राजनाथ सिंह पाकिस्तान के उर्दू अख़बारों में निशाने पर

  • 18 अगस्त 2019
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पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते भी भारत प्रशासित कश्मीर से जुड़ी ख़बरें सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियों में रहीं.

भारत सरकार के फ़ैसले के बाद उत्पन्न हुए हालात पर विचार विमर्श करने के लिए शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक भी हुई. पाकिस्तान ने सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने की मांग की थी.

अख़बार एक्सप्रेस ने सुर्ख़ी लगाई है, ''संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का कश्मीर को भारत का अंदरूनी मामला मानने से इनकार, लोगों के हालात पर चिंता जताई.''

वहीं अख़बार जंग ने सुर्ख़ी लगाई है, ''संयुक्त राष्ट्र ने भारतीय झूठ का पोल खोल दिया.''

यूएन एजेंसी का हवाला देते हुए अख़बार जंग ने लिखा है कि कश्मीर के मसले पर सुरक्षा परिषद में खुली बातचीत हुई.

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कश्मीर के हालात पर चिंता भी जताई. पाकिस्तान का मानना है कि भारत सरकार का हालिया फ़ैसला अंतरराष्ट्रीय क़ानून की अवहेलना है.

अख़बार लिखता है कि 1965 के बाद ये पहला मौक़ा है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर के मुद्दे पर कोई बातचीत हुई है.

अख़बार दुनिया ने सुर्ख़ी लगाई है, ''एकतरफ़ा कार्रवाई ठीक नहीं: चीन''.

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अख़बार के अनुसार संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की दूत मलीहा लोधी ने सुरक्षा परिषद की बैठक ख़त्म होने के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि ये साबित हो गया है कि ''भारत प्रशासित कश्मीर भारत का अंदुरूनी मामला नहीं बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय विवाद है."

"भारत ने सुरक्षा परिषद की बैठक न हो, इसकी पूरी कोशिश की. इसके बावजूद निहत्थे कश्मीरियों की आवाज़ सबसे उच्चतम फ़ोरम पर सुनी गई. कश्मीरियों को क़ैद किया जा सकता है लेकिन उनकी आवाज़ नहीं दबाई जा सकती. ये कश्मीरियों की पहली जीत है.''

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से इस बारे में टेलिफ़ोन पर बातचीत भी की है. ये ख़बर भी सारे अख़बारों के पहले पन्ने पर है.

अख़बार नवा-ए-वक़्त ने लिखा है, ''इमरान ने कश्मीर के मुद्दे पर ट्रंप को विश्वास में लिया.''

अख़बार के अनुसार पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि इमरान ख़ान कई देशों के राष्ट्र प्रमुखों से बातचीत कर रहे हैं, इसी सिलसिले में उन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप से भी फ़ोन पर बातचीत की है.

अख़बार क़ुरैशी के हवाले से लिखता है कि इमरान और ट्रंप के बीच तक़रीबन 20 मिनट फ़ोन पर बातचीत हुई जिसमें इमरान ख़ान ने भारत प्रशासित कश्मीर के ताज़ा हालात से राष्ट्रपति ट्रंप को अवगत कराया और इस मामले में उन्हें पाकिस्तानी पक्ष भी समझाया.

अख़बार के अनुसार ट्रंप और इमरान के बीच सहमति बनी है कि दोनों राजनेता कश्मीर के मुद्दे पर एक दूसरे से संपर्क में रहेंगे.

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अख़बार आगे लिखता है कि इमरान ख़ान ने कश्मीर की ताज़ा स्थिति पर ट्वीट भी किया है. इमरान ख़ान ने अपने ट्वीट में लिखा है, ''फासीवादी हिंदू उत्कृष्टता के घमंड में मुबतला मोदी सरकार को पता होना चाहिए कि फ़ौजियों, लड़ाकों और दहश्तगर्दों को शक्तिशाली सेना से शिकस्त दी जा सकती है लेकिन इतिहास गवाह है कि जब एक पूरी क़ौम अपनी आज़ादी के लिए एकजुट हो जाए तो न ही वो क़ौम मौत से डरती है और न ही दुनिया की कोई ताक़त ऐसी क़ौम को अपनी मंज़िल हासिल करने से रोक सकती है.''

इमरान ख़ान ने आगे लिखा है कि मोदी सरकार अपने तमाम हथकंडों के बावजूद कश्मीर के मामले में मुंह के बल गिरेगी.

भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का एक बयान भी पाकिस्तानी अख़बारों में प्रमुखता से छपा है. राजनाथ सिंह ने कहा था कि परमाणु हथियार को पहले इस्तेमाल नहीं करने की नीति में भारत बदलाव कर सकता है. अख़बार जंग ने लिखा है, ''भारतीय जंगी जुनून चरम पर है.''

राजनाथ सिंह ने परमाणु हथियारो के परीक्षण की जगह पोखरण के दौरे के बाद ट्वीट कर कहा था, ''हम अब तक परमाणु हथियार पहले इस्तेमाल न करने की नीति पर सख़्ती से अमल कर रहे हैं लेकिन भविष्य में क्या होगा ये परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.''

जंग ने लिखा है कि दक्षिण एशिया की डेढ़ अरब आबादी परमाणु जंग के ख़तरे में जी रही है. अख़बार के अनुसार भारतीय रक्षा मंत्री के ताज़ा बयान ने परमाणु हथियारों से लैस भारत और पाकिस्तान के बीच जंग की आशंका पैदा कर दी है.

अख़बार नवा-ए-वक़्त ने सुर्ख़ी लगाई है, ''भारतीय रक्षा मंत्र की गीदड़भभकी.'' पाकिस्तान ने राजनाथ के इस बयान को बेहद ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बयान क़रार दिया है.

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पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर ने कहा, ''भारतीय धमकियों से निपटने की योजना हम पर छोड़ दें. भारत यही चाह रहा है कि मौजूदा हालात में कुछ हो और सबका ध्यान कश्मीर से हट जाए. 9/11 के बाद से ही भारत कश्मीर में जारी स्वतंत्रता के आंदोलन को दहश्तगर्दी से जोड़ने की कोशिश करता रहा है.''

अख़बार दुनिया के अनुसार पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने इस्लामाबाद में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा ''भारत ने हर तरह के बहाने कर लिए. कश्मीर की समस्या को दुनिया की नज़रों से ओझल रखा. लेकिन अब वो बेनक़ाब हो गया है. दुनिया ने देख लिया है कि कश्मीर भारत का अंदुरूनी मामला नहीं है.''

अख़बार दुनिया के अनुसार क़ुरैशी ने कहा कि कश्मीरियों के क़ातिल से बातचीत नहीं होगी. उन्होंने कहा कि जब तक कश्मीर से कर्फ़्यू नहीं हटता और भारत ज़ुल्म करना बंद नहीं करता उससे कोई बातचीत नहीं होगी.

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