सऊदी अरब में रह रहे 26 लाख भारतीयों के लिए पीएम मोदी ने क्या कहा

  • 29 अक्तूबर 2019
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब के दो दिवसीय दौरे पर हैं. पिछले तीन सालों में पीएम मोदी का ये दूसरा सऊदी दौरा है.

प्रधानमंत्री मोदी ने अरब न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में कहा है कि दोनों देश जी-20 के भीतर ग़ैर-बराबरी और टिकाऊ विकास पर साथ मिलकर काम कर रहे हैं.

मोदी ने कहा कि सऊदी और भारत स्ट्रैटिजिक पार्टनर्शिप काउंसिल के तहत कई समझौते करने जा रहे हैं. भारतीय प्रधानमंत्री ने इस इंटरव्यू में कहा कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध और मज़बूत हुए हैं. पढ़ें, उनके इंटरव्यू के मुख्य अंश-

आप क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन-सलमान से जी-20 समिट से अलग कई बार मिल चुके हैं. मोहम्मद बिन-सलमान नई दिल्ली भी गए थे. क्या आप बता सकते हैं कि आपमें और क्राउन प्रिंस के बीच कोई ख़ास जुगलबंदी है?

अरब न्यूज़ के इस सवाल के जवाब में पीएम मोदी ने कहा, ''पहली बार 2016 में मैं सऊदी अरब गया. इस दौरे में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में काफ़ी प्रगति हुई. क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से मेरी मुलाक़ात पाँच बार हुई है. ''

''क्राउन प्रिंस से पहले हुई गर्मजोशी भरी मुलाक़ातें मुझे याद हैं और इस दौरे में हम एक बार फिर से उसी जोश के साथ मिलने जा रहे हैं. मैं इसे लेकर आश्वस्त हूं कि किंग सलमान और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व में दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध और मज़बूत होंगे.''

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सऊदी में रह रहे भारतीयों को मोदी क्या संदेश देना चाहते हैं?

इस सवाल पर पीएम मोदी ने कहा, ''लगभग 26 लाख भारतीयों ने सऊदी अरब को अपना दूसरा घर बनाया है. यहां की प्रगति में ये भी अपना योगदान दे रहे हैं. बड़ी संख्या में भारतीय हर साल हज यात्रा पर और कारोबार को लेकर यहां आते हैं. मेरा इनके लिए संदेश है कि आपने सऊदी में जो जगह बनाई है उस पर भारत को गर्व है.''

''इनकी कड़ी मेहनत और प्रतिबद्धता के कारण सऊदी में भारत का सम्मान बढ़ा है और इससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध मज़बूत होने में मदद मिली है. हम इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि सऊदी से आपका संबंध इसी तरह आगे बढ़ता रहेगा.''

मध्य-पूर्व या पश्चिम एशिया में तनातनी का माहौल है. लोग टकराव और हिंसा का सबसे बुरा दौर भी झेल रहे हैं. इसे कम करने के लिए भारत किस तरह की रचनात्मक भूमिका अदा कर सकता है?

इस सवाल के जवाब में नरेंद्र मोदी ने कहा, ''हमारा मानना है कि इलाक़े में टकराव को ख़त्म करने के लिए संतुलित रुख़ की ज़रूरत है. इसमें सबसे अहम बात यह है कि हर कोई एक दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करे और आंतरिक मामलों में दख़ल ना दे. इस इलाक़े के सभी देशों से भारत के द्विपक्षीय संबंध हैं. इस इलाक़े में बड़ी संख्या में भारतवंशी भी रहते हैं. यह संख्या 80 लाख से ज़्यादा है.''

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सऊदी अरब भारत में सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता देश है. तेल की कम क़ीमत भारत के हक़ में होती है और सऊदी मार्केट शेयर अपने हक़ में बनाए रखना चाहता है. दोनों देश इस पक्ष को द्विपक्षीय मुनाफ़े के हिसाब से कैसे संतुलित करते हैं?

इस पर नरेंद्र मोदी ने जवाब दिया, ''भारत सऊदी अरब से 18 फ़ीसदी कच्चा तेल आयात करता है. हमारे तेल का दूसरा बड़ा स्रोत सऊदी अरब है. हम विशुद्ध क्रेता-विक्रेता वाले संबंध से आगे बढ़कर रणनीतिक साझेदारी की तरफ़ बढ़ रहे हैं. इसमें तेल और गैस प्रोजेक्ट में सऊदी अरब का निवेश भी शामिल है.''

''हमारा मानना है कि तेल की स्थिर क़ीमत वैश्विक अर्थव्यवस्था में गति के लिए ज़रूरी है. ख़ासतौर पर विकासशील देशों के लिए. सऊदी की अरामको तेल कंपनी भारत के पश्चिम समुद्री तट पर बड़ी रिफ़ाइनरी और पेट्रोकेमिकल परियोजनाओं में शामिल हो रही है. हम इस बात की संभावना भी देख रहे हैं कि अरामको रणनीतिक तेल भंडार में भी शामिल हो.''

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भारत स्मार्ट सिटी बना रहा है और सऊदी अरब के पास इसका काफ़ी अनुभव है. क्या आप अपने देश में घोषित बड़े स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में मदद के लिए सऊदी अरब को बुलाने की इच्छा रखते हैं?

इसके जवाब में नरेंद्र मोदी ने कहा, ''भारत और सऊदी अरब के बीच सहयोग के बड़े क्षेत्रों में से एक है हमारे बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं में निवेश करना. फरवरी 2019 में अपने दौरे के दौरान क्राउन प्रिंस ने पूरे भारत में विभिन्न क्षेत्रों में 100 अरब डॉलर से ज़्यादा का निवेश करने के संकते दिये थे. ''

''हम अपनी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सऊदी के निवेशों का स्वागत करते हैं जिसमें हमारा स्मार्ट सिटी प्रोग्राम भी शामिल है. हम नेशनल इंवेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में निवेश के लिए सऊदी अरब की दिलचस्पी का भी स्वागत करते हैं.''

भारत और सऊदी अरब जी-20 के सदस्य हैं. वैश्विक अर्थव्यवस्था पर आप क्या सोचते हैं?

इस सवाल के जवाब में पीएम मोदी ने कहा, ''वैश्विक अर्थव्यवस्था की संभावना भारत जैसे विकासशील देशों पर निर्भर है. मैंने संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में भी कहा था कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में गति बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयास की ज़रूरत है. आर्थिक अनिश्चितता असंतुलित व्यापारिक व्यवस्था के कारण भी है. जी-20 के भीतर सऊदी और भारत ग़ैर-बराबरी व टिकाऊ विकास को लेकर साथ मिलकर काम कर रहे हैं. मैं इस बात को लेकर ख़ुश हूं कि अगले साल जी-20 समिट सऊदी में होने जा रहा है और 2022 में भारत में.''

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