बांग्लादेश यूं बन रहा दक्षिण एशिया का नया टाइगर

  • 3 अक्तूबर 2019
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पाकिस्तान बांग्लादेश से पाँच गुना बड़ा है लेकिन विदेशी मुद्रा उसके पास बांग्लादेश के मुक़ाबले लगभग पाँच गुना कम है.

पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार आठ अरब डॉलर है जबकि बांग्लादेश का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 35 अरब डॉलर है. बांग्लादेश को दक्षिण एशिया का नया टाइगर कहा जा रहा है.

बांग्लादेश की वृद्धि दर आठ फ़ीसदी है जबकि भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर घटकर पाँच फ़ीसदी के आसपास पहुंच गई है. पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भी पाँच और छह फ़ीसदी के बीच जूझ रही है. बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति क़र्ज़ 434 डॉलर है जबकि पाकिस्तान में प्रति व्यक्ति क़र्ज़ 974 डॉलर है.

वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम पर बांग्लादेश के आईटी मंत्री ने दावा किया है कि अनुसार बांग्लादेश की 120 से ज़्यादा कंपनियां एक अरब डॉलर से ज़्यादा की सूचना और प्रौद्योगिकी तकनीक दुनिया के 35 देशों में निर्यात कर रही हैं.

इस दावे के अनुसार 2021 तक यह एक अरब डॉलर की राशि पाँच अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी.

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने 2009 में डिज़िटल बांग्लादेश प्रोग्राम की शुरुआत की थी. इसके तहत ने केवल सरकारी सेवाओं को डिज़िटल प्लेटफॉर्म पर लाया गया बल्कि इन्फ़र्मेशन टेक्नॉलजी इंडस्ट्री का भी विस्तार किया गया.

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना आज यानी तीन अक्टूबर भारत के चार दिवसीय दौरे पर आ रही हैं. बांग्लादेश ने आर्थिक प्रगति के उन हिस्सों में भी मज़बूती से दस्तक देना शुरू कर दिया है जहां भारत का दबदबा रहा है.

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बांग्लादेश भारत का प्रतिद्वंद्वी या दोस्त?

बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच रिश्ते ठीक नहीं हैं लेकिन भारत से अभी बहुत अच्छे संबंध हैं. भारत के दौरे से पहले बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने फ़ोन किया है. पाकिस्तान कश्मीर पर सारे मुस्लिम देशों को गोलबंद करने की कोशिश कर रहा है लेकिन बांग्लादेश ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का न तो विरोध किया है और न ही खुलकर समर्थन.

क़यास लगाए जा रहे हैं कि शेख़ हसीना भारत दौरे पर कुछ बोल सकती हैं.

आईएमएफ़ का आकलन है कि बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था वर्तमान में 180 अरब डॉलर से बढ़कर 2021 तक 322 अरब डॉलर की हो जाएगी. मतलब आज की तारीख़ में भी हर बांग्लादेशी पाकिस्तानियों से अमीर है.

एक और हैरान करने वाली बात है कि 1951 की जनगणना के अनुसार पूर्वी पाकिस्तान यानी आज के बांग्लादेश की आबादी 4.2 करोड़ थी और पश्चिमी पाकिस्तान की आबादी 3.37 करोड़ थी. आज की तारीख़ में बांग्लादेश की आबादी 16.5 करोड़ है जबकि पाकिस्तान की आबादी 20 करोड़ है.

बांग्लादेश ने अपनी आबादी को भी नियंत्रित किया है जो पाकिस्तान और भारत नहीं कर पाए. ऑक्सफ़र्ड इंटरनेट इंस्टिट्यूट के अनुसार बांग्लादेश दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा देश है जहां ऑनलाइन वर्कर सबसे ज़्यादा हैं.

एशिया डिवेलपमेंट बैंक के अनुसार दक्षिण एशिया में भारत की बादशाहत को बांग्लादेश चुनौती दे रहा है.

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बुलंदी पर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में इंडस्ट्री सेक्टर की वृद्धि दर काफ़ी अहम है. दूसरी तरफ़ भारतीय अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर का योगदान सबसे ज़्यादा है और इंडस्ट्री सेक्टर की वृद्धि दर नकरात्मक के क़रीब है. भारत की बड़ी आबादी अब भी खेती-किसानी पर आश्रित है जबकि कृषि का जीडीपी में योगदान लगातार कम हो रहा है.

1974 में भयानक अकाल के बाद 16.6 करोड़ से ज़्यादा की आबादी वाला बांग्लादेश खाद्य उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर बन चुका है. 2009 से बांग्लादेश में प्रति व्यक्ति आय तीन गुनी हो गई है.

इस साल प्रति व्यक्ति आय 1,750 डॉलर हो गई. बांग्लादेश में बड़ी संख्या में लोग ग़रीबी में जीवन बसर कर रहे हैं लेकिन विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन 1.25 डॉलर में अपना जीवन चलाने वाले कुल 19 फ़ीसदी लोग थे जो अब 9 फ़ीसदी ही रह गए हैं.

बांग्लादेश में एक व्यक्ति की औसत उम्र 72 साल हो गई है जो कि भारत के 68 साल और पाकिस्तान के 66 साल से ज़्यादा है. विश्व बैंक के आँकड़ों के अनुसार 2017 में बांग्लादेश में जिन लोगों का बैंक खाता है उनमें से 34.1 फ़ीसदी लोगों ने डिज़िटल लेन-देन किया जो दक्षिण एशिया में औसत 27.8 फ़ीसदी ही है.

बांग्लादेश में बनने वाले कपड़ों का निर्यात सालाना 15 से 17 फ़ीसदी की दर से आगे बढ़ रहा है. 2018 में जून महीने तक कपड़ों का निर्यात 36.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया.

हसीना का लक्ष्य है कि 2019 तक इसे 39 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए और 2021 में बांग्लादेश जब अपनी 50वीं वर्षगांठ मनाए तो यह आंकड़ा 50 अरब डॉलर तक पहुंच जाए.

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मेहनती बांग्लादेशी

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था में विदेशों में काम करने वाले क़रीब 25 लाख बांग्लादेशियों की भी बड़ी भूमिका है. विदेशों से जो ये पैसे कमाकर भेजते हैं उनमें सालाना 18 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हो रही है और 2018 में 15 अरब डॉलर तक पहुंच गया.

हालांकि हसीना जानती हैं कि देश में टिकाऊ अर्थव्यवस्था के लिए उद्योग-धंधों को बढ़ाना होगा. बांग्लादेश कम लागत वाले मैन्युफ़ैक्चरिंग हब से आगे निकलना चाहता है जो बाहरी धन और विदेशी मदद पर निर्भर है.

2009 में शेख हसीना ने डिजिटल बांग्लादेश लॉन्च किया था ताकि टेक्नॉलजी को बढ़ावा दिया जा सके. बांग्लादेश की राजधानी ढाका में टेक्नॉलजी सेक्टर भी पाँव पसार रहा है. ढाका के सीईओ भारत के आईटी सेक्टर से सीख उसे टक्कर देना चाहते हैं.

भारत दवाइयों के निर्माण में भी काफ़ी आगे है और बांग्लादेश अपने पड़ोसी को इसमें भी टक्कर देने की मंशा रखता है. बांग्लादेश की सरकार देश भर में 100 विशेष आर्थिक क्षेत्रों का नेटवर्क तैयार करना चाहती है. इनमें से 11 बनकर तैयार हो गए हैं और 79 पर काम चल रहे हैं.

बांग्लादेश छोटा सा देश है पर पर इसकी आबादी बहुत ज़्यादा है. यहां की आबादी बहुत ही सघन है.

बांग्लादेश में आर्थिक मोर्चे पर सब कुछ बढ़िया से चलने का ये मतलब ये क़तई नहीं है कि यहां चुनौतियां नहीं हैं. बांग्लादेश में दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के बीच तीखी प्रतिद्वंद्विता है. बांग्लादेश की सियासत में दो महिलाओं शेख हसीना और पूर्व प्रधानमंत्री ख़ालिदा ज़िया का प्रभुत्व रहा है.

जब बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान था तब दोनों ही नेताओं के परिवारों की बांग्लादेश की आज़ादी में अहम भूमिका रही. पिछले तीन दशकों में दोनों महिलाएं सत्ता में आती-जाती रही हैं. इसके साथ ही दोनों जेल में भी रहीं.

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रेडिमेड कपड़ा उद्योग

बांग्लादेश की सफलता में रेडिमेड कपड़ा उद्योग की सबसे बड़ी भूमिका मानी जाती है. कपड़ा उद्योग बांग्लादेश के लोगों को सबसे ज़्यादा रोज़गार मुहैया कराता है. कपड़ा उद्योग से बांग्लादेश में 40.5 लाख लोगों को रोज़गार मिला हुआ है.

2018 में बांग्लादेश के कुल निर्यात में रेडिमेड कपड़ों का योगदान 80 फ़ीसदी रहा. बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग के लिए 2013 में राना प्लाज़ा आपदा किसी बड़े झटके से कम नहीं थी.

कपड़ों की फ़ैक्ट्री की यह बहुमंजिला इमारत गिर गई थी और इसमें 1,130 लोग मारे गए थे. इसके बाद कपड़े के अंतरराष्ट्रीय ब्रैंड कई तरह के सुधारों के लिए मजबूर हुए.

2018 में चीन ने बांग्लादेश के ढाका स्टॉक एक्सचेंज का 25 फ़ीसदी हिस्सा ख़रीद लिया था. इसे ख़रीदने की कोशिश भारत ने भी की थी कि लेकिन चीन ने इसकी ज़्यादा क़ीमत चुकाई और भारत के हाथ से यह सौदा निकल गया था. बांग्लादेश पाकिस्तान के बाद चीन से सैन्य हथियार ख़रीदने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है. शेख हसीना भी इस बात को मानती हैं कि चीन इस इलाक़े में बड़ी भूमिका निभा रहा है.

बांग्लादेश कई मोर्चों पर न केवल पाकिस्तान से आगे निकल चुका है बल्कि भारत को भी पीछे छोड़ रहा है. बाल मृत्यु दर, लैंगिक समानता और औसत उम्र के मामले में बांग्लादेश भारत को पीछे छोड़ चुका है.

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार 2013 में बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति आय 914 डॉलर थी जो 2016 में 39.11 फ़ीसदी बढ़कर 1,355 डॉलर हो गई. इसी अवधि में भारत में प्रति व्यक्ति आय 13.80 फ़ीसदी बढ़ी और 1,706 डॉलर तक पहुंची.

पाकिस्तान में इसी अवधि में 20.62 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई और 1,462 डॉलर पर पहुंच गई. कहा जा रहा है कि अगर बांग्लादेश इसी गति से प्रगति करता रहा तो 2020 में भारत को प्रति व्यक्ति आय के मामले में भी पीछे छोड़ देगा.

दुनिया भर में जेनरिक दवाइयों के निर्माण में भारत का नाम है लेकिन बांग्लादेश इस क्षेत्र में चुनौती देने की कोशिश कर रहा है. अल्पविकसित देश का दर्जा होने के कारण बांग्लादेश को पेटेंट के नियमों से छूट मिली हुई है.

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जेनरिक दवाइयों का निर्माण

इस छूट के कारण बांग्लादेश जेनरिक दवाइयों के निर्माण में भारत को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है. बांग्लादेश जेनरिक दवाइयों के निर्माण में दूसरा सबसे बड़ा देश बन गया है और 60 देशों में इन दवाइयों का निर्यात कर रहा है.

बांग्लादेश ख़राब आधारभूत ढांचा के कारण कई मामलों में पिछड़ जाता है. हालांकि चीन कई मोर्चों पर बांग्लादेश को वन बेल्ट वन रोड परियोजना के तहत मदद कर रहा है. चीन बांग्लादेश के कई बड़े प्रोजेक्टों में आर्थिक मदद मुहैया करा रहा है.

चीन पद्मा नदी पर चार अरब डॉलर का एक ब्रिज रेलवे लाइन बना रहा है जो मुल्क के दक्षिणी-पश्चिमी और उत्तरी-पूर्वी इलाक़ों को जोड़ेगा. चीन ने बांग्लादेश को 38 अरब डॉलर का क़र्ज़ देने की प्रतिबद्धता जताई है.

चीन भारी क़र्ज़ मुहैया कराने के कारण आलोचना झेल रहा है कि छोटे देशों को क़र्ज़ों के दुष्चक्र में फंसा रहा है. ऐसा श्रीलंका और पाकिस्तान दोनों के लिए कहा जा रहा है. हालांकि बांग्लादेश में इस आलोचना को लेकर बहुत हलचल नहीं है.

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