पाकिस्तान: 'हम एक गुप्तचर संस्था के कर्मचारी हैं' - वुसअत का ब्लॉग

  • 28 अक्तूबर 2019
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Image caption सांकेतिक तस्वीर

क्या आप हाफ़िज़ हम्दुल्लाह को जानते हैं?

नहीं न? कोई दिक़्क़त नहीं. हम बता देते हैं कि हाफ़िज़ हम्दुल्लाह कौन हैं. हाफ़िज़ हम्दुल्लाह कहते हैं कि वो बलूचिस्तान के चमन में पैदा हुए. उनके पास वहां का जन्म प्रमाण पत्र भी है. उनके पिता बलूचिस्तान में एक सरकारी टीचर रहे और उसी हैसियत से रिटायर भी हुए.

उनके पास अपने पिता की 45 वर्ष पुरानी चेकबुक भी है, जिससे वो बैंक से अपनी तन्ख़्वाह लेते थे.

हाफ़िज़ हम्दुल्लाह 2002 के आम चुनाव में बलूचिस्तान एसेंबली के सदस्य बने और तीन साल तक राज्य के स्वास्थ मंत्री भी रहे.

वो अपने राजनीतिक दल जमीयत-उल-इस्लाम के टिकट पर पाँच साल तक सीनेट यानी पाकिस्तानी संसद के ऊपरी सदन के मेंबर बने और पिछले साल ही रिटायर हुए.

उनके पिता और पूरे परिवार के पास नेशनल आइडेंटिटी कार्ड भी है जैसा कि भारत में लोगों के पास आधार कार्ड होता है.

हाफ़िज़ हम्दुल्लाह तमाम टीवी चैनलों पर अपनी पार्टी के प्रवक्ता के तौर पर आते रहते हैं.

दो दिन पहले नेशनल आइडेंटिटी कार्ड बनाने वाली संस्था नादरा ने एलान किया कि हाफ़िज़ हम्दुल्लाह दरअसल अफ़ग़ानिस्तान के नागरिक हैं और इसलिए उनकी पाकिस्तानी नागरिकता रद्द की जाती है.

हो सकता है कि वो विदेशी ही हों, मगर ये बात समझ में नहीं आ रही है कि अगर उनके माता-पिता पाकिस्तानी नागरिक थे तो वो कैसे अफ़ग़ानिस्तान के नागरिक हो गए?

नादरा ने इस घोषणा के बाद पाकिस्तानी मीडिया को रेगुलेट करने वाले विभाग पेमरा को ख़त लिखा और कहा कि चूंकि हाफ़िज़ हम्दुल्लाह विदेशी हैं इसलिए वो किसी पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल पर नहीं बुलाए जा सकते.

जब पेमरा से पूछा गया कि क्या ऐसा क़ानून है कि कोई विदेशी पाकिस्तानी चैनल पर नहीं आ सकता तो पेमरा का कहना था कि ऐसा क़ानून तो नहीं है मगर ये आप नादरा से पूछिए.

जब नादरा से पूछा गया कि हाफ़िज़ को किस वजह से अफ़ग़ानिस्तान का नागरिक क़रार दिया गया है तो नादरा ने कहा कि 'हमें ये राज़ एक राष्ट्रीय गुप्तचर एजेंसी ने बताया.'

दूसरी ओर हाफ़िज़ कहते हैं, ''मेरे पैदा होने के 51 वर्ष के बाद मुझे पता चला कि मैं तो पाकिस्तानी नहीं हूं. तो अब वो क्या चाहते हैं कि मैं काबुल या दिल्ली चला जाऊं. तो फिर मोदी असम के मुसलमानों के साथ क्या ग़लत कर रहे हैं.''

हाफ़िज़ हम्दुल्लाह जमीयत-उल-इस्लाम के एक नेता हैं और उनकी जमात के प्रमुख मौलान फ़ज़लुर्रहमान इस वक़्त कराची से इस्लामाबाद तक लॉन्ग मार्च कर रहे हैं ताकि इमरान ख़ान से इस्तीफ़ा ले सकें.

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बलूचिस्तान

कल ही कराची में एक रिटायर्ड पुलिस एन्काउंटर स्पेशलिस्ट राव अनवार के हाथों कथित तौर पर मारे जाने वालों की याद में आर्टिस्ट अदीला सलमान ने 'किलिंग फ़ील्ड्स ऑफ़ कराची' के नाम से एक मैदान में 444 प्रतीकात्मक क़ब्रें बनाईं.

एक घंटे के बाद ही सादा कपड़ों में कुछ लोग वहां आए और सब लोगों को बाहर निकाल कर उस जगह को सील कर दिया.

अदीला ने पूछा कि आप कौन हैं? तो जवाब मिला, ''हम एक गुप्तचर संस्था के कर्मचारी हैं.''

अदीला ने आगे पूछा, कौन सी संस्था? तो जवाब मिला, ''बताया तो है, गुप्तचर.''

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