पाकिस्तान ट्रेन दुर्घटना: क्या रेल हादसे रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुके हैं?

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31 अक्तूबर को ट्रेन में लगी आग को बुझाते दमकलकर्मी

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31 अक्तूबर को ट्रेन में लगी आग को बुझाते दमकलकर्मी

पाकिस्तान में ट्रेन हादसे में 70 से अधिक लोगों के मारे जाने के बाद पाकिस्तानी सरकार के ट्रेनों की सुरक्षा के लिए उठाए गए क़दमों पर सवाल उठ रहे हैं.

दावा: विपक्षी नेता बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने कहा है कि पाकिस्तान के वर्तमान रेल मंत्री ने 'सबसे अधिक रेल हादसों' का रिकॉर्ड बनाया है.

हक़ीक़त: मौजूदा तथ्यों से पता चलता है कि यह दावा सही नहीं है. इस साल दो सबसे बड़े रेल हादसे हुए थे जिनमें हताहतों की बड़ी संख्या थी, बीते पांच वर्षों की तुलना में पिछले वर्ष में दुर्घटनाओं की संख्या काफ़ी कम थीं.

रेलवे मंत्रालय के अनुसार, शेख़ रशीद अहमद ने अगस्त 2018 में रेल मंत्री का पद संभाला था तब से लेकर जून 2019 तक 74 रेल हादसे हुए.

साथ ही हाल का रेल हादसा दशक का सबसे बुरा हादसा है. इस अवधि के दौरान काफ़ी घातक रेल दुर्घटनाएं हुईं, इसमें जुलाई में हुआ रेल हादसा भी शामिल है जिसमें 20 लोगों की मौत हुई थी.

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पहले की दुर्घटनाएं

अधूरे आंकड़ों की वजह से मौजूदा दौर की बीते सालों से तुलना मुश्लिक काम है. लेकिन बीते 12 महीनों में 74 दुर्घटनाओं को साधारण तो नहीं कहा जा सकता.

पाकिस्तान रेलवे के पास जो आंकड़े है उनके मुताबिक भी साल 2012 से 2017 के बीच 757 ट्रेन दुर्घटनाएं हुई. यानी हर साल औसतन 125 दुर्घटनाएं.

इनमें अधिकतर दुर्घटनाएं ट्रेनों के पटरी से उतरने या रेलवे क्रॉसिंग पर दूसरे वाहनों से टकराने की वजह से हुईं.

इस लिहाज़ से 2015 सबसे ख़राब साल रहा. उस साल छोटी-बड़ी 175 दुर्घटनाएं हुईं. इनमें में 75 ट्रेनों के पटरी से उतरने की वजह से और 76 रेलवे क्रॉसिंग पर हुई.

स्थानीय मीडिया के मुताबिक बीते छह सालों में ट्रेन हादसों में 150 लोगों की मौत हुई है.

लेकिन एक और आकड़ा है जो पाकिस्तान रेलवे से संसद में पेश किया था. उसके मुताबिक साल 2013 से 2016 के बीच 338 ट्रेन हादसों में 118 लोगों की मौत हुई.

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पाकिस्तान रेलवे की तेज़ गाम एक्सप्रेस में आग

रेल हादसे क्यों होते हैं?

सरकार का कहना है कि इस हादसे की वजह खाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला गैस सिलेंडर ज़िम्मेदार है. इसके बाद आग डब्बों में फैल गई जिसके चलते कई लोग चलती हुई ट्रेन से कूदने को मजबूर हो गए.

लेकिन दूसरी मीडिया रिपोर्ट्स में हादसे की वजह इलेक्ट्रिक गड़बड़ियां बताई जा रही हैं. हादसे में बचे कई पीड़ितों ने हादसे के लिए शार्ट सर्किट को दोष दिया है.

यह ट्रेन कराची से रावलपिंडी जा रही थी. यह पाकिस्तान की सबसे पुरानी और लोकप्रिय रेलवे लाइन है. पाकिस्तान में मिडिल क्लास और लोअर क्लास के लोगों के लिए यात्रा का सबसे पापुलर साधन रेलवे ही है.

यही वजह है कि रेल के डब्बों में अमूमन भीड़ भाड़ होती है और ट्रेनों की स्थिति भी खस्ताहाल है.

बीबीसी उर्दू संवाददाता आबिद हुसेन का कहना है कि एयरपोर्ट की तुलना में रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा के इंतज़ाम भी कम होते हैं. यही वजह है कि रेल यात्रा में लोग कुकिंग स्टोव और पेट्रोलियम तेल के कंटेनर भी ले जाते हैं.

आधिकारियों के मुताबिक पाकिस्तान में ट्रेन हादसों की तीन सबसे बड़ी, रख रखाव का अभाव, सिग्नल की समस्या और इंजनों का पुराना होना है.

ऐसे हादसों में हताहतों की संख्या इसलिए भी ज्यादा होती है क्योंकि ट्रेन में जगह से ज्यादा लोग सफर कर रहे होते हैं. 2007 में मेहराबपुर के पास हुए ट्रेन हादसे में 56 लोगों की मौत हुई थी और 120 लोग घायल हुए थे.

2005 में सिंध प्रांत में तीन ट्रेनों के आपस में टकराने में 130 लोगों की मौत हुई थी. इसे पाकिस्तान का सबसे भयावह रेल हादसा माना जाता है.

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