इसराइल का नष्ट होना यहूदियों का ख़त्मा नहीं: ख़मेनई- पाँच बड़ी ख़बरें

  • 17 नवंबर 2019
ईरान इमेज कॉपीरइट Getty Images

ईरान के सर्वोच्च नेता अयतोल्लाह अली ख़मेनई ने कहा है कि ईरान यहूदियों को नष्ट नहीं करना चाहता है लेकिन सभी धर्मों के लोगों को इसराइल का भविष्य तय करना चाहिए.

1979 में इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान ने इसराइल को मान्यता देने से इनकार कर दिया था और वो फ़लीस्तीनी चरमपंथी समूहों को समर्थन करता है. इसराइल लंबे समय से कहता रहा है कि ईरान उसे नष्ट करना चहता है और मध्य-पूर्व में उसे अपना प्रमुख दुश्मन मानता है.

तेहरान में एक इस्लामिक कॉन्फ़्रेंस में ख़मेनई ने कहा, ''एक देश के रूप में इसराइल को नष्ट करने का मतलब यहूदियों को नष्ट करना नहीं है. इसका मतलब यह है कि फ़लस्तीन के लोग, चाहे वो मुसलमान, ईसाई या यहूदी हों- उन्हें अपनी सरकार को चुनना चाहिए.'' ख़मेनई ने पश्चिमी बलों की उसके परमाणु प्रोग्राम को रोकने के लिए भी आलोचना की.

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
इसराइल-ईरान में क्यों है दुश्मनी

ख़मेनई ने कहा, ''असैन्य परमाणु ऊर्जा की ज़रूरत सभी देशों की है लेकिन पश्चिम के देश इस पर एकाधिकार चाहते हैं. पश्चिम के लोग जानते हैं कि हमें परमाणु हथियार नहीं चाहिए क्योंकि हमारे धार्मिक सिद्धांत भी इसकी इजाज़त नहीं देते.'' अमरीका का मानना है कि ईरान परमाणु बम बनाने को लेकर वर्षों से काम कर रहा है इसीलिए उसने कई तरह के कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं.

साल 1979 में ईरान की क्रांति ने कट्टरपंथियों को सत्ता में आने का मौक़ा दिया और तभी से ईरानी नेता इसराइल को मिटाने की बात करते रहे हैं. ईरान, इसराइल के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता है और उसका कहना है कि इसराइल ने मुसलमानों की ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा कर रखा है.

दूसरी तरफ़, इसराइल भी ईरान को एक ख़तरे के तौर पर देखता है. उसने हमेशा ही ये कहा है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए. मध्य-पूर्व में ईरान के बढ़ते असर से भी इसराइल के नेताओं की चिंताएं बढ़ जाती हैं.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

दिल्ली का पानी सबसे ख़राब

ब्यूरो ऑफ स्टैंडर्ड्स यानी बीआईएस ने पानी के नमूनों की जांच के बाद कहा है कि मुंबई के नलों का पानी पीने के लिहाज़ से सबसे सुरक्षित है और दिल्ली का सबसे ख़राब.

बीआईएस ने भारत के 21 बड़े शहरों के पानी की जांच कर अपनी रिपोर्ट जारी की है. चंडीगढ़, गांधीनगर, पटना, बेंगलुरु, जम्मू, लखनऊ, चेन्नै और देहरादून के नलों के पानी की गुणवत्ता तय मानक से काफ़ी नीचे हैं.

रघुवर दास को टक्कर देंगे गौरव वल्लभ

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रोफ़ेसर गौरव वल्लभ जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा सीट से प्रदेश के मुख्यमंत्री रघुवर दास के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ेंगे. गौरव वल्लभ ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है.

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है, ''कांग्रेस पार्टी ने मुझे झारखंड के जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा सीट से सीएम रघुवर दास जी के ख़िलाफ़ उम्मीदवार घोषित किया है. मैं पार्टी के एक-एक कार्यकर्ता और पदाधिकारियों का मुझ पर भरोसा जताने के लिए कोटि-कोटि आभार प्रकट करता हूं. भरोसा दिलाता हूँ की आपके विश्वास पर हमेशा खरा उतरूँगा.''

इमेज कॉपीरइट Getty Images

राज्यसभा में विपक्षी खेमे में बैठेगी शिव सेना

शिव सेना और बीजेपी में 25 साल की दोस्ती अब पूरी तरह से कड़वाहट में बदल गई है. शिव सेना ने बीजेपी पर विधायकों के ख़रीद-फ़रोख़्त की कोशिश करने का आरोप लगाया है.

शिव सेना नेता संजय राउत ने रविवार को कहा कि उनकी पार्टी राज्यसभा में विपक्षी खेमे में बैठेगी. इसी हफ़्ते शिव सेना केंद्र की मोदी सरकार से अलग हो गई थी.

राज्यसभा में शिव सेना के तीन सांसद हैं. सोमवार से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है और शिव सेना ने घोषणा की है कि वो एनडीए की बैठक में भी शामिल नहीं होगी. 17 नवंबर को यानी आज शीतकालीन सत्र को लेकर एनडीए की बैठक होने वाली है.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

श्रीलंका में मतदान संपन्न

श्रीलंका में शनिवार को राष्ट्रपति पद के लिए मतदान हुआ. लाखों लोगों ने इस मतदान में हिस्सा लिया. कई जगहों पर पोलिंग बूथ के बाहर लोगों की लंबी क़तारें देखने को मिलीं. अधिकतर स्थानों पर शांति पूर्ण तरीक़े से मतदान संपन्न हो गया.

हालांकि पुलिस ने बताया कि एक पोलिंग बूथ पर कुछ अज्ञात बंदूकधारियों ने वोटरों को लेकर जा रही बस पर हमला किया. इस बस में अधिकतर मुस्लिम मतदाता सवार थे. श्रीलंका के राष्ट्रपति चुनाव में मुख्य मुक़ाबला पूर्व रक्षा सचिव गोटाबाया राजपक्षे और वर्तमान कैबिनेट मंत्री साजित प्रेमदासा के बीच है. प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने चुनाव में साजित प्रेमदासा का समर्थन किया है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे

संबंधित समाचार