पाकिस्तान के धरने-प्रदर्शनों में कंटेनर का क्या काम?

  • 28 अक्तूबर 2019
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Image caption इमरान ख़ान अपने कारवां में

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ की सरकार के ख़िलाफ़ जमीअत उलेमा-ए-इस्लाम ने रविवार को अपना आज़ादी मार्च शुरू किया है. यह मार्च सिंध प्रांत की राजधानी कराची से शुरू हुआ है जो सड़क के रास्ते पंजाब और फिर राजधानी इस्लामाबाद पहुंचेगा.

इस मार्च का पीपीपी और मुस्लिम लीग (नवाज़) ने भी समर्थन किया है लेकिन यह अभी तक साफ़ नहीं है कि उसमें इन दलों के कार्यकर्ता शामिल होंगे या नहीं.

पीटीआई सरकार ने पहले इस मार्च को गंभीरता से नहीं लिया और यह समझा जा रहा था कि इस मार्च में इसमें मदरसे के चंद छात्र शामिल होंगे लेकिन जैसे-जैसे इसकी तारीख़ क़रीब आती गई, सरकार की परेशानी बढ़ती गई.

इमरान ख़ान, ताहिरुल क़ादरी और मौलाना फ़जलुर्रहमान ने पकिस्तान में जो भी बड़े विरोध प्रदर्शन, लॉन्ग मार्च, सभाएं या धरने किए हैं उनमें केंद्रीय भूमिका (राजनेताओं के बाद) कंटेनर की रही है.

आमतौर पर कंटेनर सामान को लाने ले जाने के लिए प्रयोग होते हैं. लेकिन पकिस्तान में इसका वो इस्तेमाल हो रहा है जो शायद बनाने वालों ने भी न सोचा होगा.

मौलाना फ़ज़लुर्रहमान के इस मार्च के लिए इस्लामाबाद तक कंटेनर पहुंच चुके हैं.

एक ओर प्रशासन के लिए कंटेनर से शहर बंद करना आसान होता है तो वहीं धरना देने वालों के लिए इसमें नेताओं के रहन-सहन का बेहतरीन इंतज़ाम हो जाता है.

इमरान ख़ान के धरने से लेकर अल्लामा ताहिरुल क़ादरी और नवाज़ शरीफ के जी.टी. रोड मार्च में कंटेनर का प्रयोग किया गया लेकिन मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने इन तमाम राजनेताओं को पीछे छोड़ दिया है और उनके लिए एक ऐसा 'कारवां होम' मंगवाया गया है जिसमें एक घर की सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं.

अगर आपने अभी तक कारवां होम को अंदर से नहीं देखा है तो हम आपको मौलाना फ़ज़लुर्रहमान के कारवां होम की सैर कराते हैं और उसके बाद बात करेंगे डी.चौक के कन्टेनर्स की.

मौलाना फ़ज़लुर्रहमान का कारवां होम

जमीयत उलेमा ए इस्लाम (एफ़) के प्रमुख मौलान फ़जलुर्रहमान आज़ादी मार्च कारवां होम में कर रहे हैं. यह कारवां अंदर से काफ़ी ख़ूबसूरत है लेकिन बाहर से भी कुछ बुरा नहीं है.

अगर आप इसके अंदर झांके तो महसूस होगा कि आप जहाज़ की इकोनॉमी क्लास से किसी बहाने ग़लती से बिज़नेस क्लास में दाख़िल हो चुके हैं.

पकिस्तान रेलवे जितनी भी तरक़्क़ी कर जाए लेकिन उसकी ग्रीन ट्रैन का अंदरूनी नज़ारा इतना ख़ूबसूरत नहीं होता जितना मौलाना फ़जलुर्रहमान का कारवां होम है.

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इस कारवां होम में बेडरूम, बाथरूम, ड्राइंगरूम, किचन और लिविंगरूम है जहाँ सोफे लगे हुए हैं और इसे गाड़ी के पीछे लगाकर खींचा जाता है.

यह कारवां बलूचिस्तान के प्रांतीय लीडर मौलाना अब्दुल वासी का है जो उन्होंने जापान से मंगवाया है. हर बड़े धरने में अक्सर यह देखने में आता है कि राजनीतिक पार्टियां अपने नेता के लिए कंटेनर का बंदोबस्त करती हैं.

इमरान ख़ान का कंटेनर

तहरीक़-ए-इंसाफ़ के नेता इमरान ख़ान के कंटेनर को कोई कैसे भूल सकता है. 2014 के धरने में उनका कंटेनर कई महीने इस्लामाबाद में खड़ा रहा था. इतनी लंबी सर्विस के बाद इस कंटेनर की मज़बूती पर किसी को शक नहीं होना चाहिए.

लेकिन दूसरी तरफ़ इमरान ख़ान उस वक़्त प्रशासन की तरफ़ से सड़कों पर लगाए गए कंटेनर से कोई ख़ास ख़ुश नहीं थे.

धरने के दौरान कई बार इमरान ख़ान ने उस समय के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को संबोधित करते हुए कहा था कि यह कंटेनर जो आपने सड़क के चारों तरफ़ लगाए हुए हैं ये लोगों की सुनामी को नहीं रोक सकेंगे.

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देखा जाए तो इमरान खान के कंटेनर में इतनी सुख सुविधाएं नहीं थीं जो मौलाना के कारवां होम में हैं. उनके पास तो सिर्फ़ कुछ सोफ़े, मेज़, कुर्सियां, बिस्तर और टी.वी. हुआ करता था.

बारिश हो या आंधी वो इसी कंटेनर की मदद से धरने में आए लोगों को संबोधित किया करते थे और फिर रात को इसी में रुकते थे. इसे ख़ास राजीतिक मुलाक़ातों के लिए भी प्रयोग किया जाता था.

यह कहना ग़लत न होगा कि इस कंटेनर की भूमिका किसी बड़े राजनेता से कम नहीं थी जो न सिर्फ़ अपने पार्टी के सभी बड़े फ़ैसलों में मौजूद होता है बल्कि नेताओं का भरोसा भी बुलंद रखता है.

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