'कश्मीर पर इमरान ख़ान सरकार ने भाषणबाज़ी के अलावा कुछ नहीं किया' - पाक उर्दू प्रेस रिव्यू

  • 17 नवंबर 2019
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पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते विपक्ष के आज़ादी मार्च की समाप्ति, भारत प्रशासित कश्मीर में लॉकडाउन के 100 दिन, नवाज़ शरीफ़ की बिगड़ती तबीयत आदि से जुड़ी ख़बरें सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियों में रहीं.

पाकिस्तान के एक प्रमुख विपक्षी पार्टी और धार्मिक संगठन जमीयत-उल-इस्लाम एफ़ (जेयूआई-एफ़) का आज़ादी मार्च ख़त्म हो गया है.

27 अक्तूबर से कराची से शुरू होकर राजधानी इस्लामाबाद पहुँचे आज़ादी मार्च का आह्वान जेयूआई-एफ़ के प्रमुख मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने किया था लेकिन इस मार्च को तमाम विपक्षी पार्टियों का समर्थन हासिल था.

उनकी माँग थी कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान अपने पद से इस्तीफ़ा दें और नए सिरे से देश में आम चुनाव कराए जाएं. सरकार ने उनकी माँग को ख़ारिज कर दिया था.

बुधवार (13 नवंबर) को मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए आज़ादी मार्च ख़त्म करने की घोषणा की.

अख़बार जंग के मुताबिक़ मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने कहा कि इस्लामाबाद का धरना ख़त्म करके प्रांतों में प्रमुख चौराहों और हाईवेज़ को जाम किया जाएगा.

मौलाना ने इस्लामाबाद धरने को 'प्लान ए' कहा था जबकि राज्यों के राष्ट्रीय राजमार्गों को जाम करने को 'प्लान बी' कह रहे हैं.

अख़बार के मुताबिक़, मौलाना ने अपने समर्थकों से कहा कि उनके मक़सद को पूरी तरह पाने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.

अख़बार एक्सप्रेस में एहतेशाम बशीर ने एक कॉलम लिखा है जिसका शीर्षक है, ''क्या मौलाना का निशाना चूक गया?''

अख़बार के अनुसार मौलाना ये बात मानने को तैयार हैं ही नहीं कि उनका 'प्लान ए' नाकाम रहा है. मौलाना ने ऐसा क्यों किया ये किसी को समझ में नहीं आ रहा है. उनका साथ दे रही विपक्षी पार्टियों पीपीपी और मुस्लिम लीग (एन) को भी नहीं पता कि आख़िर मौलाना चाहते क्या हैं.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी इमरान ख़ान सरकार से डील हो गई है कि अगले चुनाव में उनका 'ख्याल' रखा जाएगा.

पाकिस्तान पीपल्स पार्टी ने कहा है कि मौलाना का आज़ादी मार्च सफल रहा लेकिन आगे उनके साथ सहयोग नहीं करेंगे.

अख़बार दुनिया के अनुसार पीपीपी के प्रमुख बिलावल भुट्टो ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पीपीपी ने मौलाना से किया हुआ वादा पूरा किया है, आज़ादी मार्च के कारण इमरान ख़ान के जाने की संभावना बढ़ गई है.

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अख़बार के मुताबिक़ बिलावल ने ये साफ़ कर दिया कि मौलाना के 'प्लान बी' का उनकी पार्टी समर्थन नहीं करेगी.

बिलावल ने कहा कि अगले साल चुनाव होंगे और पाकिस्तान को एक नया प्रधानमंत्री मिलेगा.

प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने मौलाना फ़ज़लुर्रहमान पर हमला करते हुए कहा कि धरने का मकस़द भारत प्रशासित कश्मीर के हितों को नुक़सान पहुँचाना और भारत के हाथों में खेलने के सिवा कुछ नहीं था.

उन्होंने प्रमुख विपक्षी पार्टी पीपीपी और मुस्लिम लीग को भी निशाना बनाते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं ने अपने भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए धरने का हिस्सा बनकर मौक़ा परस्ती का सबूत दिया है.

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कश्मीर पर अख़बार ने इमरान की आलोचना की

भारत में कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा ख़त्म करने और वहां लॉकडाउन को 100 दिन पूरे हो गए हैं.

अख़बार नई बात के अनुसार इमरान ख़ान ने एक कॉन्फ़्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि कश्मीर के कारण पाकिस्तान ख़तरे में है और कश्मीर की समस्या हल किए बग़ैर क्षेत्र में स्थायी शांति बहाल नहीं हो सकती है.

उधर पाकिस्तान ने अमरीकी संसद के मानवाधिकार आयोग टॉम लैंटोस कमीशन के ज़रिए भारत प्रशासित कश्मीर के मुद्दे पर की गई सुनवाई का स्वागत किया है.

अख़बार एक्सप्रेस के मुताबिक़ पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि टॉम लैंटोस कमीशन ने अपनी सुनवाई के दौरान इस बात को दोहराया है कि भारत प्रशासित कश्मीर भारत का आंतरिक मामला नहीं है, बल्कि ये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत एक विवादित मुद्दा है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत कश्मीर के अवाम की आवाज़ को ख़ामोश करने की कोशिश कर रहा है लेकिन टॉम लैंटोस कमीशन के सदस्यों और पैनेलिस्टों ने भारत के सबसे बड़े लोकतंत्र होने के दावे की पोल खोल दी है.

लेकिन अख़बार नई बात में एक संपादकीय छपा है जिसमें इमरान ख़ान सरकार की जमकर आलोचना की गई है.

अख़बार ने संपादकीय में लिखा है कि पाँच अगस्त के भारतीय फ़ैसले (कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा ख़त्म करने का फ़ैसला) के बाद पाकिस्तानी सरकार और उसके विदेश मंत्रालय ने सिवाए भाषणबाज़ी के कुछ नहीं किया.

अख़बार आगे लिखता है कि कश्मीर के मामले में पाकिस्तान न तो कूटनीतिक स्तर पर कोई सफलता पा सका और न ही भारत प्रशासित कश्मीर में हो रहे कथित मानवाधिकार उल्लंघन पर किसी देश का समर्थन हासिल कर सका.

अख़बार के अनुसार पाकिस्तान के इतिहास में उसकी विदेश नीति इतनी कमज़ोर कभी नहीं रही. अख़बार लिखता है कि पाकिस्तान की विदेश नीति को नई दिशा की ज़रूरत है.

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इलाज के लिए विदेश जा सकेंगे नवाज़ शरीफ़

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को इलाज के लिए देश से बाहर जाने की इजाज़त मिल गई है.

अख़बार एक्सप्रेस के मुताबिक़ लाहौर हाईकोर्ट ने नवाज़ शरीफ़ को चार हफ़्ते के लिए विदेश जाने की इजाज़त दे दी है. इससे पहले सरकार ने उन्हें क़रीब सात अरब पाकिस्तानी रुपए के बॉन्ड के साथ विदेश जाने की इजाज़त दी थी. लेकिन नवाज़ शरीफ़ ने सरकार की इस शर्त को ख़ारिज करते हुए लाहौर हाईकोर्ट में सरकार के फ़ैसले को चुनौती दी थी.

अख़बार दुनिया के अनुसार इमरान ख़ान ने शरीफ़ परिवार पर तंज़ करते हुए कहा था कि सियासत अपनी जगह है लेकिन उन्हें भी नवाज़ शरीफ़ की जान प्यारी है और अगर वो शहबाज़ शरीफ़ की जगह होते तो कितना भी पैसा हो उसे भरकर भाई की जान बचाते.

शनिवार को उच्च न्यायालय ने नवाज़ शरीफ़ की अपील को स्वीकार करते हुए उन्हें बिना किसी शर्त के चार हफ़्ते के लिए विदेश जाने की इजाज़त दे दी.

अख़बार के अनुसार मुस्लिम लीग (नवाज़) के अध्यक्ष शहबाज़ शरीफ़ ने अदालत के फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा कि क़ौम की दुआएं रंग लाईं और अदालत ने मानवता के आधार पर ये फ़ैसला सुनाया है जिसके लिए वो अदालत के शुक्रगुज़ार हैं.

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