सऊदी अरब के दौरे से पुतिन क्या हासिल करना चाहते हैं?

  • 14 अक्तूबर 2019
सऊदी प्रिंस और रूसी राष्ट्रपति पुतिन इमेज कॉपीरइट Getty Images

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 14 अक्तूबर को सऊदी अरब जा रहे हैं. साल 2007 के बाद उनका ये पहला दौरा है. इसके दूसरे दिन ही पुतिन यूएई के दौरे पर जाएंगे.

इस दौरान वो किंग सलमान और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन-सलमान से मिलेंगे और रूस-सउदी आर्थिक परिषद के उद्घाटन सत्र में शामिल होंगे.

मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक़, दोनों देशों के बीच कई अरब डॉलर के समझौतों पर हस्ताक्षर होंगे.

पुतिन भले ही दस साल बाद इस देश की यात्रा पर हैं, लेकिन इस बीच दोनों देशों के अधिकारियों में लगातार संपर्क बना रहा.

पुतिन का ये दौरा तुर्की में पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की बर्बर हत्या के एक साल बाद हो रहा है. इस हत्या की ज़िम्मेदारी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन-सलमान ने ली है. जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या के बाद सऊदी अरब की दुनिया भर में आलोचना हुई थी.

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अरबों डॉलर के समझौते

रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड (आरडीआईएफ़) के अनुसार, इस दौरे में मॉस्को और रियाद दो अरब डॉलर के 10 समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे.

आरडीआईएफ़ ने सऊदी अरब को अपना पहला विदेशी कार्यालय बनाने के लिए चुना था.

आरडीआईएफ़ के मुखिया किरिल दिमित्रिदेव ने 10 अक्टूबर को बताया था, "वे कई मुद्दों पर बात करेंगे, जिनमें कृषि, रेल, खाद और पेट्रोकेमिकल सेक्टर शामिल होंगे."

तास न्यूज़ एजेंसी के अनुसार आरडीआईएफ़ के मुताबिक़ रूस की सरकारी रेलवे कंपनी आरज़ेडएचडी सऊदी अरब में कई नई ट्रेन लाइनों के निर्माण के टेंडर प्रक्रिया में भी शामिल होगी.

अक्टूबर की शुरुआत में आरडीआईएफ़ और सऊदी की सबसे बड़ी तेल कंपनी आरामको ने रूस की अग्रणी तेल उपकरण निर्माता कंपनी नोवोमेट में संयुक्त रूप से 30 प्रतिशत की हिस्सेदारी ख़रीदी थी.

इंटरफ़ैक्स की ख़बर के अनुसार, दिमित्रिदेव ने कहा कि 14 अक्टूबर को होने वाले समझौते में ये सौदे भी शामिल हैं.

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ओपेक+

बिज़नेस अख़बार वेदोमोस्ती ने एक अज्ञात स्रोत के हवाले से कहा है कि ऐसा लगता है कि पुतिन के एजेंडा पर ओपेक+ समझौता भी है.

तेल उत्पादन के क्षेत्र में दुनिया में दूसरे और तीसरे नंबर के सऊदी अरब और रूस पिछले जून में ओसाका जी20 शिखर सम्मेलन में तेल के दामों को नियंत्रित करने के लिए ओपेक+ के विस्तार पर भी सहमत हुए थे.

दो अक्टूबर को तास न्यूज़ एजेंसी ने आधिकारिक रिपोर्टों के हवाले से कहा था कि इस समझौते से रूस का राजस्व 100 अरब डॉलर के पार चला गया है.

संभावित सैन्य ख़रीद?

बीते सितम्बर में सऊदी के अग्रणी तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमलों के बाद पुतिन ने कहा था कि रूस एस-400 एयर डिफ़ेंस सिस्टम बेचकर रियाद की मदद करने के लिए तैयार है.

जून 2017 में रूस ने घोषणा की थी कि उसने सऊदी अरब को हथियार और सैन्य साजो सामान भेजना शुरू कर दिया है हालांकि उसमें ये साफ़ नहीं किया गया कि ये किस तरह के हथियार हैं.

इससे पहले, दोनों देश कोरनेट-ईएम एंटी टैंक मिसाइल सिस्टम, टीओएस-1ए, एजीए-30 ग्रेनेड लॉंचर और एके-102 कलाश्निकोव राइफ़लों की आपूर्ति करने पर सहमत हुए थे.

हालांकिसऊदी अरब पारंपरिक रूप से नैटो देशों से हथियार ख़रीदता रहा है और ऐसा लगता है कि उसकी नीति में बहुत बदलाव नहीं आएगा.

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Image caption रूस में फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप 2018 के दौरान भी साथ दिखे थे व्लादिमीर पुतिन और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान

मध्यपूर्व में तनाव

मध्यपूर्व में तनाव और चरमपंथ विरोधी अभियान भी पुतिन के इस दौरे में शीर्ष राजनीतिक एजेंडा होंगे.

दोनों देशों के बीच सीरियाई संकट टकराव का मुख्य मुद्दा है क्योंकि सऊदी अरब बाग़ी सीरियन नेशनल कोलिशन का मुख्य समर्थक है और वो रूस के सहयोगी राष्ट्रपति बशर अल असद की मुख़ालफ़त करता है.

रूस सऊदी अरब और ईरान के बीच तनाव को भी कम करना चाहता है, जोकि पुतिन के मुताबिक, संघर्ष से सहयोग की ओर जाना है.

सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमले पर पुतिन ने कहा था कि वो ईरान पर दोष मढ़ने के ख़िलाफ़ हैं.

इस दौरे में यमन के मसले पर भी शायद बात हो. विदेश मंत्री लावरोव ने हाल ही में कहा था कि "यमन के मुश्किल हालात को हल करने का केवल बातचीत ही रास्ता है, जोकि संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, मानवीय तबाही का सामना कर रहा है."

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द्विपक्षीय संपर्क

हाल के सालों में रूस और सऊदी अरब के बीच बराबर संपर्क रहा है.

कुछ सालों में पुतिन किंग सलमान से दो बार मिल चुके हैं. एक बार 2015 में तुर्की में जी20 शिखर सम्मेलन में और दूरी बार 2017 में किंग के मॉस्को यात्रा के दौरान.

न्यूज़ एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के अनुसार, दोनों ने अक्सर फ़ोन पर बात की, 2017 मेंचार बार और 2018 में दो बार.

प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने आधिकारिक रूप से 2015 में रूस की चार बार यात्रा की.

रूसी प्रधानमंत्री दमित्रि मेदवेदेव और विदेश मंत्री सेरगेई लावरोव ने 2015 और 2017 में सऊदी अरब का दौरा किया.

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