ट्रेन बंद होने के बाद भारत और पाकिस्तान कैसे आ जा रहे हैं लोग

  • 28 अगस्त 2019
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Image caption भारत और पाकिस्तान के बीच ट्रेन सेवा लोगों की यात्रा का अहम साधन है.

भारत प्रशासित कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव जारी है, जिसका असर दोनों देशों के बीच यात्रा करने वाले पर भी पड़ा है.

भारत के अनुच्छेद 370 हटाने के क़दम के विरोध में पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच चलने वाली समझौता और थार एक्सप्रेस को रद्द कर दिया था. इसके कारण भारतीय नागरिक पाकिस्तान में फंस कर रह गए हैं जबकि भारत जाने वाले पाकिस्तानी भी कई गुना ज़्यादा पैसा ख़र्च करके दूसरे साधनों से वापिस लौट रहे हैं.

दोनों देशों के बीच ट्रेन सेवा भारत और पाकिस्तान के लोगों के लिए एक-दूसरे के यहां जाने का बड़ा ज़रिया मानी जाती है. दोनों देशों के नागरिक अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए इसी का सहारा लेते हैं.

ट्रेन सेवा के अचानक बंद होने से सबसे अधिक प्रभावित वे लोग हुए हैं जिनके वीज़ा की अवधि ख़त्म होने वाली थी.

सिंध सचिवालय कराची में पाकिस्तानी वीज़ा की अवधि बढ़ाने के लिए मौजूद भारतीयों ने बीबीसी को बताया कि चार सौ के क़रीब लोगों ने अवधि बढ़ाने को लेकर अर्ज़ी जमा करवाई है.

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Image caption ट्रेन सेवा के बंद होने के बाद सबसे अधिक वो लोग प्रभावित हुए हैं जिनके वीज़ा की अवधि समाप्त हो रही है

'ट्रेन बंद होने का नोटिस जारी होना चाहिए था'

ऐसे ही एक भारतीय मोहम्मद अफ़ज़ल का कहना था कि उनकी पत्नी, बच्चे समेत परिवार के आठ लोग एक महीने के लिए एक शादी समारोह में कराची पहुंचे थे. उनका कहना था, "कुछ दिन पहले जब हमने वापसी की तैयारी शुरू कर दी थी तो हमें पता चला कि ट्रेन तो जा ही नहीं रही."

मोहम्मद अफ़ज़ल के मुताबिक़, "अगर ट्रेन सेवा को रद्द ही करना था तो लोगों को अपने घर वापस लौटने के लिए कुछ वक़्त दे देते, कोई नोटिस जारी कर देते थे कि किस दिन ट्रेन सेवा रद्द की जाएगी लेकिन इसे तुरंत रद्द करने से लोगों के सामने समस्याएं खड़ी हो गई हैं."

दूसरी ओर शुक्रवार को भारत से वाघा के रास्ते पाकिस्तान पहुंचे वाले एक पाकिस्तानी नागरिक हुसैन अली ने बताया कि वह अपने परिवार के साथ नौ अगस्त को दिल्ली से ट्रेन पर बैठे थे जो अटारी रेलवे स्टेशन पर खड़ी हुई मगर पाकिस्तानी की ओर से इंजन नहीं आया और कई घंटों के इंतज़ार के बाद उन्हें वापस दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचा दिया गया.

उनका कहना था, "इस ट्रेन में तक़रीबन 200 के क़रीब यात्री मौजूद थे. बच्चों के साथ होने के कारण यह यात्रा बहुत मुश्किल थी लेकिन दिल्ली में हमारे रिश्तेदार दोबारा हमें लेने पहुंच गए."

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Image caption भारत में फंसे पाकिस्तानियों को रूट बदलने का मौक़ा मिल रहा है लेकिन पाकिस्तान में फंसे भारतीयों को यह सहूलियत नहीं मिल रही है

'इस्लामाबाद जाने के लिए कह देते हैं'

हुसैन अली ने बताया, "इसके बाद हम लोग वीज़ा की अवधि बढ़वाने के लिए गई तो वहां हमें बताया गया कि अगर हम वीज़ा की अवधि नहीं बढ़वाना चाहते हैं तो हमारा रूट बदला जा सकता है और हम अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान में दाख़िल हो सकते हैं. हमने इस पेशकश का फ़ायदा उठाया और हम अतिरिक्त पैसा ख़र्च करके वापस पाकिस्तान पहुंचे हैं."

कराची पहुंचने वाले पाकिस्तानी नागरिक शमशाद गुल की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी. उन्होंने भी बताया कि ट्रेन सेवा के रद्द होने के बाद भारतीय अधिकारियों से उन्होंने रूट बदलने का अनुरोध किया जो स्वीकार कर लिया गया जिसके बाद वह वाघा के रास्ते लाहौर और वहां से कराची पहुंचने में कामयाब हुए.

भारत की ओर से वापसी का इंतज़ार कर रहे पाकिस्तानियो को रूट बदलने का विकल्प दिया जा रहा है लेकिन पाकिस्तान में फंसे भारतीयों का कहना है कि उनकी कोई मदद नहीं की जा रही है.

मोहम्मद अफ़ज़ल के मुताबिक़ जब उन्होंने सिंध सचिवालय में वाघा बॉर्डर से भारत जाने की अनुमति मांगी तो उन्हें यह कहते हुए मना कर दिया गया कि इस सुविधा सिंध सचिवालय में नहीं है, इसके लिए इस्लामाबाद में गृह मंत्रालय में अर्ज़ी पहुंचानी होगी और इस सब में कम से कम 10-15 दिन का वक़्त लगेगा.

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उनका कहना था कि इसकी वजह से उनके बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है.

वह कहते हैं, "मेरी बड़ी बेटी 12वीं और छोटी 10वीं क्लास में पढ़ती है और उनके फ़र्स्ट टर्म एग्ज़ाम शुरू हो गए हैं. इसके अलावा मेरे व्यवसाय का भी नुकसान हो रहा है. हवाई जहाज़ से यात्रा करना हमारे लिए संभव नहीं है और ट्रेन सेवा शुरू होने का हम इंतज़ार नहीं कर सकते."

उन्होंने कहा कि भारतीय केवल वापस भारत जाना चाहते हैं और "अगर पाकिस्तान अधिकारी हमारे मामले पर ग़ौर करें और कराची में ही रूट बदलने की अर्ज़ी स्वीकार करें तो इससे भारतीय यात्रियों की समस्याएं हल हो जाएंगी."

बीबीसी ने इस मामले में विदेश मंत्रालय से कई बार संपर्क किया लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं आया.

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कितने लोग करते हैं यात्रा

पाकिस्तान रेलवे के एक अधिकारी ने बताया है कि ट्रेनें रद्द होने से पहले पाकिस्तान और भारत के बीच हर सप्ताह तीन ट्रेनें चलती थीं जिनमें कराची से थार एक्सप्रेस सप्ताह में एक बार, कराची से मोनाबाऊ और लाहौर से समझौता एक्सप्रेस सप्ताह में दो बार चलती हैं.

अधिकारी के मुताबिक़ हालिया तनाव से पहले आख़िरी बार भारत से कराची आने वाली ट्रेन में 700 यात्री थे जबकि समझौता एक्सप्रेस के ज़रिए तक़रीबन 900 यात्रियों ने सफ़र किया.

पाकिस्तान रेलवे के अधिकारी का कहना है कि जिन यात्रियों ने टिकट ख़रीद लिए हैं उनके पैसे वापस किए जा रहे हैं.

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