जोकर फ़िल्म में ऐसा क्या है जो इतना डरा रहा है

  • 12 अक्तूबर 2019
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जोकर, सुपरहीरो फ़िल्मों की दुनिया में सबसे कुख्यात और ख़तरनाक विलन पर बनी पहली फ़िल्म है जो पिछले शुक्रवार को रिलीज़ हुई है. इसने अमरीका में काफ़ी विवाद पैदा कर दिया है.

साथ ही फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर बेहतरीन कमाई करते हुए 24 करोड़ 80 लाख डॉलर से अधिक कमा चुकी है. बैटमैन के कट्टर दुश्मन जोकर के बनने की कहानी पर आधारित इस फ़िल्म ने तब सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं बढ़ा दी थीं जब सेना ने फ़िल्म की रिलीज़ के दिन गोलीबारी होने का अलर्ट जारी किया था.

हांलाकि, फ़िल्म रिलीज़ होने पर ऐसी कोई घटना नहीं हुई.

सात साल पहले, बैटमैन सीरीज़ की आख़िरी फ़िल्म 'द डार्क नाइट राइज़ेस' के एक शो के दौरान कोलोराडो के अरोरा में एक शख़्स ने गोलीबारी कर दी थी. उस हमले में 12 लोग मारे गए थे और 70 घायल हुए थे.

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Image caption अरोरा में हुई गोलीबारी में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि

अरोरा में नहीं दिखाई गई जोकर

जोकर फ़िल्म को अरोरा के थियेटर में नहीं दिखाया गया. ऐसा पिछले हादसे के पीड़ितों के परिवारों की अपील पर किया गया था.

पीड़ितों के परिवारों ने फ़िल्म की प्रोडक्शन कंपनी वॉर्नर ब्रदर्स को भी चिट्ठी लिखी थी. उन्होंने कंपनी से गोलीबारी में मारे गए पीड़ितों की मदद करने वाले समूहों को पैसा देने की अपील की थी. साथ ही गन रिफॉर्म के ख़िलाफ़ वोट देने वाले उम्मीदवारों को राजनीतिक चंदा न देने की मांग की थी.

एक अमरीकी मैगज़ीन द हॉलीवुड रिपोर्टर पर छपी उस चिट्ठी में लिखा था, ''हम आपसे उन कॉर्पोरेट नेताओं का साथ देने की अपील करते हैं जो मानते हैं कि हम सभी को सुरक्षित रखने के लिए उनकी सामाजिक जिम्मेदारी है.''

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एक पीड़ित के रिश्तेदार का कहना था कि ये फ़िल्म उन्हें जेम्स होम्स की याद दिलाती है, जिसे नरसंहार के लिए उम्र कैद की सजा दे दी गई थी.

गोलीबारी में अपनी 24 साल की बेटी जेसिका गवी को खोने वालीं सैंडी फ़िलिप्स ने हॉलीवुड रिपोर्टर से कहा, ''मुझे होम्स की फ़िल्म देखने की ज़रूरत नहीं है. मैंने सिर्फ़ जोकर फ़िल्म का प्रोमो देखा तो जैसे मैंने हत्यारे की तस्वीर देख ली.''

कई अन्य अमरीकी शहरों में सिनेमाघरों ने घोषणा की है कि फ़िल्म देखने के लिए मास्क पहनकर, फ़ेस पेंट लगाकर या कोई कॉस्ट्यूम पहनकर आने वालों को रोक दिया जाएगा.

हालांकि, सुपरहीरो की फ़िल्मों की दौरान लोगों का इस तरह तैयार होकर आम चलन है.

एक तरह का डर

जोकर, एक मानसिक रूप से बीमार कॉमेडियन आर्थर फ़्लेक की कहानी है जिसकी पेशेवर और निज़ी ज़िंदगी की दुर्घटनाएं उसे ज़ुर्म की दुनिया में धकेल देती हैं.

फ़िल्म में हिंसा के बहुत भयानक दृश्य हैं और अमरीका में कुछ फ़िल्म समीक्षकों ने निर्देशक टॉड फ़िलिप्स पर आर्थर फ़्लेक की कहानी का महिमामंडन करने का आरोप लगाया है.

वैनिटी फेयर मैगज़ीन के रिचर्ड लॉसन ने लिखा है, "ये फ़िल्म किसी के बेहद मतलबी होने का ग़ैर-ज़िम्मेदाराना प्रचार हो सकती है."

लॉसन ने पूछा है, "क्या जोकर जश्न मनाने लायक है या डरावनी है? या इन दोनों के बीच कोई अंतर नहीं है?"

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निर्देशक टॉड फ़िलिप्स और अभिनेता जोक्विन फ़ोनिक्स इस बात से सहमति नहीं रखते कि जोकर फ़िल्म हिंसा के लिए सहानुभूति रखती है.

टॉड फ़िलिप्स ने कहा था कि उन्हें फ़िल्म को लेकर इस तरह के विवाद से हैरानी है.

फ़िल्म के प्रोमोशन के दौरान एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था, "ये फ़िल्म प्यार के अभाव, बचपन के बुरे अनुभव और दुनिया में सहानुभूति की कमी को दिखाती है. मुझे लगता है कि लोग इस संदेश को समझ सकते हैं. मेरे लिए कला का मतलब जटिल होना है. अगर आपको आसान कला चाहिए तो कैलिग्रफ़ी की तरफ़ जा सकते हैं."

फोनिक्स ने क्या कहा?

एक एंटरटेनमेंट न्यूज़ वेबसाइट 'द रैप' में दिए एक साक्षात्कार में फिलिप्स ने इस विवाद के लिए वामपंथियों को जिम्मेदार ठहराया है.

अभिनेता जोक्विन फ़ोनिक्स उस साक्षात्कार को छोड़कर आ गए थे जिसमें उनसे हिंसा को बढ़ावा देने से जुड़े सवाल पूछे गए थे.

इसमें उन्होंने फ़िल्म का बचाव करते हुए कहा था, "इस फ़िल्म को लेकर हुए पूरे मामले में ये देखना मेरे लिए हैरानी भरा था कि अपने एजेंडे के मुताबिक़ कितनी आसानी से वामपंथी, दक्षिणपंथियों की तरह बोलने लगते हैं. ये मेरे लिए आंखें खोलने वाला था."

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उन्होंने कहा, "लोग गानों के बोल का ग़लत मतलब समझ लेते हैं. वो किताबों में लिखे का ग़लत मतलब निकालते हैं. इसलिए ये फ़िल्मनिर्माता कि ज़िम्मेदारी है कि दर्शकों को सही और ग़लत के बीच का अंतर बताए."

अभिनेता ने यह भी कहा कि वह फ़िल्म के कारण हुई 'परेशानी' का मज़ा ले रहे हैं.

उनका कहना था, "मुझे लगता है कि ये अच्छा है जब फ़िल्म आपको असहज करती है या अलग सोचने के लिए मजबूर करती है. मुझे इसे लेकर ख़ुशी है. इसलिए मैं ये फ़िल्म करना चाहता था क्योंकि ये मेरे लिए आसान नहीं होने वाला था.

खलनायकके प्रति आकर्षण

फ़िल्म के लिए की गई कास्टिंग ने विवाद को और बढ़ा दिया. जोक्विन फ़ोनिक्स को अपने काम के प्रति एक संवेदनशील दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है और फ़िल्म में लगता है कि वो एक लोकप्रिय सुपरविलेन के तौर पर अच्छे फ़ॉर्म में हैं.

जोकर या स्टार वॉर फिल्म में एंटी हीरो डार्थ वेडर के तरह लोगों के विलन के प्रति आकर्षण ने भी इस विवाद में भूमिका निभाई.

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अमरीकी रेडियो स्टेशन केओए पर मनोचिकित्सक ट्रैविस लैंगली ने कहा, "हम विलेन के प्रति आकर्षण की इस चाह को समझ सकते हैं. हम कहीं न कहीं ये सोचना पसंद करेगा कि अगर हम सीमाओं में बंधे न हों तो हम क्या करेंगे."

लैंगली लिखते हैं, "इस तरह की कहानियों को विलेन चलाते हैं क्योंकि हीरो यहां एक प्रतिक्रिया करने वाला किरदार होता है. विलेन के कुछ करने पर ही हीरो उस पर प्रतिक्रिया करता है."

पहले की फ़िल्मों में विलेन को दिखाने पर जो हुआ है उससे भी जोकर की नकारात्मक लोकप्रियता में मदद नहीं मिली.

द डार्क नाइट (2008) में जोकर का किरदार निभाने वाले हीथ लेजर की फ़िल्म के रिलीज़ होने के बाद ड्रग की ओवरडोज़ के कारण मौत हो गई थी.

लेजर ने इतना बेहतरीन प्रदर्शन किया था कि उन्हें 2009 में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए मरोणपरांत ऑस्कर से नवाज़ा गया था. सुपरहीरो फ़िल्मों के लिए मिलने वाली ये एक ख़ास सम्मान है. लेकिन, उनकी मौत के बाद ये अफ़वाहें भी फैलीं कि वो अपने ही किरदार से डर गए थे.

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1989 के बैटमैन प्रोडक्शन में जोकर का किरदार निभाने वाले जैक निकोल्सन की टिप्पणी के बाद इन अफवाहों को और हवा मिल गई थी.

लेजर की मौत की सूचना मिलने पर निकोल्सन ने कहा था, "मैंने उसे चेतावनी दी थी."

वॉर्नर ब्रदर्स ने बैटमैन के बदले के रूमानीकरण से इनकार करते हुए एक बयान जारी किया था.

कंपनी ने कहा था, "कोई गलती न करें: न तो काल्पनिक चरित्र जोकर, न ही फ़िल्म, असल दुनिया में किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन करते हैं."

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मानसिक स्वास्थ्यकाग़लत चित्रण

जिस तरह से फ़िल्म में मानसिक बीमारी के बारे में दिखाया गया है उसे लेकर मानसिक स्वास्थ्य पर काम करने वाले लोगों ने भी चिंता जताई है. पहले भी हॉलीवुड में मानसिक बीमारी को दिखाने के तरीकों पर चर्चा होती रही है.

मनोरोग से जुड़े भेदभाव के ख़िलाफ़ काम करने वाली ब्रिटिश चैरिटी 'टाइम टू चेंज' के मुताबिक मनोरोग को लेकर रूढ़िवादिता के चलते समाज में इसे लेकर कोई बदलाव नहीं आ पाता.

चैरिटी की हेड ऑफ़ कम्यूनिकेशंस जूली ईवान्स ने बीबीसी से कहा, ''हमने फ़िल्मों में मनोरोगियों को बुरा दिखाने के चलन में पहले से कुछ बदलाव देखा है लेकिन उन्हें ग़लत तरीके से पेश करने का इतिहास बहुत पुराना है. उन्हें अति नाटकीय तरीके से दिखाना दर्शकों को बढ़ा-चढ़ाकर गलत जानकारी देना है.''

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यूनिवर्सिटी ऑफ़ ईस्ट एंजिला में फ़िल्म स्टडीज़ में लेक्चरर टिम स्नेलसन सिनेमा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं.

टिम स्नेलसन कहते हैं कि हॉलीवुड ऐसे उदाहरणों से भरा हुआ है जिसमें मानसिक स्वास्थ्य और हिंसा को जोड़कर एक मिथक तौर पर दिखाया गया है. भले ही वो किसी बुरे अनुभव के कारण ही मनोरोग की स्थिति में पहुंचा हो.

उन्होंने कहा कि लेकिन इसके ट्रैलर देखकर लगा था कि फ़िल्म में ज़रूर कुछ दिलचस्प है. साथ ही ये भी अच्छा है कि इससे मनासिक रोगों को फिल्म में दिखाने के तरीके पर चर्चा शुरू हुई है.

हालांकि, जोकर फ़िल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है. इसे रिव्यू वेबसाइट 'रॉटेन टोमैटोज़' पर 90% की मौजूद रेटिंग मिली है.

साथ ही जोकर ने इस महीने की शुरुआत में द वेनिस फ़िल्म फेस्टिवल में शीर्ष पुरस्कार हासिल किया है. इसकी स्क्रीनिंग को आठ मिनट का स्टैंडिंग ओवेशन (खड़े होकर सम्मान) दिया गया था.

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