चिली: राष्ट्रपति ने पूरी कैबिनेट को बर्खास्त किया

  • 27 अक्तूबर 2019
चिली के राष्ट्रपति सेबेस्टिन पिन्येरा ने पूरी कैबिनेट को निलंबित कर दिया है इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption चिली के राष्ट्रपति सेबेस्टिन पिन्येरा ने पूरी कैबिनेट को निलंबित कर दिया है

चिली के राष्ट्रपति सेबेस्टिन पिन्येरा ने पूरी कैबिनेट को निलंबित कर दिया है. राष्ट्रपति पिन्येरा ने नई सरकार के गठन का आदेश दिया है.

राष्ट्रपति ने सामाजिक सुधार को लागू करने की बात कही है, जिसकी मांग चिली में प्रदर्शनकारी कर रहे हैं.

राष्ट्रपति ने कहा है, ''मैंने कैबिनेट के सभी मंत्रियों को कहा है कि कैबिनेट का फिर से गठन होगा.'' हालांकि अभी तक साफ़ नहीं है कि किस तरह का फेरबदल होगा.

चिली की राजधानी सैंटियागो में दस लाख से ज़्यादा लोग शुक्रवार को एक प्रदर्शन में शामिल हुए थे. इस प्रदर्शन के बारे में कहा गया कि यह सोशल जस्टिस के लिए है.

इस प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति पिन्येरा ने कहा, ''मैंने सड़क पर उठ रही मांगों को सुना है. हमलोग एक नई सच्चाई का सामना कर रहे हैं. एक हफ़्ते पहले जो चिली था अब उससे बिल्कुल अलग है.'' राष्ट्रपति ने चिली के कई शहरों में लागू कर्फ़्यू को ख़त्म करन की घोषणा की है. ये कर्फ़्यू एक हफ़्ते से लागू थे.

चिली में ग़ैरबराबरी को लेकर एक हफ़्ते से हो रहे विरोध-प्रदर्शनों में कम से कम 17 लोगों की जान गई है. सैकड़ों लोग ज़ख़्मी भी हुए हैं. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद शुक्रवार को शांतिपूर्वक प्रदर्शन हुआ था.

राष्ट्रपति ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा था, ''हम सभी में बदलाव आया है. आज का मार्च पूरी तरह से शांतिपूर्ण था. इसमें चिली में एकता की बात कही गई. इससे भविष्य को दिशा मिलेगी.''

इमेज कॉपीरइट Reuters

मार्च में क्या हुआ?

सैंटियागो की गवर्नर कार्ला रुबिलार ने कहा है कि शुक्रवार के विरोध-प्रदर्शन में कम से कम दस लाख लोग शामिल हुए. यह संख्या चिली की कुल आबादी का पाँच प्रतिशत है. ट्विटर पर गवर्नर ने लिखा है, ''प्रदर्शनकारी एक नए चिली का सपना संजोए हैं.'' वहीं इस प्रदर्शन के आयोजकों का कहना है कि 1990 में चिली में लोकतंत्र बहाल होने के बाद से यह सबसे बड़ा प्रदर्शन था.

प्रदर्शन में भाग लेने वाले लोग मिलों पैदल चले. इस दौरान इनके हाथों में बर्तन थे और बजाते हुए आगे बढ़ रहे थे. झंडे लहरा रहे थे और सुधार की मांग कर रहे थे. चिली के बाक़ी शहरों में भी प्रदर्शनकारी सड़क पर उतरे. समाचार एजेंसी एएफ़पी से सैंटियागो में 38 साल के फ्रांसिस्को ने कहा, ''हम लोग इंसाफ़ की मांग रहे हैं. हम ईमानदार सरकार की मांग कर रहे हैं.''

इमेज कॉपीरइट Reuters

इसकी पृष्ठभूमि क्या है?

चिली में विरोध-प्रदर्शन की शुरुआत मेट्रो के किराए बढ़ने से हुई थी. लेकिन यही विरोध-प्रदर्शन सरकार से कई नाराज़गियों और बढ़ती ग़ैरबराबरी को लेकर व्यापक हो गया. लोग बढ़ती महंगाई से तो ख़फ़ा थे ही लेकिन तात्कालिक कारण लंबे समय से पल रहे असंतोष को सड़क पर लाने में कामयाब रहा.

पिछले एक हफ़्ते में चिली में काफ़ी उठापटक की स्थिति रही. सात हज़ार से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया गया. सैंटियागो की सुरक्षा को वहां की सेना ने अपने हाथों में ले लिया. आपातकाल जैसी स्थिति बन गई और हज़ारों पुलिस बल सड़कों पर तैनात कर दिए गए.

चिली लातिन अमरीका का धनी देश रहा है लेकिन इसके साथ ही यहां भयानक ग़ैर-बराबरी है. ऑर्गेनाइज़ेशन फोर इकनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट यानी ओईसीडी के कुल 36 सदस्य देशों में चिली एक ऐसा देश है जहां आय में असमानता बहुत गहरी है. बुधवार को राष्ट्रपति ने प्रदर्शन को ख़त्म करने के लिए एक सुधार पैकेज की घोषणा की थी. इसमें बुनियादी पेंशन और न्यूनतम मज़दूरी बढ़ाने की बात थी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे

संबंधित समाचार