क्या अमरीका ने कुर्दों के साथ धोखा किया?

  • 10 अक्तूबर 2019
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अमरीका ने अप्रत्याशित रूप से अपने सैनिकों को उत्तरी-पूर्वी सीरिया और तुर्की की सीमा वाले इलाक़े से हटाने का फ़ैसला किया है. इसके बाद से इस इलाक़े के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे है.

अमरीकी सैनिकों के हटने के बाद तुर्की की सेना ने कुर्द नेतृत्व वाले सैन्य बलों के ख़िलाफ़ हवाई हमला शुरू किया है. दूसरी तरफ़ पश्चिमी देशों ने इस्लामिक स्टेट (आईएस) को हराने के लिए इसी कुर्द सैन्य बल पर भरोसा किया था.

तुर्की ने हमला क्यों किया?

तुर्की प्रशासन, कुर्द नेतृत्व वाले सैन्य बल को चरमपंथी समूह मानता है. तुर्की का कहना है कि यह सैन्य बल एक तरह से कुर्द विद्रोहियों के समूह का ही विस्तार है जो तुर्की में सक्रिय हैं.

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Image caption तुर्की के सैनिक उत्तरी सीरिया में अमरीकी सैनिकों के साथ संयुक्त गश्त में भाग लेते रहते थे

तुर्की नेता सीरियाई सीमा से लगे 32 किलोमीटर इलाक़े को सुरक्षित क्षेत्र के तौर पर विकसित करना चाहते हैं, जहां कुर्द लड़ाके मौजूद नहीं हों. इसके अलावा उन्हें उम्मीद है कि तुर्की में रहने वाले क़रीब 10 लाख सीरियाई शरणार्थी भी अपने देश लौटेंगे.

वहीं दूसरी ओर कुर्द नेतृत्व वाले सैन्य बल का कहना है कि वह अपने क्षेत्र की सुरक्षा करेगा. इस समूह ने यह भी कहा है कि अमरीकी सैनिकों के यहां से लौटने पर यह इलाक़ा युद्ध क्षेत्र में तब्दील होने वाला है और इस्लामिक स्टेट के फिर से सक्रिय होने का ख़तरा उत्पन्न हो गया है.

तुर्की ने सीरियाई कुर्द सैन्य बल जिसे पीपल्स प्रोटेक्शन यूनिट्स (वाईपीजी) कहा जाता है, को सीमा रेखा से पीछे धकलने की बात कही है. तुर्की के नेता वाईपीजी को प्रतिबंधित कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) का ही विस्तार मानते हैं.

कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी, कुर्द की स्वायत्तता के लिए बीते तीन दशक से तुर्की में संघर्ष कर रहा है. कुर्द और अरब सैन्य बल वाले सीरियन डेमोक्रेटिक फोर्सेज (एसडीएफ) में वाईपीजी लड़ाकों का दबदबा माना जाता है. इस समूह ने अमरीकी नेतृत्व में बीते चार सालों में एक तिहाई सीरिया से इस्लामिक स्टेट को खदेड़ दिया है.

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Image caption सीरिया में इस्लामिक स्टेट समूह के ख़िलाफ़ सीरियाई डेमोक्रेटिक फोर्सेस गठबंधन ने लड़ाई का नेतृत्व किया

वाईपीजी को अमरीकी सहयोग मिलने की तुर्की निंदा कर चुका है और उसने कुर्द सैन्य बलों पर दो बार सीमा पार कार्रवाई भी की है.

2018 में, तुर्की ने कुर्दों के नियंत्रण वाले पश्चिमी सीरिया के आफरिन पर हमला किया था. इस हमले में दर्जनों आम नागरिक मारे गए थे जबकि दसियों हज़ार लोगों को विस्थापित होना पड़ा था.

दिसंबर, 2018 में, इस्लामिक स्टेट जब हार की कगार पर था तब अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमरीका सीरिया से अपने सैनिकों को वापस बुलाएगा.

तब कंमाडरों और सहयोगी सैन्य बल ने कुर्द के भविष्य को लेकर चिंता जताई थी. इसके बाद ट्रंप ने कहा कि अगर तुर्की इलाक़े में हमला करता है तो वे आर्थिक तौर पर उसे तबाह कर देंगे. इसके अलावा उन्होंने सीमा से सटे इलाक़े में 32 किलोमीटर सुरक्षित क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव भी दिया था.

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Image caption हाल ही में तुर्की के राष्ट्रपति रैचेप तैयप अर्दोआन और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सीरिया में सेफ ज़ोन पर चर्चा की है

बाद में ट्रंप ने सैनिकों को वापस बुलाने की प्रक्रिया को टाल दिया लेकिन तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैय्यप अर्दोआन सुरक्षित क्षेत्र की मांग पर अड़े रहे.

अगस्त, 2019 में अमरीका और तुर्की सुरक्षित क्षेत्र के निर्माण पर सहमत हो गए. कुर्द अधिकारियों ने भी इसका समर्थन किया और वाईपीजी ने सीमा पर किलेबंदी और बंकरों को समाप्त कर दिया. लेकिन दो महीने के बाद ट्रंप ने फ़ैसला लिया कि सुरक्षित क्षेत्र का निर्माण तुर्की सेना अकेले करेगी.

अर्दोआन इस प्रस्तावित 480 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के निर्माण को लेकर आश्वस्त हैं. उनके मुताबिक़ इससे तुर्की की सीमा सुरक्षित रहेगी ही साथ में यह इलाक़ा क़रीब 20 लाख सीरियाई शरणार्थियों का घर भी बन जाएगा. व्हाइट हाउस के मुताबिक़ तुर्की ने इलाक़े में सक्रिय इस्लामिक स्टेट लड़ाकों को भी पकड़ने की ज़िम्मेदारी ली है.

लेकिन सीरियाई डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज (एसडीएफ) ने कहा कि अमरीका ने उनकी पीठ पर चाकू घोंपा है. एसडीएफ ने चेताते हुए कहा है कि तुर्की की आक्रामकता से यह इलाक़ा हमेशा के लिए युद्ध क्षेत्र में तब्दील हो जाएगा और इस्लामिक स्टेट को हराने की कोशिशों को धक्का लगा है.

तुर्की इतना चिंतित क्यों है?

तुर्की को पीपल्स प्रोटेक्शन यूनिट्स (वाईपीजी) से ख़तरा महसूस होता है. वाईपीजी, सीरियाई कुर्दिश डेमोक्रेटिक यूनियन पार्टी (पीवाईडी) का सैन्य विंग है.

तुर्की की सरकार का मानना है कि वाईपीजी, कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके) का ही विस्तार है. पीकेके 1984 से ही तुर्की में कुर्द की स्वायत्तता के लिए संघर्ष कर रहा है. इसे अमरीका और यूरोपीय यूनियन ने आतंकवादी समूह माना है.

वाईपीजी और पीकेके, एक समान विचारधारा से प्रेरित हैं. लेकिन दोनों कहते हैं कि वे अलग-अलग संगठन हैं. वाईपीजी को लेकर तुर्की के दावे को अमरीका ने भी ख़ारिज किया है.

सीरिया में बीते आठ साल से चल रहे संघर्ष के दौरान अमरीका, इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ पश्चिमी देशों के संघर्ष में सहयोगी रहा है लेकिन इस दौरान किसी का भी पक्ष लेने से बचता रहा है.

सीरियाई डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज़ (एसडीएफ) के कुर्द और अरब सैन्य बलों में वाईपीजी प्रभुत्व वाला समूह है. अमरीकी नेतृत्व वाले बहुराष्ट्रीय सहयोगियों से हवाई हमले, हथियार और सैन्य सलाहकारों की मदद के चलते एसडीएफ ने उत्तरी पूर्वी सीरिया में दसियों हज़ार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को इस्लामिक स्टेट से ख़ाली कराया है. इस इलाक़े में एक स्वायत्तशासी प्रशासन की स्थापना की गई है. माना जा रहा है कि इस इलाक़े में पांच से दस लाख कुर्द और 15 लाख अरब लोग रह रहे हैं.

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Image caption एसडीएफ की प्रमुख सेना है पीपुल्स प्रोटेक्शन यूनिट्स (YPG)

तुर्की पहले कार्रवाई कर चुका है?

तुर्की वैसे तो इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ लड़ रहे अमरीकी नेतृत्व वाले सहयोगी देशों के साथ है लेकिन उसने एसडीएफ का साथ देने से इनकार किया है और उसे सीरिया की उत्तरी सीमा को नियंत्रण में लेने से रोका भी है.

2016 में तुर्की की सेना ने सीरियाई विद्रोही गुटों के समर्थक समूह के उस कार्रवाई का समर्थन किया था जिसमें उन लोगों ने जाराबल्स शहर से इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों को निकलने में मदद की थी और एसडीएफ सैन्य बलों को पश्चिम की ओर यानी कुर्दों के इलाक़े आफरिन की ओर बढ़ने से रोक दिया था.

अमरीका ने उस वक़्त तुर्की की सेना को अरबों के मुख्य शहर मानबिज पर नियंत्रण हासिल करने से रोक दिया था, लेकिन तुर्की के नेताओं ने हमेशा इस बात पर ज़ोर दिया है कि एसडीएफ सैन्य बलों को शहर से हट जाना चाहिए और इस मुद्दे पर संघर्ष बना हुआ है.

जनवरी, 2018 में अमरीकी अधिकारियों ने कहा कि वे नई बॉर्डर सिक्यॉरिटी फ़ोर्स बनाने के लिए एसडीएफ की मदद करेंगे. तब तुर्की की सेना और सीरियाई विद्रोहियों ने आफ़रिन से वाईपीजी लड़ाकों को बाहर निकालने के लिए अभियान शुरू कर दिया.

ब्रिटेन स्थित निगरानी करने वाले समूह सीरियाई ऑब्जर्वेटरी फोर ह्यूमन राइट्स ने बताया कि आठ सप्ताह तक चले संघर्ष में 300 आम नागरिकों की मौत हुई थी, इसके अलावा 1500 कुर्द लड़ाके, 400 तुर्की का साथ देने वाले लड़ाके और 45 टर्किश सैनिकों की मौत हुई थी. इस संघर्ष के दौरान एक लाख 37 हज़ार नागरिकों को अपने घरों से भागना पड़ा था.

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Image caption 6 अक्तूबर 2019 को हस्साकेह प्रांत में तुर्की के ख़िलाफ़ सीरिया के कुर्दों ने विरोध प्रदर्शन

'सुरक्षित क्षेत्र' की बातचीत क्यों शुरू हुई?

दिसंबर, 2018 में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने घोषणा कि इस्लामिक स्टेट को हराया जा चुका है. उन्होंने ये भी घोषणा की कि सीरिया में एसडीएफ की मदद कर रहे दो हज़ार अमरीकी सैनिकों को तत्काल वापस बुलाया जा रहा है.

विदेशी सहयोगी और रिपब्लिकन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस्लामिक स्टेट की हार के दावे पर सवाल उठाया और अमरीकी सुरक्षा के बिना कुर्द लड़ाकों के भविष्य को लेकर चिंताएं जताईं.

कुछ दिनों बाद ट्रंप ने ट्वीट किया, "अगर तुर्की ने कुर्दों पर हमला किया तो हम तुर्की को आर्थिक तौर पर तबाह कर देंगे, 32 किलोमीटर का सुरक्षित क्षेत्र बनाएंगे.."

अभी अमरीकी सैनिकों की वापसी में देरी हो रही है लेकिन तुर्की के राष्ट्रपति रैचप तैय्यप अर्दोआन ने ट्रंप के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए कहा कि तुर्की की सेना सुरक्षित क्षेत्र बनाने के लिए तैयार है.

मार्च, 2019 में जब एसडीएफ़ ने इस्लामिक स्टेट के कब्जे वाले आख़िरी हिस्से पर भी क़ब्ज़ा जमा लिया तो यह मुद्दा एक बार फिर सामने आ गया. अगस्त, 2019 में अमरीकी सेना ने कहा कि वह तुर्की की सुरक्षा संबंधी चिंताओं के हल के लिए तुर्की की सेना के साथ मिलकर फ्रेमवर्क तैयार करने के लिए सहमत है.

इस फ्रेमवर्क में तुर्की-सीरिया सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था की बात शामिल थी लेकिन इस बार सुरक्षित क्षेत्र को लेकर बात नहीं हुई.

बाद में अमरीका ने इस बात की पुष्टि की कि वाईपीजी सीमा क्षेत्र से भारी हथियारों को हटा रहा है और किले-बंकरों को नष्ट कर रहा है. कुर्द नेतृत्व वाले प्रशासन ने कहा कि यह सुरक्षा व्यवस्था के लिए उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाने वाला क़दम है.

इसलिए जब छह अक्टूबर को ट्रंप और अर्दोआन के बीच हुई बातचीत के बाद व्हाइट हाउस ने जो बयान जारी किया, वह हैरान करने वाला था. व्हाइट हाउस ने कहा कि अमरीका अपने सैनिकों को तुर्की के अभियान से पहले सीमा क्षेत्रों से वापस बुला रहा है.

इस बयान में यह भी कहा गया कि अमरीका तुर्की के अभियान की मदद नहीं कर रहा है और बीते दो सालों से इस्लामिक स्टेट के लड़ाके जिन क्षेत्रों में क़ाबिज हैं उन्हें ख़ाली कराने की ज़िम्मेदारी तुर्की की है.

एसडीएफ ने इस्लामिक स्टेट के सदस्य होने के संदेह में 12 हज़ार पुरुषों और इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों से संबंध रखने वाले 70 हज़ार महिलाओं और बच्चों को गिरफ्तार किया हुआ है.

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Image caption तुर्की के राष्ट्रपति रैचेप तैयप अर्दोआन

तुर्की क्या प्रस्ताव दे रहा है?

अर्दोआन ने 24 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में कहा कि उनका इरादा 'पीकेके-वाईपीजी आतंकवादी समूह' को नष्ट करना है, 'पीस कॉरिडोर' बनाना है. इस कॉरिडोर में उन्होंने 10 ज़िले और 140 गाँव बनाने की बात कही जिसमें क़रीब दस लाख सीरियाई शरणार्थियों को बसाया जा सके.

सीरियाई कुर्दों का क्या कहना है?

सीरियाई डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज़ (एसडीएफ़) ने सात अक्टूबर को चेतावनी देते हुए कहा, "हमारे इलाक़ों में अकारण ही तुर्की का हमला कर, इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ हमारे संघर्ष पर निगेटिव प्रभाव डालेगा. हमने बीते कुछ सालों में क्षेत्र में जो शांति और स्थायित्व की स्थिति बनाई है उसे भी ख़तरा होगा. हम हर हाल में अपने क्षेत्र की सुरक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं."

राष्ट्रपति ट्रंप के एक सहयोगी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने अमरीकी क़दम को त्रासदी की ओर बढ़ने वाला क़दम बताया है. वहीं संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार संयोजक ने कहा कि वे सबसे बुरी स्थिति के लिए तैयारी कर रहे हैं.

हालांकि बाद में ट्रंप ने धमकाते हुए कहा कि अगर तुर्की ने 'सीमा से आगे जाकर' कुछ कार्रवाई की तो वे तुर्की की अर्थव्यवस्था को 'पूरी तरह से नष्ट' कर देंगे.

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