पाकिस्तान में इमरान के ख़िलाफ़ आज़ादी मार्च- उर्दू प्रेस रिव्यू

  • 27 अक्तूबर 2019
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पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते पाकिस्तान की एक विपक्षी पार्टी जमीयत-उल-इस्लाम पाकिस्तान (एफ़ गुट) या जेयूआई के आज़ादी मार्च और भारत प्रशासित कश्मीर से जुड़ी ख़बरें सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियों में रहीं.

पाकिस्तान की एक विपक्षी पार्टी और पाकिस्तान के सबसे बड़े धार्मिक गुट जमीयत-उल-इस्लाम पाकिस्तान (फ़ज़लुर्रहमान गुट) ने 27 अक्टूबर से आज़ादी मार्च निकालने का फ़ैसला किया है.

आज़ादी मार्च का मक़सद प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की नीतियों का विरोध करना और उन्हें इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर करना है.

सरकार ने जेयूआई से अपील की थी कि वो आज़ादी मार्च नहीं निकालें. जेयूआई को दूसरी विपक्षी पार्टियों पीपीपी और मुस्लिम लीग (नवाज़) का समर्थन हासिल है.

इस गतिरोध को दूर करने के लिए सरकार ने एक कमिटी बनाई थी. दूसरी तरफ़ सरकार से बातचीत करने के लिए विपक्षी पार्टियों ने भी एक रहबर कमिटी बनाई है.

अख़बार एक्सप्रेस के मुताबिक़ पहले दो दौर की बातचीत में कोई नतीजा नहीं निकला लेकिन शनिवार शाम तक सरकार और मार्च के आयोजकों में समझौता हो गया.

सरकारी कमिटी के प्रमुख परवेज़ खटक ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि विपक्ष की रहबर कमिटी से बहुत अच्छे वातावरण में बातचीत हुई और दोनों पक्षों के बीच लिखित समझौता हो गया है.

परवेज़ खटक ने कहा कि समझौते के तहत सरकार आज़ादी मार्च के रास्ते में कोई रुकावट नहीं पैदा करेगी लेकिन मार्च के आयोजक जेयूआई ने भी कहा है कि वो शांति के साथ मार्च निकालेंगे और राजधानी के रेड ज़ोन में दाख़िल नहीं होंगे. 27 अक्टूबर को कराची से मार्च की शुरुआत होगी.

अख़बार जंग के मुताबिक़ विपक्षी पार्टियों की रहबर कमिटी के संयोजक अकरम ख़ान दुर्रानी ने भी समझौते की पुष्टि करते हुए आश्वस्त किया कि आज़ादी मार्च शांतिपूर्ण होगा और मार्च में शामिल लोग प्रतिबंधित जगहों में दाख़िल नहीं होंगे. हालांकि इमरान ख़ान के इस्तीफ़े को लेकर दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं.

अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार सरकारी कमिटी के प्रमुख परवेज़ खटक ने कहा कि इमरान ख़ान के इस्तीफ़े और वक़्त से पहले चुनाव कराने के बारे में कोई बातचीत नहीं हुई. लेकिन रहबर कमेटी के संयोजक दुर्रानी ने कहा कि इमरान ख़ान इस्तीफ़ा दें और आम चुनाव कराएं जाएं.

काला दिवस

पाकिस्तान 27 अक्टूबर को कश्मीरियों के समर्थन में काला दिवस के रूप में मना रहा है. पाकिस्तान का कहना है कि 27 अक्टूबर 1947 को भारत ने कश्मीर पर क़ब्ज़ा कर लिया था और पिछले 72 वर्षों से भारत प्रशासित कश्मीर में भारतीय सेना कथित तौर पर ज़ुल्म कर रही है.

पाकिस्तान तो हर साल 27 अक्टूबर को काला दिवस मनाता है, लेकिन इस बार इसकी अहमियत इसलिए ज़्यादा है क्योंकि भारत सरकार ने इसी साल पाँच अगस्त को कश्मीर के विशेष राज्य के दर्जे को ख़त्म कर दिया था और वहां कई तरह की पाबंदियां लगी हुईं हैं.

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अख़बार दुनिया के मुताबिक़ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा कि पाकिस्तान हमेशा भारत प्रशासित कश्मीर के लोगों के साथ खड़ा रहेगा.

उधर पाकिस्तानी सेना ने दावा किया है कि उसने पिछले सात महीनों में 60 भारतीय सैनिकों को मारा है और भारत के दो लड़ाकू विमान को मार गिराया है.

अख़बार एक्सप्रेस के मुताबिक़ पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर ने ट्वीट किया है कि पाकिस्तानी सेना ने 27 फ़रवरी से अब तक 60 भारतीय सैनिकों को मारा है और पाकिस्तानी वायु सेना ने भारत के दो लड़ाकू विमानों को मार गिराया है.

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अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत पर जमकर हमला किया है.

अख़बार के अनुसार मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर ने कहा, ''भारतीय सेना प्रमुख के हाथों पर बेगुनाहों का ख़ून है, अपनी फ़ौज को बदमाश आर्मी में तब्दील कर दिया है.''

पाकिस्तानी प्रवक्ता ने कहा कि भारतीय सेना प्रमुख ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बयान देकर क्षेत्र की शांति को भंग करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने ये भी कहा कि भारतीय सेना प्रमुख का बयान अपने सियासी आक़ाओं को राजनीतिक लाभ दिलाने के लिए है.

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अख़बार जंग के अनुसार अमरीकी सांसदों के एक गुट ने अमरीका में भारतीय राजदूत को एक ख़त लिखकर कहा है कि भारत प्रशासित कश्मीर पर राजनीतिक बातचीत के लिए भारत एक रोडमैप तैयार करे.

ख़त में सांसदों ने कश्मीर के मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए पूछा है कि कश्मीर के मामले में भारत ने जो आधिकारिक जानकारी दी है वो वहां के असल हालात से बिल्कुल अलग है.

ख़त में सांसदों ने ये भी पूछा कि विदेशी पत्रकार और अमरीकी सांसद भारत प्रशासित कश्मीर का दौरा कब कर सकेंगे.

अख़बार दुनिया के अनुसार संयुक्त राष्ट्र और अमरीका ने कश्मीर के हालात पर गंभीर चिंता जतायी है.

अख़बार के अनुसार संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा है कि कोई भी हल कश्मीरियों के मानवाधिकार पर आधारित होना चाहिए.

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक को हटाए जाने की ख़बर भी पाकिस्तान के अख़बारों में प्रमुखता से है.

अख़बार दुनिया के अनुसार भारत ने अपनी नाकामी पर कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक को वहां से हटाकर गोवा का राज्यपाल बना दिया है. अख़बार के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने क़रीबी को कश्मीर का गवर्नर बनाया है.

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अख़बार दुनिया के अनुसार गिरिश चंद्र मुर्मू 1985 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब मुर्मू उनके प्रिंसिपल सेक्रेटरी रह चुके हैं.

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