चिली की मशहूर सिंगर मोन लाफ़र्ते ने अवॉर्ड शो में ब्रेस्ट पर लिखा दिखाया विरोध

  • 17 नवंबर 2019
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Image caption रेड कार्पेट पर चलती हुई एक जगह मोन ठहर गईं और उन्होंने काली जैकेट उतारी और अपनी ब्रेस्ट पर लिखा दिखाया- चिली में वे रेप, प्रताड़ित करने के साथ लोगों को मार रहे हैं.

चिली की सिंगर मोन लाफ़र्ते लातिन ग्रैमी शो के दौरान टॉपलेस हो गईं. ऐसा उन्होंने सरकार विरोधी प्रदर्शनों के समर्थन में किया है.

लास वेगस में जब 36 साल की गायिका और गीतकार मोन लाफ़र्ते रेड कार्पेट पर अवॉर्ड समारोह में आईं तो उन्होंने चिली में पुलिस की क्रूरता के ख़िलाफ़ ख़ामोशी से अपने समर्थन का इजहार किया.

रेड कार्पेट पर चलती हुई एक जगह मोन ठहर गईं और उन्होंने काली जैकेट उतारी और अपनी ब्रेस्ट पर लिखा दिखाया- चिली में वे रेप, प्रताड़ित करने के साथ लोगों को मार रहे हैं. चिली में लोग एक महीने से ज़्यादा वक़्त से सरकारी उपेक्षा और आर्थिक ग़ैरबराबरी के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं.

इन विरोध-प्रदर्शनों में 20 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है. इनमें से पाँच की मौत सुरक्षा बलों के हाथों हुई है. सुरक्षा बलों पर प्रताड़ना, रेप और हिंसा भड़काने के गंभीर आरोप हैं.

पुलिस की ओर से पेलेट गन के इस्तेमाल के कारण सैकड़ों लोगों ने अपनी आंखें गंवा दी हैं. हज़ारों लोगों को गिरफ़्तार भी किया गया है. हालांकि इन्हें बाद में रिहा कर दिया गया.

मोन लाफ़र्ते लातिन ग्रैमी अवॉर्ड में बेस्ट अल्टर्नेटिव एल्बम अवॉर्ड लेने आई थीं. उन्होंने इस अवॉर्ड को चिली के लोगों को समर्पित किया है. मोन ने इस अवॉर्ड के साथ अपनी एक तस्वीर इंस्टाग्राम पर डाली है जिसमें उन्होंने लिखा है, ''मेरा शरीर एक मुक्त मातृभूमि के लिए आज़ाद है.'' इस तस्वीर में मोन टॉपलेस हैं ब्रेस्ट पर लिखा अपना विरोध दिखा रही हैं.

चिली के कलाकारों, खिलाड़ियों और महिलाओं ने सरकार विरोधी प्रदर्शन में खुलकर लोगों का साथ दिया है. चिली में प्रदर्शन की शुरुआत मेट्रो के किराए में बढ़ोतरी से हुई थी लेकिन बाद में यह प्रदर्शन कई बुनियादी मुद्दों को लेकर व्यापक हो गया. प्रदर्शनकारियों की मांग यह भी है कि तानाशाह ऑगस्ट पिनोचेट ने जिस राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था को स्थापित किया था, उसे बदला जाए.

चिली की राष्ट्रीय टीम के फ़ुटबॉल खिलाड़ियों ने अगले हफ़्ते पेरू के ख़िलाफ़ मैच नहीं खेलने का फ़ैसला किया है. चिली फुटबॉल टीम के कैप्टन गैरी मेडल ने कहा, ''हमलोग फुटबॉलर हैं लेकिन सबसे पहले हम जनता और नागरिक हैं. अभी हमारे लिए चिली अगले मंगलवार को फुटबॉल मैच से ज़्यादा अहम है.''

प्रदर्शनकारियों का कई और खिलाड़ियों ने भी समर्थन किया है. चार्ल्स अरैंगीज़ ने कहा, ''अभी बहुत मुश्किल हालात हैं और इन्हें देखते हुए हमें मैच नहीं खेलना चाहिए.''

पिछले महीने ही चिली के राष्ट्रपति सेबेस्टिन पिन्येरा ने पूरी कैबिनेट को निलंबित कर दिया था. राष्ट्रपति पिन्येरा ने नई सरकार के गठन का आदेश दिया था.

राष्ट्रपति ने सामाजिक सुधार को लागू करने की बात कही थी, जिसकी मांग चिली में प्रदर्शनकारी कर रहे हैं.

राष्ट्रपति ने कहा था, ''मैंने कैबिनेट के सभी मंत्रियों को कहा है कि कैबिनेट का फिर से गठन होगा.'' हालांकि अभी तक साफ़ नहीं है कि किस तरह का फ़ेरबदल हुआ.

चिली की राजधानी सैंटियागो में दस लाख से ज़्यादा लोग एक प्रदर्शन में शामिल हुए थे. इस प्रदर्शन के बारे में कहा गया कि यह सोशल जस्टिस के लिए है.

इस प्रदर्शन के बाद राष्ट्रपति पिन्येरा ने कहा था, ''मैंने सड़क पर उठ रही मांगों को सुना है. हमलोग एक नई सच्चाई का सामना कर रहे हैं. एक हफ़्ते पहले जो चिली था अब उससे बिल्कुल अलग है.'' राष्ट्रपति ने चिली के कई शहरों में लागू कर्फ़्यू को ख़त्म करन की घोषणा की है. ये कर्फ़्यू एक हफ़्ते से लागू थे.

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Image caption चिली के राष्ट्रपति सेबेस्टिन पिन्येरा

इसकी पृष्ठभूमि क्या है?

चिली में विरोध-प्रदर्शन की शुरुआत मेट्रो के किराए बढ़ने से हुई थी. लेकिन यही विरोध-प्रदर्शन सरकार से कई नाराज़गियों और बढ़ती ग़ैरबराबरी को लेकर व्यापक हो गया. लोग बढ़ती महंगाई से तो ख़फ़ा थे ही लेकिन तात्कालिक कारण लंबे समय से पल रहे असंतोष को सड़क पर लाने में कामयाब रहा.

पिछले एक एक महीने में चिली में काफ़ी उठापटक की स्थिति रही. 10 हज़ार से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया गया. सैंटियागो की सुरक्षा को वहां की सेना ने अपने हाथों में ले लिया. आपातकाल जैसी स्थिति बन गई और हज़ारों पुलिस बल सड़कों पर तैनात कर दिए गए.

चिली लातिन अमरीका का धनी देश रहा है लेकिन इसके साथ ही यहां भयानक ग़ैर-बराबरी है. ऑर्गेनाइज़ेशन फोर इकनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट यानी ओईसीडी के कुल 36 सदस्य देशों में चिली एक ऐसा देश है जहां आय में असमानता बहुत गहरी है. बुधवार को राष्ट्रपति ने प्रदर्शन को ख़त्म करने के लिए एक सुधार पैकेज की घोषणा की थी. इसमें बुनियादी पेंशन और न्यूनतम मज़दूरी बढ़ाने की बात थी.

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