कश्मीर मुद्दे पर तालिबान ने की शांतिपूर्ण हल की अपील

  • 9 अगस्त 2019
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Image caption मॉस्को में अमरीका से चल रही शांति वार्ता के दौरान तालिबान का प्रतिनिधिमंडल

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को भारत की ओर से हटाए जाने पर अफ़ग़ान तालिबान ने भी प्रतिक्रिया दी है.

अफ़ग़ान तालिबान के प्रवक्ता ने बयान जारी कर इस पर 'गहरा दुख' जताया है और भारत-पाकिस्तान दोनों से हिंसा से बचाव के लिए क़दम उठाने की अपील की है.

अफ़ग़ान तालिबान ने अपने बयान में कहा है, "ख़बरें हैं कि भारत ने कश्मीर का स्वायत्त दर्जा वापस ले लिया है, वहां अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजे हैं, आपात स्थिति जैसे हालात हैं और वहां की मुस्लिम आबादी के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं."

"इस्लामिक अमीरात (तालिबान) इस पर गहरा दुख जताता है और भारत और पाकिस्तान दोनों से ऐसे क़दम उठाने की अपील करता है जिससे हालात को पेचीदगी और हिंसा की ओर बढ़ने से बचाया जा सके और कश्मीरी लोगों के हक़ का हनन न किया जाए."

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अफ़ग़ानिस्तान और कश्मीर की तुलना न करें: तालिबान

तालिबानी प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कुछ पक्षों की ओर से कश्मीर मुद्दे को अफ़ग़ानिस्तान से जोड़े जाने से मसला हल नहीं होगा क्योंकि अफ़ग़ानिस्तान का मुद्दा इससे नहीं जुड़ा है.

तालिबान ने कहा, "अफ़ग़ानिस्तान को दोनों देशों (भारत-पाकिस्तान) के बीच प्रतिस्पर्धा का थियेटर न बनाया जाए."

माना जा रहा है कि तालिबान का इशारा पाकिस्तान में विपक्षी नेता शाहबाज़ शरीफ़ के उस बयान की ओर है, जिसमें उन्होंने संसद में दोनों जगह के हालात की तुलना की थी.

पाकिस्तानी सरकार पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा था, "ऐसा क्यों है कि अफ़ग़ान लोग काबुल में बैठकर शांति का आनंद ले रहे हैं लेकिन कश्मीर में ख़ून बह रहा है? हमें ये स्वीकार नहीं है."

उनके इस बयान के बाद अफ़ग़ान नागरिकों ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराज़गी भी जताई थी.

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शांतिपूर्ण हल की वकालत

तालिबान ने कहा है कि युद्ध और संघर्ष के अपने कड़वे अनुभव के आधार पर हम क्षेत्रीय मुद्दों को शांति और तार्किक तरीक़ों से हल करने का अनुरोध करते हैं.

हम दोनों पक्षों, इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी), इस्लामी देशों, संयुक्त राष्ट्र और दूसरे प्रभावशाली संस्थानों से कश्मीर के इस ख़तरे से निपटने में रचनात्मक भूमिका निभाने की अपील करते हैं.

तालिबान ने इन संगठनों और देशों से कहा है, "अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए आप दोनों पक्षों से संकट पर क़ाबू पाने के लिए कहें और मसले को शांतिपूर्ण तरीक़े से हल करें."

तालिबान ने यह भी कहा है कि कश्मीर मसले की अफ़ग़ानिस्तान से तुलना नहीं होनी चाहिए.

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शांति वार्ता पर नहीं होगा असर: पाकिस्तान

उधर गुरुवार को काबुल स्थित पाकिस्तानी दूतावास ने सफ़ाई दी है कि कश्मीर पर ताज़ा संकट का अफ़ग़ानिस्तान की शांति प्रक्रिया पर कोई असर नहीं होगा.

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज़ाहिद नसरुल्लाह ख़ान ने कहा, "कश्मीर मुद्दे का अफ़ग़ानिस्तान की हिंसा से कोई संबंध नहीं है. तमाम बलिदानों के बावजूद दुर्भाग्य से मामला अब भी अनसुलझा है और जम्मू-कश्मीर के लोगों के मानव अधिकारों का हनन जारी है."

गुरुवार को ही एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फ़ैसल ने कहा कि भारत ने कश्मीर में एकतरफ़ा फ़ैसला कर संयुक्त राष्ट्र की उपेक्षा की है और मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन किया है.

मोहम्मद फ़ैसल ने कहा कि भारत ने ऐसा कर दक्षिण एशिया की स्थिरता और शांति को जोखिम में डाल दिया है.

इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस में फ़ैसल से एक पत्रकार ने पूछा कि पूरे मामले पर अंतरराष्ट्रीय जगत से जो प्रतिक्रिया आई है उससे क्या आप संतुष्ट हैं?

इस पर मोहम्मद फ़ैसल ने कहा, ''यह लगातार जारी रहने वाली प्रक्रिया है और दुनिया भर से लोग बोल भी रहे हैं. इसके लिए लंबा संघर्ष करना होगा. ये सात दशक का क़िस्सा है कोई दो-चार बरस की बात नहीं है. मामला तो अभी चलेगा. अंतरराष्ट्रीय समुदाय नोटिस ले रहा है.''

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