नागरिकता संशोधन विधेयक: अमरीकी आयोग का बयान ग़ैर ज़रूरी- विदेश मंत्रालय

  • 10 दिसंबर 2019
नरेंद्र मोदी और अमित शाह इमेज कॉपीरइट Getty Images

भारतीय विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमरीकी आयोग (यूएससीआईआरएफ़) के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है.

भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमरीकी आयोग का बयान ग़ैर-ज़रूरी है और ये बयान सटीक भी नहीं है.

भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि नागरिकता संशोधन विधेयक और एनआरसी की प्रक्रिया किसी भी धर्म को मानने वाले भारतीय नागरिक की नागरिकता ख़त्म नहीं करना चाहती.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार के मुताबिक, ''ये खेद की बात है कि यूएससीआईआरएफ़ ने ऐसे मामले में पक्षपातपूर्ण बात की जिस पर कुछ कहने का उसे अख़्तियार नहीं है.''

इमेज कॉपीरइट MEA
Image caption भारतीय विदेश मंत्रालय का बयान

क्या कहा है अमरीकी आयोग ने

इमेज कॉपीरइट USCIRF

अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमरीकी आयोग (यूएससीआईआरएफ़) ने भारतीय संसद के निचले सदन लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक को पास किए जाने पर चिंता जताई है.

एक प्रेस रिलीज़ में आयोग ने कहा है कि अगर ये विधेयक संसद से पास हो जाता है, तो अमरीकी सरकार को भारत के गृह मंत्री अमित शाह और अन्य प्रमुख नेताओं पर प्रतिबंध लगाने के बारे में विचार करना चाहिए.

सोमवार को देर रात लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पास हो गया. अब इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा.

इस विधेयक में बांग्लादेश, अफ़गानिस्तान और पाकिस्तान के छह अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिख) से ताल्लुक़ रखने वाले लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रस्ताव है.

गारंटी

इमेज कॉपीरइट EPA

अमरीकी आयोग का कहना है कि कैब भारत के सेक्युलर इतिहास और भारतीय संविधान के ख़िलाफ़ है, जो बिना किसी धार्मिक भेदभाव के समानता की गारंटी देता है.

आयोग का कहना है कि कैब के साथ असम में एनआरसी की प्रक्रिया चल ही रही है. भारत के गृह मंत्री अमित शाह इसे पूरे भारत में लागू करना चाहते हैं.

आयोग को इस बात का डर है कि भारत में भारतीय नागरिकता के लिए धार्मिक टेस्ट पास करना होगा, जिससे लाखों मुसलमानों की नागरिकता जा सकती है.

पहली बार जनवरी 2019 में लोकसभा में कैब पास हुआ था. लेकिन विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए सरकार ने राज्यसभा में वोट से पहले इसे वापस ले लिया.

फिर नए चुनाव आ गए. अब दोबारा सरकार बनने के बाद इस विधेयक को फिर लोकसभा में पेश किया गया, जहाँ ये पास हो गया.

क़ानून बनने से पहले इसे संसद के दोनों सदनों से पास होना आवश्यक है.

लोकसभा से पास विधेयक

सोमवार को देर रात तक चली बहस के बाद भारतीय संसद के निचले सदन लोकसभा में वोटिंग हुई जिसमें विधेयक के पक्ष में 311 वोट पड़े जबकि विपक्ष में 80 वोट पड़े.

विधेयक पास होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी ज़ाहिर की और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की तारीफ़ करते हुए कहा कि ये भारत की सदियों पुरानी परम्परा और मानवीय मूल्यों में विश्वास के अनुरूप है.

लेकिन लोकसभा में चर्चा के दौरान विधेयक की प्रति फाड़ने वाले एआईएमआईएम के सांसद असद उद्दीन ओवैसी ने ट्वीट कर कहा- आधी रात को एक झटके में, जब पूरी दुनिया सो रही थी, स्वतंत्रता, बराबरी, भाईचारा और इंसाफ़ के बारे में भारत के आदर्श के साथ धोखा किया गया.

कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों ने इसका विरोध किया है और इसे भारतीय संविधान की भावना के ख़िलाफ़ बताया है, जबकि सरकार इन आरोपों से इनकार करती है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार