज उन 1130 मंदिरों में से सिर्फ़ 30 मंदिर खोले गए हैं, बाकी के 1100 मंदिर अब भी बंद हैं. वहीं, 517 गुरुद्वारों में से सिर्फ़ 17 गुरुद्वारे चल रहे हैं, बाकी 500 अब भी बंद हैं.

एक अर्ज़ी डालने पर एक मंदिर 72 सालों बाद खुला है तो ये अच्छी बात है लेकिन अब भी बहुत काम बाक़ी है.

इमेज कॉपीरइट Rana Usman khan

मेरी हमेशा ये कोशिश रही है कि पंडित जवाहर लाल नेहरू और लियाक़त अली ख़ान के समझौते के मुताबिक़ 'इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड' का अध्यक्ष हिंदू होना चाहिए, जैसे कि भारत में मस्जिदों और इस्लामिक संस्थाओं का अध्यक्ष मुसलमान होता है. लेकिन अफ़सोस की बात है कि अब तक पाकिस्तान में कोई हिंदू इवैक्यूई ट्रस्ट का अध्यक्ष नहीं बना है.

मुझे लगता है कि जब कोई हिंदू ट्रस्ट का चेयरपर्सन बनेगा, तभी जाकर सभी 1130 और 517 गुरुद्वारे खुल सकेंगे. अगर हिंदू अध्यक्ष नहीं बनता है, तब शायद कोई बहुत देरी होगी क्योंकि अगर हर साल एक-एक मंदिर खुलता रहा तो सोचिए 1100 मंदिर खुलने में कितने साल लग जाएंगे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार