कश्मीर को मैक्रों ने बताया द्विपक्षीय मसला, मोदी के बाद इमरान से भी करेंगे बात

  • 23 अगस्त 2019
फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इमेज कॉपीरइट ROSHAN JAISWAL/BBC

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि कश्मीर का मामला भारत और पाकिस्तान के बीच एक द्विपक्षीय मामला है जिसमें किसी को दख़ल देने की ज़रूरत नहीं है.

मैक्रों का ये बयान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी मुलाकात के बाद आया है. मोदी जी-7 समिट में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस में हैं.

दोनों नेताओं के बीच क़रीब डेढ़ घंटे की मुलाकात हुई है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच चार समझौतों पर सहमति भी बनी है.

फ्रांस में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार रणवीर नय्यर ने बीबीसी संवाददाता इक़बाल अहमद को दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत की अहमियत के बारे में जानकारी दी है.

पेरिस से रणवीर नय्यर मोदी-मैक्रों मुलाकात का विश्लेषण:

दोनों नेताओं के बीच मीटिंग यूं तो एक घंटे ही चलनी थी लेकिन यह डेढ़ घंटे से भी ज़्यादा वक़्त तक चली.

इससे अंदाज़ा लगया जा सकता है कि इससे दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक और गंभीर बात हुई है. अलग-अलग मुद्दों पर बात हुई है. इसमें क्षेत्रीय मुद्दे थे, भारत से जुड़े मुद्दे और वैश्विक मुद्दे शामिल थे लेकिन सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा कश्मीर रहा.

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने संबोधन के दौरान क़रीब तीन-चार बार कश्मीर का ज़िक्र किया. उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि फ्रांस पहले से ही मानता आया है कि यह एक द्विपक्षीय मुद्दा है.

उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें बताया है कि जिस तरह वो कश्मीर मुद्दे को संभाल रहे हैं उससे राज्य में स्थायित्व मज़बूत होगा, संबंधित राज्य में आतंकवाद का दबाव कम होगा और इसके अलावा इस क़दम को उठाकर भारत अपने एक अंदरुनी मामले को ठीक कर रहा है.

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राष्ट्रपति मैक्रों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फ्रांस भारत के साथ इस मुद्दे पर पूरी तरह से सहमत हैं. मैक्रों ने यह भी घोषणा की कि आने वाले दिनों में वह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से भी बात करेंगे और वहां भी वे इसी बात को दोहराएंगे.

उन्होंने कहा कि वे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ख़ान से कहेंगे कि भारत पाकिस्तान को इस मुद्दे को मिलकर सुलझा लेना चाहिए और कोई भी ऐसा क़दम नहीं उठाना चाहिए जिससे शांति भंग हो.

बैठक के बाद संयुक्त संबोधन के दौरान मोदी ने भी अपनी बात को दोहराते हुए कहा कि भारत के लिए क्यों अनुच्छेद 370 को हटाना ज़रूरी था. उन्होंने इस मंच से स्पष्ट किया कि उनका प्रयास है कि इस क़दम के साथ कश्मीर को एक नए विकास के रास्ते पर अग्रसर करें.

रक्षा लेन-देन पर भी बात

इस दौरान लड़ाकू विमान रफ़ाल पर भी बात हुई. अपने भाषण के दौरान राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि रफ़ाल का पहला विमान बिल्कुल वक़्त पर सौंप दिया जाएगा.

हालांकि उन्होंने यह बात खुलकर तो नहीं कही लेकिन संकेतों में ही कहा कि आगे भी दोनों देशों के बीच प्रमुख रक्षा लेन-देन हो सकते हैं. इस बात से अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच रक्षा मामलों पर भी बात हुई है.

फ्रांस चाहता है कि भारत उससे 36 और रफ़ाल विमान ख़रीदे. इसके अलावा हेलीकॉप्टर को लेकर भी एक बड़ी डील होने वाली है. भारतीय नेवी अपने लिए 200 विमान ख़रीदने की योजना बना रही है. फ्रांस चाहता है कि भारत इस सेक्टर में भी उसके साथ डील करे.

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इसके अलावा जैतापुर में न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर भी बात हुई.

यह फ्रांस की एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना है. भारत में यह उसका सबसे बड़ा प्रोजक्ट होगा. मैक्रों ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में यह तय हुआ है कि इस साल के अंत इस पर कुछ अहम फ़ैसला लिया जा सकता है ताकि अगले साल इसे शुरू भी किया जा सके.

यह परियोजना कम से कम बीस बिलियन यूरो की डील होगी. यह परियोजना छह साल से भी ज़्यादा वक़्त से रुकी हुई है.

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दौरे को सफल माना जाएगा. जिन मुद्दों के साथ मोदी यहां पहुंचे थे, हर मुद्दे पर फ्रांस ने उनका खुलकर समर्थन किया है.

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