पाकिस्तानी अख़बारों में अब भी कश्मीर ही कश्मीर है- उर्दू प्रेस

  • 15 सितंबर 2019
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पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते भी भारत प्रशासित कश्मीर से जुड़ी ख़बरें सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियों में रहीं.

भारत ने इसी साल पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 से मिले विशेष राज्य के दर्जे को ख़त्म करने की घोषणा कर दी थी.

इसके बाद से ही भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से ही चल रहे ख़राब संबंधों में और इज़ाफ़ा हो गया है.

भारत कहता रहा है कि न केवल भारत प्रशासित कश्मीर बल्कि पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर भी भारत का अभिन्न अंग है.

जबकि पाकिस्तान कहता रहा है कि कश्मीर एक विवादित जगह है और उसके अनुसार संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और कश्मीरी जनता की इच्छा के अनुसार ही इसका अंतिम फ़ैसला होना चाहिए.

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Image caption पाक प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद में रैली

युद्ध के होंगे गंभीर परिणाम

पाकिस्तानी अख़बारों के पहले पन्ने पर पूरे हफ़्ते कश्मीर से जुड़ी ख़बरें ही छायी रहीं.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच अगर पारंपरिक जंग होती है तो वो परमाणु युद्ध का रूप अख़्तियार करेगी.

अख़बार जंग के अनुसार क़तर के एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में इमरान ख़ान ने कहा कि पाकिस्तान जंग के ख़िलाफ़ है और वो जंग के लिए पहल नहीं करेगा, लेकिन अगर भारत और पाकिस्तान में पारंपरिक युद्ध की शुरूआत हुई तो उसका अंत परमाणु युद्ध पर होगा और उसके परिणाम गंभीर होंगे.

इमरान ख़ान ने कहा कि जब से वो प्रधानमंत्री बने हैं उन्होंने हमेशा भारत को बातचीत का न्यौता दिया है लेकिन भारत उनकी इस अपील को ग़लत तरीक़े से लेता है.

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दुनिया खामोश रही तो शांति को ख़तरा

चीन ने कहा है कि वो भारत प्रशासित कश्मीर में भारतीय कदम का विरोध करते रहेंगे. अख़बार जंग के मुताबिक़ चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने सात-आठ सितंबर को पाकिस्तान का दौरा किया.

चीनी विदेश मंत्री की पाकिस्तान यात्रा के दौरान दोनों देशों के नेताओं ने संयुक्त बयान जारी किया जिसमें ये कहा गया है कि भारत प्रशासित कश्मीर का मसला इतिहास से जुड़ा हुआ है और इस समस्या का समाधान यूएन चार्टर, सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौते की शर्तों के अनुसार शांतिपूर्ण तरीक़े से ही होना चाहिए.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ़ अलवी ने कहा है कि दुनिया ने कश्मीरियों की नस्लकुशी न रोकी तो अंतरराष्ट्रीय संकट पैदा हो जाएगा.

अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार पाकिस्तानी संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, "हम भारत से कहते हैं कि वो हालात को वहां तक न ले जाएं जहां से वापसी मुमकिन न हो."

उन्होंने कहा कि कश्मीर के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय जगत की ख़ामोशी अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए ख़तरा होगी.

शुक्रवार को पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद में कश्मीरियों के समर्थन में इमरान ख़ान ने एक जलसे को संबोधित किया था. सारे अख़बारों में इमरान ख़ान का ये भाषण भी सुर्ख़ियों में रहा.

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Image caption पाक प्रशासित कश्मीर की राजधानी मुज़फ़्फ़राबाद में रैली के दौरान भाषण देते इमरान ख़ान

अख़बार दुनिया के अनुसार यूरोपीय संसद में 17 सितंबर को कश्मीर के मुद्दे पर बहस होगी.

अख़बार लिखता है कि संसद में बहस के दौरान यूरोपीय संघ के मानवाधिकार के प्रतिनिधि संसद को कश्मीर की ताज़ा स्थिति के बारे में बताएंगे.

अख़बार के अनुसार पाकिस्तानी मूल के यूरोपीय संघ के सांसद शफ़क़ मोहम्मद ने कश्मीर के मुद्दे को संसद के एजेंडे में लाने में सक्रिय भूमिका निभाई है.

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Image caption भारत प्रशासित कश्मीर में सेना

भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर 'फ्लैश प्वाइंट'

अख़बार जंग के अनुसार छह अमरीकी सांसदों ने कश्मीर की स्थिति के बारे में भारत और पाकिस्तान में अमरीकी राजदूत को ख़त लिखा है.

ख़त में सांसदों ने अपने राजदूत से कहा है कि वो कश्मीर में जारी पाबंदियां हटाने के लिए भारत सरकार पर दबाव बनाएं.

ख़त में सांसदों ने लॉकडाउन और राजनेताओं समेत हज़ारों लोगों की गिरफ़्तारी और नज़रबंदी पर चिंता जताई है. ख़त में ये भी कहा गया है कि कश्मीर के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध और ख़राब होने की आशंका है.

उधर इमरान ख़ान के सूचना सलाहकार फ़िरदौस आशिक़ अवान ने कहा है कि कश्मीर दो परमाणु ताक़तों के बीच फ़्लैश प्वाइंट है.

उधर अमरीका के पूर्व उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति चुनाव के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवारी के एक दावेदार जो बाइडेन ने कहा है कि भारत प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकार का उल्लंघन शांति के लिए ख़तरा है.

इस मौक़े पर उन्होंने अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को भी निशाना बनाया. उन्होंने कहा कि ट्रंप की ख़ामोशी के कारण दुनिया भर में मानवाधिकार के उल्लंघन के मामले सामने आ रहे हैं.

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