डोनल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग क्यों लाना चाहते हैं उनके विरोधी

  • 10 नवंबर 2019
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ड्रामा देखने के लिए स्ट्रीमिंग ऐप्स को को भूल जाइए क्योंकि इससे अधिक नाटकीय मोड़ अमरीका की राजनीति में दिख रहे हैं.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के विरोधियों की कोशिश है कि उनके ख़िलाफ़ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की जाए.

अगर वो अपनी इस कोशिश में सफल हो जाते हैं तो ट्रंप के ख़िलाफ़ जांच होगी और उन्हें पद छोड़ना पड़ सकता है.

13 नवंबर को राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ औपचारिक तौर पर महाभियोग की जांच शुरू होगी और ये जांच सार्वजनिक तौर पर होगी.

महाभियोग क्या होता है?

महाभियोग एक तरह की जांच है जिसके ज़रिए अमरीकी कांग्रेस राष्ट्रपति को उनके दफ़्तर से हटाया जा सकता है.

कुछ लोगों को लगता है कि इसमें राष्ट्रपति को हटाना होता है लेकिन असल में ये दो चरणों में होने वाली प्रक्रिया है जिसे कांग्रेस के दो सदन अंजाम देते है. इसमें महाभियोग पहला चरण है और राजनीतिक प्रक्रि​या दूसरा चरण है.

पहले चरण में निचला सदन यानी हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेन्टेटिव्स के नेता राष्ट्रपति पर लगे आरोपों को देखते हैं और तय करते हैं कि राष्ट्रपति पर औपचरिक तौर पर आरोप लगाएंगे या नहीं. इसे कहा जाता है, "महाभियोग के आरोपों की जांच आगे बढ़ाना."

इसके बाद ऊपरी सदन, सीनेट इस मामले को आगे बढ़ाते हुए जांच करता है कि राष्ट्रपति दोषी हैं या नहीं. अगर वो दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें पद छोड़ना होता है और उनकी जगह उप राष्ट्रपति को कार्यभार संभालते हैं.

कहा जा रहा है कि निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में महाभियोग पास हो सकता है. लेकिन सीनेट में इसे पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है और यहां रिपब्लिकन का भारी बहुमत है (ट्रंप रिपब्लिकन राष्ट्रपति हैं).

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कितने राष्ट्रपतियों के ख़िलाफ़ लाया गया है महाभियोग?

अमरीका के इतिहास में केवल दो राष्ट्रपतियों, 1886 में एंड्रयू जॉनसन और 1998 में बिल ​क्लिंटन के​ ख़िलाफ़ महाभियोग लाया गया था, लेकिन उन्हें पद से हटाया नहीं जा सका.

1974 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन पर अपने एक विरोधी की जासूसी करने का आरोप लगा था. इसे वॉटरगेट स्कैंडल का नाम दिया गया था.

लेकिन महाभियोग चलाने से पहले उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया था क्योंकि उन्हें पता था कि मामला सीनेट तक पहुंचेगा और उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ सकता है.

ट्रंप के ख़िलाफ़ मामला क्या है?

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Image caption ट्रंप और वोलोदिमीर ज़ेलेन्स्की

राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पर अपने अगला राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए एक प्रतिद्वंदी के ख़िलाफ़ साजिश का आरोप लगाया गया है.

ट्रंप पर आरोप है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदिमीर ज़ेलेन्स्की के साथ फ़ोन पर हुई इस बातचीत में उन्होंने ज़ेलेन्स्की पर दबाव डाला कि वो जो बाइडन और उनके बेटे के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के दावों की जाँच करवाएं.

तो क्या ट्रंप ने क़ानून तोड़ा?

कई लोग इसे सहमत नहीं हैं कि एक विदेशी नेता को अपने प्रतिद्वंदी को बदनाम करने के लिए कहने भर से किसी के ख़िलाफ़ महाभियोग लाया जा सकता है.

ट्रंप का कहना है कि उन्होंने कुछ ग़लत नहीं किया है और उन्होंने महाभियोग की जांच को "दुर्भावना से प्रेरित" बताया है. व्हाइट हाउस ने भी इस जांच में सहयोग करने से इनकार कर दिया है.

लेकिन इससे ट्रंप की मुश्किलें कम नहीं होंगी. क्योंकि एक व्हिसलब्लोअर ने इसी साल 25 जुलाई को राष्ट्रपति के दफ्तर के किए गए एक फ़ोन कॉल के बारे में शिकायत की है.

ट्रंप ने यूक्रेन को दी जाने वाली लाखों डॉलर की सैन्य सहायता पर रोक लगा दी है. चार आला अधिकारियों का कहना है कि ट्रंप ने स्पष्ट कह दिया है कि ये पैसा तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक यूक्रेन उनके विरोधी के बारे में जांच शुरू नहीं करता. हालांकि, व्हाइट हाऊस ने इससे इनकार किया है.

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Image caption अमरीकी की प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैन्सी पलोसी ने छह समितियों को जांच शुरुप करने के लिए कहा है

अब आगे क्या होगा?

ये जांच नेताओं के छोटे-छोटे समूह यानी समितियां करेंगी. हर एक समिति को इस मामले से जुड़े किसी एक चीज़ को समझने में महारत हासिल है जैसे कि विदेशी मामलों की समिति, आर्थिक मामलों की समिति और न्याय की समिति.

इस मामले में सार्वजनिक तौर पर गवाहों को भी बुलाया जाएगा.

राष्ट्रपति के वकीलों को इस पूरी प्रक्रिया में हिस्सा लेने का हक हासिल होगा.

अगर समिति ये तय करती है कि राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ आरोप तय किए जाएं तो इस पर सदन के सदस्य मतदान करेंगे.

महाभियोग के सफल होने के कितने आसार हैं?

पहले चरण में राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ महाभियोग लाने के लिए साधारण बहुमत चाहिए.

चूंकि सदन में बहुमत विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी का है, हो सकता है यहां पर सफलता मिले.

डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने कहा है कि वो इस साल के ख़त्म होने से पहले इस मामले में मतदान करना चाहते हैं.

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Image caption एंड्रयू जॉनसन, बिल ​क्लिंटन, रिचर्ड निक्सन

तो क्या ट्रंप को पद त्यागना होगा?

ट्रंप कतई इस मूड में नहीं दिखते. उनकी रिपब्लिकन पार्टी का कहना है कि सीनेट की 100 सीटों में 53 सीटें उनके पास हैं और ट्रंप को दफ्तर से बाहर निकालने के लिए दो तिहाई मत ज़रूरी हैं.

ऐसे में अगर ट्रंप की पार्टी के क़रीब 20 सदस्य उनका साथ देने से इनकार करते हैं तभी कुछ बड़ी उथल-पुथल होगी. लेकिन अब तक रिपब्लिकन पार्टी उनका साथ देती आई है.

तो फिर महाभियोग क्या केवल राजनीतिक ड्रामा है?

ट्रंप के समर्थक मानते हैं कि ट्रंप के विरोधी उनके मतों में सेंध लगा कर उन्हें कमज़ोर करना चाहते हैं. ये पूरी प्रक्रिया राष्ट्रपति की छवि ख़राब कर सकती है.

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लेकिन अमरीकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की स्पीकर नैन्सी पोलेसी का कहना है कि ट्रंप के दौर में व्हाइट हाउस "अपने निचले स्तर पर पहुंच गया है."

व्यवसायी से राष्ट्रपति बने ट्रंप पहले भी कई कानूनी विवादों में फंस चुके हैं. उन पर कथित तौर पर 2016 के अमरीकी चुनावों में रूसी हस्तक्षेप की जांच को प्रभावित करने, अपने टैक्स संबंधी दस्तावेज़ न दिखाने और खुद पर कथित तौर पर यौन हिंसा के आरोप लगने पर दो महिलाओं को पैसे देने के आरोप लगाए गए हैं.

हो सकता है कि यूक्रेन का ताज़ा मुद्दा उनकी इस सूची में आख़िरी कील साबित हो.

लेकिन महाभियोग का प्रस्ताव विपक्ष के लिए भी कम जोखिम भरा सौदा नहीं. अगर ये जांच सफल नहीं हो पाई तो इसका असर 2020 में होने वाले चुनावों पर पड़ सकता है और विपक्ष को इसका खामियाज़ा भी भुगतना पड़ सकता है.

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