मैं आपको बताऊंगा कि कब LOC जाना है: इमरान ख़ान

  • 13 सितंबर 2019
पाक प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद में रैली के दौरान भाषण देते इमरान ख़ान इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption पाक प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद में रैली के दौरान भाषण देते इमरान ख़ान

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि भारत अपने हिस्से के कश्मीर में जो कर रहा है उससे इंतहापसंदी यानी कि अतिवादी सोच पैदा होगी.

पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद में शुक्रवार को एक जलसे को संबोधित करते हुए इमरान ख़ान ने कहा कि वो भारत प्रशासित कश्मीर के लोगों के लिए वो करेंगे जो आजतक किसी ने नहीं किया होगा.

भारत ने पाँच अगस्त को जम्मू-कश्मीर राज्य को संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत मिलने वाले विशेष राज्य के दर्जे को ख़त्म कर दिया था. इसके अलावा जम्मू-कश्मीर राज्य को भी समाप्त कर उसे दो केंद्र प्रशासित प्रदेश बनाने की घोषणा की थी.

उसके बाद से ही कश्मीर में तनाव बना हुआ है. नागरिक अधिकारों पर पाबंदी लगी हुई है. ज़्यादातर इलाक़ों में धारा 144 लागू है. लैंडलाइन दोबारा बहाल हो गए हैं लेकिन मोबाइल और इंटरनेट पर अभी भी पाबंदी लगी हुई है.

1947 में भारत की आज़ादी और देश के विभाजन के समय से ही कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान में विवाद बना हुआ है. पाकिस्तान कहता है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और कश्मीरी जनता की इच्छा के अनुसार कश्मीर का अंतिम फ़ैसला होना चाहिए. जबकि भारत का कहना है कि कश्मीर उसका अभिन्न अंग है और पाकिस्तान के हिस्से वाले कश्मीर पर भी भारत अपनी दावेदारी पेश करता है.

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शुक्रवार को कश्मीरी जनता के समर्थन में आयोजित जलसे को संबोधित करते हुए इमरान ख़ान ने भारत की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी और उसके वैचारिक संगठन आरएसएस को भी निशाना बनाया.

इमरान ख़ान ने कहा कि आरएसएस हिटलर और मुसोलिनी को अपना रोल मॉडल मानती है और भारत की सरकार उसी विचारधारा को कश्मीर पर थोंपना चाहती है.

उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देते हुए कहा कि वो जो कर रहे हैं उससे कश्मीरी जनता में भारी प्रतिक्रिया होगी और इससे हिंसक वारदातों में और इज़ाफ़ा होगा.

इमरान ने कहा कि न केवल कश्मीर, बल्कि 20 करोड़ भारतीय मुसलमानों और दुनिया भर के सवा अरब मुसलमानों में इसको लेकर प्रतिक्रिया होगी.

इमरान ने कहा कि भारत न केवल कश्मीरियों को बल्कि 20 करोड़ भारतीय मुसलमानों को भी इंतहापसंदी यानी अतिवाद की तरफ़ धकेल रहा है.

उन्होंने कहा कि वो कश्मीरी जनता के राजदूत बन कर दुनिया भर के सामने जाएंगे और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के ज़रिए कश्मीरियों की स्थिति के बारे में दुनिया भर के लोगों को अवगत कराएंगे.

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उन्होंने पुलवामा हमले का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारतीय सेना के ज़ुल्म के शिकार 20 साल के एक नौजवान ने भारतीय सैनिकों पर हमला किया जिसमें 40 से ज़्यादा सैनिक मारे गए थे.

लेकिन भारत ने उसके लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराया और बालाकोट पर बमबारी की.

इमरान ने कहा कि उसका नतीजा दुनिया ने देखा कि कैसे पाकिस्तान ने भारतीय जहाज़ को मार दिया और उनके लड़ाकू विमान के एक पायलट को भी पकड़ लिया था.

इमरान ख़ान ने कहा कि पाकिस्तान ने भारतीय पायलट को इसलिए वापस कर दिया क्योंकि पाकिस्तान इलाक़े में शांति चाहता है.

उन्होंने कहा कि इसी महीने के आख़िर में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी कश्मीर की बात करेंगे. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जगत से कहा कि वो 'हिंदुस्तान के हिटलर' को रोकें.

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इमरान ख़ान ने और क्या-क्या कहा

  • कश्मीर का मसला इंसानियत का मसला है. 40 दिनों से हमारे कश्मीरी भाई-बहन, बुर्जुग-बच्चे कर्फ़्यू के नीचे हैं. मैं खासतौर पर नरेंद्र मोदी को ये पैगाम देना चाहता हूं कि सिर्फ़ एक बुज़दिल इंसान ही दूसरे इंसानों पर ज़ुल्म करता है.
  • आप इस ज़ुल्म में कामयाब नहीं होंगे क्योंकि कश्मीर की आवाम में मौत का खौफ़ ख़त्म हो चुका है. उनका डर चला गया है, उन्हें आप शिकस्त नहीं दे सकते.
  • नरेंद्र मोदी बचपन से आरएसएस से जुड़े हुए हैं और आरएसएस वो जमात है जिसमें मुसलमानों के लिए नफ़रत भरी हुई है. जब ये बनी थी तो इसका मकसद था कि हिंदुस्तान सिर्फ़ हिंदुओं के लिए हो.
  • मैं नरेंद्र मोदी और हिंदुस्तान को कहना चाहता हूं कि मैं सारी दुनिया में कश्मीर का दूत बनकर जाऊंगा. दुनिया को बताऊंगा कि आरएसएस की असलियत क्या है. जिस तरह हिटलर और नाजसी पार्टी ने जर्मनी में लोगों पर ज़ुल्म किया, ये भी उसी रास्ते पर चल रहे हैं.
  • ये वो हिंदुस्तान बनने जा रहा है जो न नेहरू चाहते थे, न महात्मा गांधी. इसी आरएसएस की विचारधारा ने महात्मा गांधी का ख़ून किया था.
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Image caption मुज़फ़्फ़राबाद में रैली के दौरान इमरान ख़ान
  • कश्मीर अंतरराष्ट्रीय मसला बन गया है. पहले संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर की बात हुई और फिर पहली बार यूरोपीय संघ ने कहा कि कश्मीर का मसला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के मुताबिक होना चाहिए. जिसका मतलब है कि कश्मीरियों को जनमतसंग्रह के ज़रिए अपने भविष्य का फैसला करने का हक़ मिलेगा.
  • मैं अगले हफ़्ते संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली में जा रहा हूं और अपने कश्मीरियों को मायूस नहीं करूंगा. कोई आज तक कश्मीरियों के लिए इस तरह नहीं खड़ा हुआ है जैसे मैं खड़ा होऊंगा.
  • जिन लोगों के ऊपर आप ज़ुल्म कर रहे हैं वो इसके ख़िलाफ़ लड़ेंगे. जब ज़ुल्म इंतेहा पर पुहंच जाता है तो हर इंसान फैसला करता है कि ज़िल्लत की ज़िंदगी से तो मौत अच्छी है.
  • याद रखें कि पाकिस्तान में कोई जेट आए या फ़ौज आए, तो मैं बार-बार कहता हूं कि ईंट का जवाब पत्थर से दिया जाएगा.
  • ये वक़्त है कि हिंदुस्तान के हिटलर को रोको. कश्मीरियों पर से कर्फ़्यू हटाओ और उन्हें जनमतसंग्रह के ज़रिए फैसला करने का मौका दिया जाए.
  • मुझे ये पता है कि आप में से कई एलओसी (लाइन ऑफ़ कंट्रोल) की तरफ़ जाना चाहते हैं. आप में जज़्बा और जुनून है. लेकिन, अभी एलओसी की तरफ़ मत जाना जब तक मैं आपको नहीं बताऊंगा. मैं आपको बताऊंगा कि कब जाना है. पहले मुझे संयुक्त राष्ट्र जाने दो. दुनिया के नेताओं को बताने दो, कश्मीर का केस लड़ने दो.

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