अब इस्लामिक स्टेट का नया 'बग़दादी' कौन

  • 29 अक्तूबर 2019
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विद्रोहियों के समूह से पैदा हुआ सबसे ख़तरनाक और हिंसक चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट अबु बक्र अल-बग़दादी के नेतृत्व में अफ़्रीका से ऑस्ट्रेलिया तक अपने पांव पसार रहा था.

लेकिन, अब इस संगठन ने अपना मुखिया खो दिया है तो अब उसके पास क्या रास्ता है. नए नेतृत्व की तलाश में आईएस अब क्या कर रहा है?

जल्दी ही नए नेता की ज़रूरत

संगठन अपने समर्थकों को न तो किसी भी तरह की कमज़ोरी दिखाना चाहेगा और न ही अपने मुखिया के मारे जाने से किसी भी तरह के असंतुलन का संकेत देना चाहेगा.

इसके बड़े नेताओं वाली शुरा कमिटी (सभी पुरुष) ने पहले ही संगठन प्रमुख के लिए कई उम्मीदवारों पर विचार करना शुरू कर दिया होगा.

इस भूमिका के लिए उम्मीदवार में जिस योग्यता की ज़रूरत होगी वो है आईएस के प्रति पूरी निष्ठा, बेहतरीन रणनीति बनाने की क्षमता और मुख्य तौर पर बेदाग़ धार्मिक पहचान, जंग लड़ने का अनुभव और कठोर सज़ा देने वाले के तौर पर मशहूर होना.

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इस्लामिक स्टेट में पूर्व इराक़ी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन की सेना और ख़ुफ़िया तंत्र के पूर्व सदस्यों के साथ-साथ अति रूढ़िवादी जिहादी दोनों शामिल हैं, जिन्हें बाथिस्ट भी कहा जाता है.

बाथिस्ट हथियार, गोला-बारूद, ख़ुफ़िया जानकारी देते हैं और योजना तैयार करते हैं. इराक़ को उनसे बेहतर कोई नहीं जानता. जिहादी कट्टरता पैदा करने का काम करते हैं और आत्मघाती तैयार करते हैं.

बग़दादी के बाद आने वाला नेता ऐसा होगा जिसके इन दोनों ही धड़ों में बराबर संपर्क हों.

हालांकि, आईएस को कुछ समय तक बग़दादी की कमी खलने वाली है.

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Image caption अमरीका के स्पेशल फ़ोर्स के ऑपरेशन के बाद ऊपर से ली गई तस्वीर. यह तस्वीर सीरिया के इदलिब प्रांत के बारिशा गाँव की है.

जब दुनिया भर के जिहादियों ने आईएस के प्रति निष्ठा की प्रतिज्ञा ली थी, तब उन्होंने बग़दादी को "खलिफ़ा इब्राहिम" मानते हुए उनके प्रति निष्ठा का भी वचन दिया.

बग़दादी ने पैग़ंबर मोहम्मद की क़ुरैश जनजाति से अपना वंश होने का दावा किया और मूसल की अल-नूरी मस्जिद से "बग़ावत" की घोषणा की. इस मस्जिद को बाद में विस्फोट से उड़ा दिया गया.

हालांकि, ये भी कहा जाता है कि बग़दादी एक सीरियल रेपिस्ट था, यज़िदी महिलाओं और बच्चियों को ग़ुलाम बनाया और अमरीकी सहायता कर्मी कायला मुलर और अन्य महिलाओं के साथ जबरदस्ती की.

बदले की कोशिश

ऐसा हो सकता है. इसके लिए सबसे आसान निशाना इराक़ और सीरिया में होगा, जहां हथियारों, गोला-बारूद और आत्मघाती हमलावरों तक पहुंच बनाना आसान होता है.

वहीं, जब से आईएस ने सीरिया में बागुज़ से अपना नियंत्रण खोया है, तब से वो हमले ज़ारी रखने की क़सम खा रहा है.

यूरोप, अमरीका, उत्तरी अफ़्रीका, अरब और एशियाई देश सभी आईएस की नज़रों में हैं.

यहां तक कि व्यक्तिगत तौर पर होने वाले तथाकथित 'लोन वुल्फ' हमलों और इंटरनेट पर कट्ठरपंथ को बढ़ावा देने को आईएस बग़दादी की मौत का बदला भी कह सकता है.

यूरोप में आईएस के निशाने पर रहे फ्रांस ने अपने नागरिकों को सुरक्षा संबंधी चेतावनी भी दे दी है.

इस्लामिक स्टेट बड़े स्तर पर हमला करना चाहेगा लेकिन उसके नेताओं को पता है कि जितनी बड़ी योजना होगी उतना ही उसके खुफ़िया एजेंसियों को लीक होने का ख़तरा होगा.

इसलिए आने वाले समय में वो छोटे स्तर के, तकनीक के इस्तेमाल से, आसान और कम तैयारी वाले हमले कर सकता है.

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फिर से खड़ा होगा?

आईएस के फिर से लौटने का ट्रैक रिकॉर्ड परेशान करने वाला रहा है.

बग़दादी के नेतृत्व में अमरीका के बूका शिविर में अन्य जिहादियों के साथ जुड़कर आईएस ने इराक़ में अल-क़ायदा को फिर से ज़िंदा कर दिया था.

आईएस 2016 में अल-क़ायदा से अलग हो गया था.

इन दोनों संगठनों की कई मामलों पर असहमति है. ख़ासतौर पर आईएस के अतिहिंसक तरीक़े, जिससे मुस्लिम जगत उससे दूर जा रहा था.

अल-क़ायदा ने मुस्लिम जगत का समर्थन पाने की कोशिश की लेकिन आईएस को इसकी कोई परवाह नहीं है. वो मनोरोगी, पीडोफाइल और हिंसा के साथ क्रूरता की तरफ़ आकर्षित होने वालों को भर्ती करके ख़ुश है.

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