पाकिस्तान से भागकर अमरीका पहुंचीं मानवाधिकार कायकर्ता गुलालाई इस्माइल

  • 22 सितंबर 2019
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सेना के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता को महीनों तक छिपने के बाद पाकिस्तान छोड़कर भागना पड़ा है.

पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता गुलालाई इस्माइल अब अमरीका में हैं. इस्माइल पाकिस्तानी सरकार के निशाने पर थीं लेकिन वह उन पर लगाए गए यात्रा प्रतिबंधों से बचकर देश छोड़कर भाग निकली हैं.

पाकिस्तान ने इस्माइल पर 'राज्य विरोधी गतिविधियों' और 'हिंसा भड़काने' के गंभीर आरोप लगाए हैं.

इस्माइल का कहना है कि उन्हें देश छोड़कर भागने पर मजबूर होना पड़ा क्योंकि उन्हें वहां जान का ख़तरा था. समाचार एजेंसी एएफ़पी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "अगर मुझे जेल में डालकर सालों तक प्रताड़ित किया जाता तो मेरी आवाज़ दब जाती."

उनके पिता मुहम्मद इस्माइल ने बीबीसी उर्दू को बताया कि इस्माइल के ख़िलाफ़ पाकिस्तानी अदालतों में छह मामले दर्ज हैं और उन्हें यह लगता है कि उनकी ज़िन्दगी गंभीर ख़तरे में है.

उन्होंने कहा, "गुलालाई ने इस समय देश छोड़ने का फ़ैसला किया क्योंकि उन्हें एहसास हुआ कि उनकी जान ख़तरे में है और उन्हें देश छोड़ना होगा वरना उनके साथ कुछ भी हो सकता है."

इस्माइल ने एक बयान में बताया, "पिछले कुछ महीने बहुत ही मुश्किल भरे रहे हैं. मुझे धमकी दी गई और बेहद परेशान किया गया. मैं भाग्यशाली हूं कि मैं ज़िंदा बची हूं."

इस्माइल ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि यात्रा पर प्रतिबन्ध होने के बावजूद वह देश छोड़ने में कैसे कामयाब हुईं. लेकिन उन्होंने द न्यूयॉर्क टाइम्स से बात करते हुए कहा, "मैं हवाई अड्डे के रास्ते देश से बाहर नहीं गई."

32 वर्षीय मानवधिकार कार्यकर्ता ने अब राजनीतिक शरण के लिए अनुरोध किया है और वह फ़िलहाल न्यूयॉर्क में अपनी बहन के साथ रह रही हैं.

गुलालाई इस्माइल के पीछे क्यों पड़ी थी पुलिस?

बीते कई सालों से इस्माइल मानवाधिकारों हनन की मुखर आलोचक रही हैं. इस्माइल खासकर महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ़ हो रहे अत्याचारों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाती रही हैं.

हालांकि ऐसा लगता है कि उन्होंने पिछले ही साल सरकार और अधिकारियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. ऐसा तब हुआ जब इस्माइल उन महिलाओं की वक़ालत करने लगीं जिन्होंने आरोप लगाया कि वे अफ़ग़ानिस्तान सीमा के पास सेना की कार्रवाई में यौन शोषण का शिकार हुईं हैं.

वह इन आरोपों को लेकर अधिक बेचैन ही गयी थीं जब एक बच्चा सुरक्षा बालों के हाथों अपनी मां के साथ किये जा रहे व्यवहार की शिकायत लेकर उनके पास पहुंचा था.

उन्होंने इस सप्ताह वाशिंगटन में एएफ़पी को बताया, "दर्जनों महिलाओं ने हमें बताया है कि यौन उत्पीड़न की घटनाएं कोई नयी बात नहीं है. यह व्यवस्थित तरीके से सालों से होता आ रहा है."

इस्माइल को पहली बार अक्तूबर 2018 में लंदन से लौटने के दौरान इस्लामाबाद हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया था. उस समय वह पश्तून तहफ़्फ़ुज़ (संरक्षण) आंदोलन या पीटीएम द्वारा आयोजित एक रैली में राज्य विरोधी व सैन्य विरोधी भाषण देने के आरोपित 19 लोगों में शामिल थीं.

इस साल फ़रवरी में उन्हें फिर गिरफ्तार कर लिया गया था जब वह पीटीएम कार्यकर्ता अरमान लूनी की मौत पर हो रहे विरोध में शामिल हुई थीं. अरमान लूनी की मौत हिरासत में हो गयी थी जबकि पुलिस उन्हें पीटने की बात से लगातार इनकार कर रही है. समूह के कई सदस्य अभी भी हिरासत में हैं.

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इस्माइल ने इसके बारे में एएफ़पी को बताया कि उन्हें दो दिन तक एक ठंडे कमरे में बिना खाना और पानी दिए रखा गया था, उस कमरे की ज़मीन पर पेशाब से सनी चादर थी.

लेकिन मई में हुई गिरफ्तारी के बाद ही उन्होंने छिपने का फैसला लिया. उस दौरान वह एक इस्लामिक उपनगर में 10 वर्षीय पश्तून बच्ची फरिश्ता के बलात्कार और हत्या पर हो रहे विरोध में शामिल थीं. इस दौरान उनके ख़िलाफ़ 'राज्य और अन्य राष्ट्रीयताओं के ख़िलाफ़' उकसाने का आरोप लगाया गया था.

गुलालाई इस्माइल कौन हैं?

गुलालाई इस्माइल 16 साल की उम्र से ही मानवाधिकारों की मुखर पैरोकार रहीं हैं.

इस्माइल उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान में ख़ैबर पख्तूनख्वा प्रांत से ताल्लुख रखती हैं. उन्होंने युवा लड़कियों को उनके अधिकारों के बारे में शिक्षित करने के लिए अवेयर गर्ल्स नामक एक एनजीओ की स्थापना भी की थी.

इसके तुरंत बाद उन्हें एक युवा लड़के के बारे में पता चला जिसकाआतंकवादी संगठन में शामिल करने के लिए ब्रेनवॉश किया गया था. इस घटना के बाद उन्होंने कट्टरता का मुक़ाबला करने के लिए अपने काम का विस्तार करने का फ़ैसला किया.

इस्माइल ने 2014 में बीबीसी के आउटलुक कार्यक्रम में शांति और लैंगिक समानता के बारे में कहा था कि यह दोनों चीज़ें एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं. शांति और लैंगिक समानता एक दूसरे की पूरक हैं और एक को पाए बिना दूसरे को नहीं पाया जा सकता.

2013 में उन्होंने घरेलू हिंसा और कम उम्र में शादी जैसे मुद्दों पर काम करने के लिए 100 महिलाओं की एक टीम बनाई थी..

उन्हें अपने काम के लिए कई पुरस्कार मिले हैं. लेकिन वह हमेशा जानती थीं कि यह सब एक जोखिम के साथ आता है. हालांकि जितने ज़्यादा लोग उनसे नाराज़ होते गए उतना ही वह अपने काम को जारी रखने के लिए दृढ़ होती गयीं.

उन्होंने बीबीसी को 2014 में बताया था, "यह सब इस ओर इशारा करता है कि मेरे काम का असर पड़ रहा है. अभी दो महीने पहले मेरे परिवार पर हमला किया गया था और हमें धमकी दी गई थी कि अगर हम नहीं रुके तो फिर से हमला किया जा सकता है."

"लेकिन यह सब कुछ बदालव और संघर्ष का हिस्सा है. इन सब घटनाओं ने मुझे और ज़्यादा प्रतिबद्ध बना दिया है."

इस्माइल पाकिस्तान से कैसे बच निकलीं?

इस्माइल को पिछले साल नवंबर में सरकारी निकास नियंत्रण सूची में डाल दिया गया था जिसका मतलब था कि उनके देश छोड़ने पर प्रतिबंध लग गया है.

पाकिस्तान के डॉन अख़बार के अनुसार, इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने उनका नाम मार्च में सूची से हटाने का आदेश दिया था. हालांकि सरकार को उनका पासपोर्ट ज़ब्त करने की अनुमति दे दी गई थी.

इसके बाद जब वह पाकिस्तान में छिपकर रहने लग गयीं थीं तब उन्हें ढूंढ निकालने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिस ऑपरेशन शुरू किया गया. लेकिन कुछ लोगों के एक छोटे से नेटवर्क के सहयोग के कारण वो पकड़े जाने से बचती रहीं और आख़िरकार पाकिस्तान से बाहर भाग निकलने में सफल रहीं.

उन्होंने इस बात की ज़्यादा जानकारी नहीं दी है कि वह देश से बाहर कैसे निकलीं. इस्माइल ने बस यह बताया कि वे हवाई रास्ते से नहीं निकली हैं.

उन्होंने रेडियो फ्री यूरोप को बताया कि वह अमरीका श्रीलंका के रास्ते पहुंची हैं. जहां पाकिस्तानी नागरिक बिना वीज़ा के यात्रा कर सकते हैं.

द न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार उन्होंने अपने छिपने या भाग निकलने की कहानी के बारे में बहुत ही कम जानकारी दी है. उनका कहना है, "इससे उन्हें डर है कि उन लोगों को ख़तरा हो सकता है जिन्होंने उन्हें छिपने और देश से बाहर निकलने में मदद की थी."

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