कुवैत पर हमले के बाद से सबसे महंगा हुआ तेल

  • 16 सितंबर 2019
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सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हुए हमलों के बाद तेल की क़ीमत एक झटके में 20 फ़ीसदी बढ़कर 71 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है. बीते तीन दशकों में कच्चे तेल की यह सबसे ज़्यादा क़ीमत है.

एक घटना की वजह से पचास लाख बैरल प्रति दिन का उत्पादन कम होने की यह अभूतपूर्व घटना है. यह कटौती विश्व आपूर्ति की पांच फ़ीसदी है.

अंतर्राष्ट्रीय मानक कच्चे तेल के ब्रेंट बैरल की क़ीमत में यह 1990 के बाद सबसे बड़ा उछाल है, जब इराक़ी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन ने कुवैत पर हमला किया था.

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बाज़ारों पर दिखेगा असर?

शनिवार को हुए हमले के बाद सोमवार को जब बाज़ार खुले तो तेल की क़ीमतें आसमान छू रही थीं.

सऊदी अरब की सरकारी कंपनी अरामको पर हुए हमले में देश का आधे से ज़्यादा तेल उत्पादन बंद हो गया है और इसकी चिंता निवेशकों में साफ़ देखी जा सकती है.

अंतर्राष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चे तेल की क़ीमत एशिया में प्रति बैरल 12 डॉलर बढ़ गई और यह 71 डॉलर तक जा पहुंची. लेकिन दिन चढ़ने के साथ इसमें कुछ राहत मिली और यह 65 डॉलर के आस-पास आ गई.

अमरीकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सस इंडरमीडिएट की क़ीमत में 16 फ़ीसदी का इज़ाफ़ा हुआ और यह बढ़कर 63.64 डॉलर तक जा पहुंची.

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अमरीका ने इस हमले का आरोप ईरान पर लगाया है. इस घटना के बाद से वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में बेचैनी है और विश्व अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर देखा जा सकता है.

दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक सऊदी अरब कब अपने असल उत्पादन को बहाल कर पाएगा, इस पर अस्पष्टताओं के चलते आशंकाएं और गहरी हुई हैं. हमले से पहले सऊदी अरब 9.8 मिलियन बैरल प्रति दिन कच्चे तेल का उत्पादन करता रहा है.

इसका असर वैश्विक बाज़ार पर दिखने के संकेत भी मिले हैं. हॉन्ग कॉन्ग का शेयर बाज़ार सूचकांक हैंग सेंग 1.1 फ़ीसदी की गिरावट हुई है. चीन के शेयर बाज़ार पर भी इसका मामूली असर दिखा है.

सऊदी अरब आपूर्ति बहाल करने की कोशिश कर रहा है. सऊदी ने कहा है कि आपूर्ति को सामान्य बनाने के लिए स्टोरेज का इस्तेमाल करेगा. हालांकि फ़ाइनैंशिय टाइम्स से सऊदी के सूत्रों ने कहा है कि कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा बाधित हुआ है और इसे बहाल करने में वक़्त लगेगा.

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