अरामको पर ड्रोन हमले से सऊदी अरब के तेल उत्पादन में भारी कटौती

अरामको

सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको के दो बड़े ठिकानों पर ड्रोन हमले से तेल उत्पादन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स और वॉल स्ट्रीज जर्नल ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि इस हमले के कारण तेल उत्पादन में हर दिन 50 लाख बैरल की कमी आएगी. यह सऊदी अरब के कुल तेल उत्पादन का आधा है.

सऊदी के सरकारी मीडिया का कहना है कि इस हमले में दोनों प्रतिष्ठानों में भीषण आग लग गई.

फ़ुटेज में साफ़ दिख रहा है कि अरामको की सबसे बड़ी रिफ़ाइनरी वाले इलाक़े बक़ीक़ के ऊपर धुएं के गुब्बार और आग की लपटें हैं.

दूसरा ड्रोन हमला ख़ुरैस तेल क्षेत्र में हुआ और वहां भी आग लग गई. सरकारी मीडिया के अनुसार, दोनों प्रतिष्ठानों में आग पर क़ाबू पा लिया गया है.

यमन के ईरान समर्थित हूती लड़ाकों पर पहले हुए हमलों के आरोप लगते रहे हैं.

लेकिन सऊदी मीडिया में इस बात का ज़िक्र नहीं है कि इन ताजा हमलों के पीछे किसका हाथ है.

यमन में ईरान से जुड़े हूती ग्रुप के एक प्रवक्ता ने कहा है कि हमले के लिए 10 ड्रोन भेजे गए थे. सैन्य प्रवक्ता याह्या सारए ने अल-मसिरह टीवी से कहा कि सऊदी पर भविष्य में ऐसे हमले और हो सकते हैं. याह्या ने कहा, ''यह हमला बड़े हमलों में से एक है जिसे हूती बलों ने सऊदी के भीतर अंजाम दिया. इस हमले में सऊदी शासन के भीतर के प्रतिष्ठित लोगों की मदद मिली है.'' हालांकि सऊदी के अधिकारियों ने हूती के दावे पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार, "औद्योगिक सुरक्षा बल की टीम ने स्थानीय समय सुबह चार बजे बक़ीक और ख़ुरैस में स्थित अरामको के दो तेल प्रतिष्ठानों में आग बुझाने का काम शुरू किया."

सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत दहरान से 60 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में बक़ीक़ है जबकि यहां से 200 किलोमीटर दूर ख़ुरैस है.

बक़ीक़ में तेल रिफ़ाइनरी है, जहां प्रति दिन 70 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन होता है. अरामको का कहना है कि यह दुनिया का सबसे बड़ा 'कच्चे तेल का स्टैबिलाइजेशन प्लांट' है.

साल 2006 में बक़ीक़ पर अलक़ायदा के आत्मघाती हमले को सऊदी सुरक्षाबलों ने नाकाम कर दिया था.

ख़ुरैस तेल क्षेत्र की शुरुआत 2009 में हुई और ये ग़ावर के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा प्लांट है.

दावा किया जाता है कि ख़ुरैस प्लांट प्रति दिन 15 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है जबकि 20 अरब बैरल से ज़्यादा अनुमानित तेल रिज़र्व है.

वैश्विक तेल बाज़ार सप्ताहांत की वजह से बंद है, इसलिए तेल के दामों में अभी तत्काल असर पड़ने की कोई आशंका नहीं है.

किंग सलमान के बेटे क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के आर्थिक सुधारों की नीति के तहत देश की अर्थव्यवस्था की तेल पर निर्भरता कम करने के लिए अरामको जल्द ही आईपीओ लॉन्च करने वाले हैं.

हमले के पीछे किसका हाथ?

पिछले महीने शयबाह नैचुरल गैस की साइट पर भी ड्रोन हमला हुआ था और इसके लिए हूती विद्रोहियों पर आरोप लगा था.

इसके अलावा मई महीने भी अन्य तेल कंपनियों को निशाने पर लिया गया था. हूती विद्रोहियों के बारे में कहा जाता है कि इन्हें ईरान से मदद मिलती है. हूती विद्रोही यमन की सरकार से और सऊदी के नेतृत्व वाले सैन्य बलों से लड़ रहे हैं.

यमन में 2015 से जंग छिड़ी हुई है. 2015 में यमन के तत्कालीन राष्ट्रपति अबद्राबुह मंसूर हादी को हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना से भागने पर मजबूर कर दिया था. सऊदी अरब हादी का समर्थन कर रहा है और अपने नेतृत्व में पड़ोसी देशों की सेना के साथ हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ लड़ रहा है.

सऊदी के नेतृत्व वाला सैन्य गठबंधन हर दिन यमन में हूती विद्रोहियों के ख़िलाफ़ हवाई हमले करता है. दूसरी तरफ़ हूती विद्रोही भी सऊदी में मिसाइल दागते रहते हैं. सऊदी और ईरान में बढ़ती प्रतिद्वंद्विता के कारण भी इस इलाक़े में तनाव है.

इमेज कैप्शन,

सऊदी अरब के नेतृत्व वाला सैन्य गठबंधन हूती विद्रोहियों को निशाना बनाने के लिए हवाई हमला करता रहा है.

सऊदी अरब और अमरीका दोनों खाड़ी में दो तेल टैंकरों पर जून और जुलाई में हुए हमले के लिए ईरान को दोषी मानते हैं. हालांकि ईरान इन आरोपों को ख़ारिज करता रहा है.

मई महीने में चार तेल टैंकर, जिनमें दो पर सऊदी का झंडा था, को निशाने पर लिया गया था. यह हमला संयुक्त अरब अमीरात के जल क्षेत्र गल्फ़ ऑफ ओमान में हुआ था.

सऊदी अरब और अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने इन हमलों के लिए ईरान को ज़िम्मेदार बताया था. हालांकि तेहरान ने इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया था.

ईरान के साथ तनाव तब और बढ़ गया था जब उसने अमरीका के एक सर्विलांस ड्रोन को मार गिराया था. ईरान ने अमरीकी ड्रोन को जून महीने में होरमूज़ में मार गिराया था. इसके बाद अमरीका ने सऊदी में सेना की तैनाती की घोषणा कर दी थी.

अरामको सऊदी की शान

पिछले साल अरामको की कमाई 111 अरब डॉलर रही थी. 2018 में अरामको ने सऊदी की सरकार को 160 अरब डॉलर की रक़म दी थी. मूडी का कहना है कि अरामको की कमाई तेल के ज़्यादा उत्पादन से हुई है. आरामको के पास दुनिया के कुछ बड़े तेल क्षेत्र हैं और बहुत ही कम क़ीमत में मिले हैं.

आरामको की इस वित्तीय सूचना आने के बाद सऊदी अरब के बड़े तेल क्षेत्रों की भी जानकारी सामने आई थी. सऊदी अरब के पूर्वी हिस्से में घवार सबसे बड़ा तेल क्षेत्र है. यह 193 किलोमीटर का है. घवार में सऊदी अरब के कुल तेल भंडार का आधा हिस्सा है. अब भी यहां 48 अरब बैरल तेल है.

आरामको तेल कंपनी के पांच फ़ीसदी शेयर को बेचने की योजना थी. इसे अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ कहा जा रहा था.

आरामको का आईपीओ मोहम्मद बिन सलमान के विजन 2030 के उस प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसके तहत वो सऊदी को तेल पर निर्भरता वाली अर्थव्यवस्था से बाहर निकालना चाहते हैं. सऊदी में अरामको शाही परिवार के लिए एक तेल कंपनी से ज़्यादा मायने रखती रही है.

इस कंपनी की स्थापना अमरीकी तेल कंपनी ने की थी. आरामको यानी 'अरबी अमरीकन ऑइल कंपनी' का सऊदी ने 1970 के दशक में राष्ट्रीयकरण कर दिया था.

आरामको की कमाई की सूचना आई तो उस आधार पर विश्लेषकों का कहना है कि यह एक से डेढ़ ट्रिलियन डॉलर की कंपनी है. हालांकि क्राउन प्रिंस सलमान चाहते हैं कि आरामको दो ट्रिलियन डॉलर की कंपनी बने.

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