तुर्की को सीरिया पर हमले के लिए हमने नहीं कहा: अमरीका

  • 10 अक्तूबर 2019
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अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो का कहना है कि अमरीका ने उत्तर सीरिया में तुर्की के हमले को हरी झंडी नहीं दी थी.

पॉम्पियो ने उत्तर-पूर्वी सीरिया से अमरीकी सैनिकों को वापस बुलाने के फ़ैसले का भी बचाव किया. ट्रंप के इस फ़ैसले की अमरीका के भीतर और बाक़ी दुनिया में तीखी आलोचना हो रही है.

तुर्की ने उत्तर-पूर्वी सीरिया में कुर्द लड़ाकों के क़ब्ज़े वाले इलाकों में हवाई हमले करना शुरू कर दिया है.

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन का कहना है कि इन हवाई हमलों का मक़सद सीमा पर 'टेरर कॉरिडोर को बनने से रोकना' है.

तुर्की सुरक्षाबल एक ऐसा 'सेफ़ ज़ोन' बनाने की कोशिश कर रहे हैं जहां कुर्द सैनिक न हों. तुर्की का कहना है कि इस 'सेफ़ ज़ोन' में सीरियाई शरणार्थियों के घर भी होंगे.

कुर्दों के नेतृत्व वाले सुरक्षाबलों ने तुर्की के हमलों का जवाब दिया है और दोनों पक्षों के सैनिकों में संघर्ष हुआ है.

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कुर्दों ने सीरिया में इस्लामिक स्टेट को हराने में मदद की थी और वे आईएस के ख़िलाफ़ लड़ाई में अमरीका के अहम सहयोगी थे.

मौजूदा समय में कुर्द अपने क़ाबू वाले इलाक़ों की जेलों में बंद हज़ारों आईएस लड़ाकों और शिविरों में रह रहे उनके रिश्तेदारों की सुरक्षा करते हैं.

अभी यह साफ़ नहीं है कि युद्ध शुरू होने की स्थिति में वो ऐसा करते रहेंगे या नहीं.

अमरीकी सेना का कहना है कि उसने उन दो ब्रिटिश नागरिकों को हिरासत में ले लिया है जो आइएस की एक सेल में अपनी बर्बर भूमिका के लिए कुख्यात हैं.

इस सेल ने पश्चिमी देशों के क़रीब 30 नागरिकों को बंधक बनाकर उनका उत्पीड़न और हत्या की थी.

इन ब्रितानी नागरिकों के नाम अल शफ़ी अल शेख़ और अलेक्ज़ेंडा कोटी है. ये दोनों आईएस की ब्रितानी सेल के सदस्य थे जिसका छद्म नाम 'द बीटल्स' था.

इन दोनों को अब उत्तरी सीरिया में कुर्द समर्थित सेना के क़ब्ज़े वाली एक जेल से छुड़ा लिया गया है.

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माइक पॉम्पियो ने क्या कहा?

अमरीकी ब्रॉडकास्टर पीबीएस को दिए एक इंटरव्यू में माइक पॉम्पियो ने अमरीकी राष्ट्रपति के चौंकाने वाले फ़ैसले का बचाव किया.

पॉम्पियो ने ये भी कहा कि तुर्की को 'सुरक्षा की वास्तविक चिंता' है और वो 'अपने दक्षिण में आतंकी ख़तरे से जूझ रहा है.'

पॉम्पियो ने उन मीडिया रिपोर्ट्स को 'पूरी तरह ग़लत' बताया जिनमें कहा जा रहा है कि अमरीका ने तुर्की को उत्तर-पूर्वी सीरिया में हमले की इजाज़त दी.

उन्होंने कहा, "अमरीका ने तुर्की को ग्रीन सिग्नल नही दिया."

अब अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि वो तुर्की के इस 'हमले का समर्थन नहीं करता' है. ट्रंप ने तुर्की के इस क़दम को 'बुरा फ़ैसला' भी बताया है.

इससे पहले के अपने एक बयान में अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा था कि अगर तुर्की ने अपनी हदें पार कीं तो वो उसकी अर्थव्यवस्था को 'तबाह' कर देंगे.

बाद में एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में ट्रंप ने कहा कि तुर्क और कुर्द 'सदियों से एक-दूसरे के लिए लड़ते आए हैं.' ट्रंप ने कहा, "कुर्द लड़ाकों ने दूसरे विश्व युद्ध में हमारी मदद नहीं की."

ये सब कुछ कहने के बाद ट्रंप ने एक बात और जोड़ी, "जो भी चीज़ें मैंने बताई, उनके बावजूद हम कुर्दों को पसंद करते हैं."

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ट्रंप के समर्थक भी हुए ख़िलाफ़

उत्तरी-पूर्वी सीरिया से अमरीकी सैनिकों को हटाने का डोनल्ड ट्रंप का फ़ैसला अचानक ही आया था.

ट्रंप के इस फ़ैसले की उनकी अपनी पार्टी रिपब्लिकन और विपक्षी डेमोक्रैटिक पार्टी दोनों से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.

यहां डोनल्ड ट्रंप के कट्टर समर्थक माने जाने वाले सीनेटर लिंज़ी ग्राहम ने भी ट्रंप के इस फ़ैसले की निंदा की है. उन्होंने कहा, "अमरीका ने अपने सहयोगी को बेशर्मी से छोड़ दिया."

ग्राहम ने कहा, "प्रशासन ने तुर्की के ख़िलाफ़ कोई भी कार्रवाई करने से इनकार कर दिया है. ऐसे में मैं दोनों पार्टियों से मज़बूत समर्थन की उम्मीद करता हूं."

उन्होंने कुर्दों के समर्थन में एक के बाद एक कई ट्वीट किए और लिखा, "अमरीका इससे बेहतर है. मिस्टर प्रेजिडेंट, कृपया तुर्की के ख़िलाफ़ खड़े होइए."

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इससे इस्लामिक स्टेट पर क्या असर पड़ेगा?

कुर्द समर्थित सीरियाई डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेज़ (एसडीएफ़) का कहना है वो अपनी सात जेलों में आईएस के 12,000 से ज़्यादा संदिग्ध सदस्यों को हिरासत में रखे हुए हैं.

इनमें से कम से कम 4,000 विदेशी नागरिक हैं. इनकी ठीक-ठीक लोकेशन का अभी पता नहीं चल पाया है लेकिन बताया जा रहा है कि इनमें से कुछ तुर्की से लगी सीमा के क़रीब हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ संदिग्ध आईएस परिवारों के दो शिविर रोज़ और अन इसा 'सेफ़ ज़ोन' के भीतर हैं.

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सीरिया में हमले पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

यूरोपीय संघ का कहना है कि इसकी उम्मीद बेहद कम है कि कथित सेफ़ ज़ोन शरणार्थियों को वापस लेने की अंतरराष्ट्रीय शर्तों को पूरा कर पाएगा.

बेल्जियम, फ़्रांस, जर्मनी, पोलैंड और यूके ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से बैठक और मौजूदा स्थिति पर बात करने की गुज़ारिश की है. सुरक्षा परिषद के सभी 15 सदस्य गुरुवार को मिलेंगे.

अरब लीग ने भी 12 अक्टूबर को काहिरा में तुर्की के हमले पर चर्चा करने के लिए आपातकालीन बैठक बुलाई है.

नेटो को महासचिव येन्स स्टोलटेनबर्ग ने कहा कि नेटो सदस्य तुर्की को 'सुरक्षा सम्बन्धित वास्तविक ख़तरे' हैं लेकिन उन्होंने उम्मीद की थी कि वो (तुर्की) कोई भी क़दम उठाने से ये ध्यान में ज़रूर रखेगा कि वो 'उचित और ज़रूरी' हो.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी अपने एक बयान में कहा कि तुर्की को ये ज़िम्मेदारी लेनी होगी कि आईएस के संदिग्ध लड़ाके जेल में ही रहें और आईएस दोबारा न बनने पाए.

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सीरिया में अभी हालात कैसे हैं?

बुधवार को मिली जानकारी के मुताबिक सीरिया के कई गाँवों और शहरों पर हवाई हमले किए जिसकी वजह से वहां के हज़ारों लोगों को घर छोड़कर भागना पड़ा.

कुर्द सुरक्षाबलों ने बताया कि अब तक हमलों में कम से कम पांच नागरिकों की मौत हो गई हौ और कम से कम 25 लोग घायल हुए हैं.

कुर्द समर्थित एसडीएफ़ ने बताया कि आईएस लड़ाकों वाला एक जेल भी तुर्की के हवाई हमले की चपेट में आया है.

बढ़ते मानवीय संकट के बीच एसडीएफ़ ने 'मासूम लोगों पर होने वाले हमलों' को रोकने के लिए 'नो फ़्लाई ज़ोन' बनाने की गुज़ारिश की है.

वहीं तुर्की की सेना ने ट्वीट किया है कि उन्होंने 'आतंकियों' के 181 ठिकानों को निशाना बनाया है.

एसडीएफ़ के प्रवक्ता मुस्तफ़ा बाली के मुताबिक़ उनके सुरक्षाबलों ने तुर्की के हमले के बाद जवाबी कार्रवाई की है.

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