भारत प्रशासित कश्मीर पर क्या लिख रहे हैं पाकिस्तान के उर्दू अख़बार: पाक उर्दू प्रेस रिव्यू

  • 25 अगस्त 2019
इमरान ख़ान इमेज कॉपीरइट Getty Images

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते भारत प्रशासित कश्मीर से जुड़ी ख़बरें सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियों में रहीं.

भारत की नरेंद्र मोदी सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर राज्य को मिलने वाले विशेष दर्जे को ख़त्म कर दिया है. इसके अलावा सरकार ने जम्मू-कश्मीर से राज्य का दर्जा छीनकर उसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया है और राज्य का हिस्सा रहे लद्दाख़ को निकालकर एक अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाने का फ़ैसला किया है.

केंद्र सरकार के इस फ़ैसले के बाद भारत प्रशासित कश्मीर में कई तरह की पाबंदियां लगी हुई हैं. कई इलाक़ों में कर्फ़्यू लगा हुआ है, कहीं धारा 144 लगी है. शुरूआती दिनों में तो पूरे घाटी में शटडाउन था. इंटरनेट, लैंडलाइन सब बंद था. लेकिन धीरे-धीरे कर्फ़्यू में कुछ ढील दी गई है, लैंडलाइन फ़ोन कई जगहों पर काम करने लगे हैं. लेकिन इंटरनेट और मोबाइल अभी भी पूरी तरह ऑपरेशनल नहीं हुए हैं. राज्य के सारे छोटे-बड़े नेता या तो गिरफ़्तार हैं या नज़रबंद हैं.

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बार भारत प्रशासित कश्मीर से जुड़ी हर छोटी-बड़ी ख़बर को प्रमुखता से छाप रहे हैं. भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ़्रांस दौरे और राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाक़ात का भी ज़िक्र है.

अख़बार जंग ने सुर्ख़ी लगाई है, ''मोदी का फ़्रांस में मुर्दाबाद के नारों से स्वागत.'' अख़बार के अनुसार मोदी के पैरिस आने पर यूनेस्को हेडऑफ़िस के सामने कश्मीरी युवाओं ने मोदी मुर्दाबाद के नारे लगाए. इसके अलावा एफ़िल टावर के पास भी कश्मीरियों ने मोदी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया.

अख़बार के अनुसार राष्ट्रपति मैक्रों ने मोदी से मुलाक़ात में कहा कि भारत और पाकिस्तान को बातचीत के ज़रिए कश्मीर की समस्या का समाधान करना चाहिए.

इमेज कॉपीरइट TWITTER/PMOINDIA

लेकिन मैक्रों ने कश्मीर और अनुच्छेद 370 के मामले में भारत का साथ दिया है, ये ख़बर किसी भी पाकिस्तानी अख़बार में नहीं है.

सितंबर में अमरीका जाएंगे मोदी

अख़बार एक्सप्रेस ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के एक बयान के हवाले से सुर्ख़ी लगाई है, ''मोदी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुश्किल पैदा करने का फ़ैसला, मोदी के अमरीका आने पर भरपूर विरोध प्रदर्शन की तैयारी की जाए: इमरान ख़ान''.

संयुक्त राष्ट्र आम सभा की बैठक में हिस्सा लेने के लिए मोदी सितंबर में अमरीका जाएंगे.

अख़बार के अनुसार इमरान ख़ान ने कहा कि मोदी सरकार मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय क़ायदे क़ानून को रौंद रही है और कश्मीरियों को अपने ज़ुल्म का शिकार बनाने की तैयारी कर रही है. इमरान ख़ान ने कहा कि वो भारत प्रशासित कश्मीर के लोगों की आवाज़ दुनिया के हर फ़ोरम पर उठाएंगे.

वहीं अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार इमरान ख़ान ने कहा है कि भारत झूठा ऑपरेशन कर सकता है, लिहाज़ा दुनिया ख़बरदार रहे.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

अख़बार लिखता है कि इमरान ख़ान ने जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल को फ़ोन किया और उन्हें भारत प्रशासित कश्मीर के ताज़ा हालात से अवगत कराया. इमरान ने मर्केल से कहा कि कश्मीर के हवाले से किया गया भारत सरकार का हालिया फ़ैसला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों, अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों और ख़ुद भारत के अपने वादे का खुला उल्लंघन है.

इमरान ख़ान ने ये भी कहा कि भारत प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकार के उल्लंघन से लोगों को ध्यान हटाने के लिए भारत एक झूठा ऑपरेशन भी कर सकता है और अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की ज़िम्मेदारी है कि वो फ़ौरन अपना रोल अदा करे.

बातचीत का फ़ायदा नहीं

अख़बार दुनिया ने सुर्ख़ी लगाई है, ''दो परमाणु शक्तियां आमने-सामने, कुछ भी हो सकता है. भारत से बातचीत का अब कोई फ़ायदा नहीं: इमरान ख़ान''.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

अख़बार के अनुसार इमरान ख़ान ने कहा है कि पाकिस्तान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई करने का बहाना ढूंढ़ने के लिए भारत अपने हिस्से वाले कश्मीर में कोई भी जाली ऑपरेशन का ड्रामा रचा सकता है, जिसपर पाकिस्तान को मजबूर होकर जवाबी कार्रवाई करनी पड़ेगी. इमरान ख़ान ने आगे कहा कि दो परमाणु ताक़तें आंखों में आंखें डाले आमने-सामने आ जाएंगी तो कुछ भी हो सकता है.

अमरीकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए गए इंटरव्यू में इमरान ख़ान ने कहा कि फ़ासीवादी और हिंदू धर्म की श्रेष्ठता की सोच रखने वाले मोदी भारत प्रशासित कश्मीर की मुस्लिम बहुल आबादी को ख़त्म करके उसे हिंदू बहुत आबादी में बदलना चाहते हैं. इमरान ख़ान ने कहा कि भारत की मौजूदा केंद्र सरकार नाज़ी जर्मनी जैसी है और घाटी में 80 लाख लोगों की ज़िंदगी ख़तरे में है. इमरान ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति सेना और यूएन पर्यवेक्षक को कश्मीर भेजा जाना चाहिए ताकि इन ख़तरों से निपटा जा सके.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार