महाभियोग मामला: डेमोक्रेट नेताओं पर भड़के ट्रंप

  • 3 अक्तूबर 2019
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अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं पर आरोप लगाया है कि देश की बेहतरी पर ध्यान देने की बजाय चुनाव जीतने के लिए उनके ख़िलाफ़ महाभियोग की साज़िश कर रहे हैं.

ट्रंप ने डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उन पर बेईमानी का आरोप लगाया है और उन्हें देशद्रोही तक कहा है.

कांग्रेस की एक समिति ने ट्रंप पर लगे आरोपों से संबंधित सभी दस्तावेज़ों की मांग की है. ट्रंप पर यूक्रेन के राष्ट्रपति से हुई बातचीत में उन पर एक डेमोक्रेट नेता और उनके बेटे के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार की जांच शुरु करने का दवाब डालने का आरोप है.

ट्रंप इन आरोपों से लगातार इनकार करते रहे हैं.

डेमोक्रेट नेताओं ने इस जांच का बचाव करते हुए इसे निष्पक्ष रूप से पूरा कराने का वादा किया है.

क्या है ट्रंप के ख़िलाफ़ जांच का मामला?

राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग मामले में जांच शुरु हो चुकी है. उन पर अपने एक प्रतिद्वंदी के ख़िलाफ़ साजिश का आरोप लगाया गया है. जांच में आरोप सही पाए जाने पर ट्रंप को उनके पद से हटाया जा सकता है.

ये विवाद इसी साल 25 जुलाई को राष्ट्रपति के दफ्तर के किए गए एक फ़ोन कॉल से जुड़ा है. इस फ़ोन कॉल की पूरी जानकारी एक व्हिसलब्लोअर ने मांगी थी.

ये व्हिसलब्लोअर एक अमरीकी अधिकारी थे जिनकी शिकायत को बाद में "तत्काल ध्यान में लेने योग्य" और विश्वसनीय माना था. डेमोक्रेट सांसदों ने उनकी शिकायत की कॉपी को संसद में पेश करने की मांग की.

इसके बाद अमरीकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैन्सी पलोसी ने राष्ट्रपति ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की.

ट्रंप पर आरोप है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदिमीर ज़ेलेन्स्की के साथ फ़ोन पर हुई इस बातचीत में उन्होंने ज़ेलेन्स्की पर दबाव डाला कि वो जो बाइडेन और उनके बेटे के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के दावों की जाँच करवाएं.

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जो बाइडेन डेमोक्रेटिक पार्टी से नेता हैं और अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार हो सकते हैं. इसका मतलब ये है कि वो चुनाव में राष्ट्रपति ट्रंप के प्रतिद्वंदी हो सकते हैं. बाइडेन के बेटे यूक्रेन की एक गैस कंपनी में काम करते थे.

अब तक इस मामले में बाइडेन के ख़िलाफ़ कोई सबूत सामने नहीं आया है.

डेमोक्रेट नेताओं का आरोप है कि यूक्रेन के नए राष्ट्रपति ज़ेलेन्स्की जिस वक्त सत्ता में आए थे उस वक्त ट्रंप ने यूक्रेन को दी जाने वाली मदद को रोकने का फ़ैसला किया था.

उनका कहना है कि ट्रंप खुद के फायदे के लिए 2020 में होने वाले अमरीकी राष्ट्रपति चुनावों में यूक्रेन के हस्तक्षेप की कोशिश कर रहे थे.

क्या कहते हैं राष्ट्रपति ट्रंप?

बुधवार को फिनलैंड के राष्ट्रपति साउली नीनिस्तो के साथ एक साझा प्रेस वार्ता में ट्रंप ने बाइडेन और उनके बेटे को "जानबूझ कर भ्रष्टाचार करने वाला" कहा.

उनकी नाराज़गी उतरी हाउस इंटेलिजेंस कमिटि के चेयरमैन एडम शिफ़ पर जिन्हें उन्होंने "शिटिंग शिफ़" यानी पाला बदलने वाला और "छोटा व्यक्ति" कहा. उन्होंने कहा कि "उन्हें अपमान में अपने कार्यालय क इस्तीफ़ा दे देना चाहिए."

उन्होंने कहा कि "देशद्रोह के लिए शिफ़ की जांच होनी चाहिए."

ट्रंप ने आरोप लगाया कि व्हिसिलब्लोअर की शिकायत लिखने में शिफ़ ने उनकी मदद की है. हालांकि ट्रंप ने अपने इस आरोप के समर्थन में किसी तरह के कोई सबूत पेश नहीं किए.

अमरीकी राष्ट्रपति ने अपने ख़िलाफ़ लाई गई शिकायत को खारिज करने की मांग की और संवाददाताओं से कहा कि केवल "वैध" व्हिसलब्लोअर को ही सुरक्षा दी जानी चाहिए.

ट्रंप ने कहा, "इस देश को पता लगाने की ज़रूरत है कि ये व्यक्ति कौन है क्योंकि मुझे लगता है कि ये कोई जासूस है."

उन्होंने कहा कि उनके ख़िलाफ़ चलाई जा रही पूरी जांच "धोखा" है और ये "अमरीकी लोगों के साथ किया जा रहा अपराध है". उन्होंने कहा कि वो इस जांच में पूरी तरह कांग्रेस से सहयोग करेंगे.

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रॉयटर्स समाचार एजेंसी के एक संवाददाता ने उनसे सवाल किया कि कौन सी बात को वो देशद्रोह मानते हैं. इस सवाल के उत्तर में ट्रंप ने कहा कि "कई लोगों का मानना है कि मैं एक स्थिर चरित्र का व्यक्ति हूं" और जिन लोगों ने रूस के ख़िलाफ़ जांच में हिस्सा लिया "उनके ख़िलाफ़ कई कानूनी कदम उठाए जाएंगे."

पत्रकाक के और सवाल पूछने पर ट्रंप ने उनके सवालों को खारिज करते हुए कहा कि,"अशिष्ट मत बनिए."

इससे पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेन्टेटिव की स्पीकर और डेमोक्रेटिक नेता नैन्सी पेलोसी और ऐडम शिफ़ पर आरोप लगाया कि उनका ध्यान "बकवास बातों" पर है.

ट्रंप ने कहा कि पेलोसी को अपने खुदके शहर सेन फ्रांसिस्को पर ध्यान देने क ज़रूरत है जो बेघरों का ठिकाना है और "तंबुओं का शहर" बन गया है.

क्या कहते हैं डेमोक्रेट नेता?

डेमोक्रेट नेताओं ने व्हाईट हाउस पर आरोप लगाया है कि वो कांग्रेस की पूछताछ में रोड़े अटका रहे हैं और किए गए अनुरोधों को रिकॉर्ड करने में आनाकानी कर रहे हैं. इस कारण मामले में इसी सप्ताह मेमो भी दिया गया है.

हाउस ओवरसाइट समिति के अध्यक्ष एलिजा कमिंग्स ने इस मेमो के बरे में कहा है कि वो "इस कदम को हल्के में नहीं लेते."

उन्होंने कहा, "बीते कई सप्ताहों में समिति की कोशिश रही कि नके अनुरोधओं का स्वेच्छा से पालन हो और उन्हें रिकॉर्ड किया जाए, लेकिन व्हाइट हाउस समिति को जवाब देने से इनकार कर दिया है."

इस मेमो में व्हाइट हाउस के चीफ़ ऑफ स्टाफ़ मिक मुलवाने से राष्ट्रपति ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति के फ़ोन कॉल से जुड़े सभी प्रकार के दस्तावेज़ों की मांग की गई है.

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Image caption ऐडम शिफ़ और नैन्सी पेलोसी

बुधवार को ऐडम शिफ़ और नैन्सी पेलोसी ने एक साझा प्रेस वार्ता कर महाभियोग की प्रक्रिया का बचाव किया. शिफ़ ने कहा, "हम यहां बेवकूफ़ी नहीं कर रहे हैं."

दोनों नेताओं ने कहा कि डेमोक्रेट नेता चाहते हैं कि ये जांच जल्द ख़त्म हो.

उन्होंने व्हिसलब्लोअर के ख़िलाफ़ दिए ट्रंप के बयान को "सीधे तौर पर गवाह को डराने की कोशिश" और "हिंसा के लिए उकसाना" करार दिया.

शिफ़ ने एक बयान जारी कर कहा है कि ट्रंप के उस आरोप का खंडन किया कि समिति को पहले ही व्हिसलब्लोअर का शिकायत मिल गई थी. उन्होंने कहा कि समिति को ना तो पहले व्हिसलब्लोअर की शिकायत मिली थी न ही उन्होंने इस पर पहले विचार किया था.

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महाभियोग के बारे में कुछ ज़रूरी बातें

महाभियोग के प्रस्ताव स्वीकार होने पर अमरीकी संविधान के मुताबिक़ राष्ट्रपति को देशद्रोह, रिश्वत और दूसरे संगीन अपराधों में महाभियोग का सामना करना पड़ता है.

अमरीका में महाभियोग की प्रक्रिया हाउस ऑफ रिप्रेज़ेंटेटिव्स से शुरू होती है और इसे पास करने के लिए साधारण बहुमत की ज़रूरत पड़ती है.

इस पर सीनेट में एक सुनवाई होती है लेकिन यहां महाभियोग को मंजूरी देने के लिए दो तिहाई बहुमत की ज़रूरत पड़ती है.

अमरीकी इतिहास में अभी तक किसी भी राष्ट्रपति को महाभियोग के जरिए हटाया नहीं जा सका है. अब तक केवल दो राष्ट्रपतियों को ही इसका सामना करना पड़ा है.

हालिया मामला अमरीका के 42वें राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का रहा. एक व्यापक जूरी के समक्ष झूठी गवाही देने और न्याय में बाधा डालने के मामले में उन्हें महाभियोग का सामना करना पड़ा था.

जॉनसन के ख़िलाफ़ 1868 में हाउस में महाभियोग लाया गया था. जॉन्सन का मामला बिल क्लिंटन से बिल्कुल उलट था. जॉनसन का महाभियोग महज एक वोट से बच गया था.

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