डोनल्ड ट्रंप पर महाभियोग से जुड़े हर सवाल का जवाब

  • 20 दिसंबर 2019
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अमरीकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेन्टेटिव ने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग को मंज़ूरी दे दी है.

अब यह मामला अगले महीने ऊपरी सदन यानी सीनेट में जाएगा, जहां अगर इसके पक्ष में दो-तिहाई बहुमत पड़ते हैं तो ट्रंप को पद से हटाया जा सकेगा.

लेकिन ऊपरी सदन में रिपब्लिकन का बहुमत है, ऐसे में राष्ट्रपति को पद से हटाए जाने की संभावना कम ही दिख रही है.

डोनल्ड ट्रंप अमरीका के तीसरे ऐसे राष्ट्रपति हैं, जिनके ख़िलाफ़ महाभियोग लाया गया है.

अब सीनेट में क्या होगा, अगर महाभियोग सफल रहा तो क्या होगा, अगर सफल हो गया फिर भी क्या ट्रंप फिर से राष्ट्रपति बन सकते हैं?

ऐसे बहुत सारे सवाल हैं, जिनका जवाब हम आपको दे रहे हैं...

सीनेट में ट्रंप के ख़िलाफ़ जांच कब से शुरू होगी?

स्पष्ट तौर पर अभी कुछ भी तय नहीं है. जनवरी के दूसरे सप्ताह में सीनेट का शीतकालीन अवकाश खत्म होगा.

आम सहमति यह है कि दूसरे सप्ताह की शुरुआत में ट्रंप के ख़िलाफ़ जांच शुरू हो सकती है. ऐसा अनुरोध ऊपरी सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता चक शूमर ने किया है.

सीनेट में रिपब्लिकन नेता मिच मैककोनल उनके इस अनुरोध को मान सकते हैं, हालांकि वो उनकी अन्य मांगों को ठुकरा भी सकते हैं.

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अगर ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग सफल हो जाता है तो 2020 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव पर क्या असर होगा?

इसका अगले साल होने वाले चुनावों पर क्या असर होगा, यह स्पष्ट नहीं है.

हालांकि रिपब्लिकन पार्टी का कहना है कि इससे उनको फ़ायदा मिलेगा और उनके कार्यकर्ता मुश्किल घड़ी में अपने नेता के साथ खड़े रहेंगे और ज़्यादा से ज़्यादा फंड इकट्ठा किया जा सकेगा.

वहीं डेमोक्रेटिक पार्टी का कहना है कि इसका रिपब्लिकन्स को खामियाजा भुगतना होगा क्योंकि यह राष्ट्रपति पद पर एक दाग़ की तरह होगा.

अगर ट्रंप को पद से हटा दिया जाता है और पेंस राष्ट्रपति बन जाते हैं तो क्या वो ट्रंप को उपराष्ट्रपति बना कर अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं? अमरीका का क़ानून क्या कहता है?

संविधान में ऐसा कुछ भी नहीं है जो इसके लिए मना करता हो, इसलिए यह निश्चित रूप से संभव है.

लेकिन परेशानी तब खड़ी हो सकती है जब माइक पेंस, डोनल्ड ट्रंप को उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनते हैं. इसके लिए संसद के दोनों सदनों की मंजूरी ज़रूरी है.

निचले सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत है और यह कर पाना माइक पेंस के लिए मुश्किल होगा.

यह भी हो सकता है कि ऊपरी सदन यानी सीनेट महाभियोग के बाद डोनल्ड ट्रंप को भविष्य में किसी पद पर नियुक्त किए जाने पर रोक लगा दे. अगर ऐसा होता है तो सारे रास्ते बंद हो जाएंगे.

लेकिन अगर सीनेट इस तरह की रोक नहीं लगाती है तो माइक पेंस, ट्रंप को उपराष्ट्रपति बना सकते हैं.

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सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी को बहुमत प्राप्त है और यह तय है कि ट्रंप को राष्ट्रपति के पद से हटाया नहीं जा सकेगा, तो फिर ये सब क्यों किया गया?

इसके पीछे साफ़ तौर पर राजनीति है. डेमोक्रेटिक पार्टी राष्ट्रपति को जवाबदेह ठहराना चाहती थी और इसे उसकी सियासी मजबूरी कहा जा सकता है.

पार्टी यह साबित करना चाहती है कि राष्ट्रपति ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है और अपने विरोधियों के ख़िलाफ़ जांच करवाने के लिए यूक्रेन के राष्ट्रपति पर दबाव डाला है. अगर वो ऐसा नहीं करती तो जाहिर तौर पर ट्रंप आगे की कार्रवाई करते और डेमोक्रेटिक को 2020 के चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ता.

डेमोक्रेटिक पार्टी अगर चुप रह जाती तो यह कार्यकर्ताओं को हतोत्साहित करता और उनका मनोबल कम करता.

अगर ट्रंप पर महाभियोग चलता है लेकिन सीनेट उन्हें दोषी नहीं ठहराता है तो क्या वो अगला चुनाव लड़ सकेंगे? इसका उन्हें कुछ घाटा होगा?

डोनल्ड ट्रंप निश्चित तौर पर आगामी चुनाव लड़ सकते हैं. ऐसी संभावना है कि महाभियोग राष्ट्रपति को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचा सकता है लेकिन सीनेट क़ानूनी रूप से उन्हें चुनाव लड़ने से नहीं रोक सकती है.

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महाभियोग मामले में राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ जांच की अगुवाई कौन करता है, देश के मुख्य न्यायाधीश या सांसदों की जूरी?

अमरीकी सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संवैधानिक रूप से सीनेट में जांच के लिए नामित पीठासीन अधिकारी होते हैं.

जांच की रूपरेखा के लिए पहले सीनेट में वोटिंग की जाएगी, इसके बाद चीफ़ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स हर दिन की कार्यवाही देखेंगे.

एक महत्वपूर्ण बात, अगर रिपब्लिकन पार्टी के 100 सांसद चाहेंगे तो वे कभी भी जांच के नियम को बदल सकते हैं.

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अगर ट्रंप ने कानून तोड़ा है और निचले सदन ने महाभियोग की मंज़ूरी दे दी है लेकिन सीनेट ट्रंप को बचा लेता है तो यह न्याय कैसे हुआ?

शायद न्याय का इससे कोई लेना-देना नहीं है. जिन लोगों ने 1787 में संविधान लिखा था, उन्होंने सहमति से महाभियोग और हटाने की प्रक्रिया को राजनीतिक प्रक्रिया करार दिया था.

राजनेता ही यह प्रस्ताव ला सकते हैं और वे ही राष्ट्रपति को हटा सकते हैं.

अमरीकी लोकतांत्रिक व्यवस्था में कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका शामिल हैं. संविधान निर्माताओं ने यह तरीका सरकार की निरंकुशता पर लगाम लगाने के लिए निकाला था.

महाभियोग राष्ट्रपति को जवाबदेह बनाता है. लेकिन, यह बहस का विषय है कि यह न्याय सुनिश्चित करता है या नहीं.

क्या सीनेट में सांसद पार्टी लाइन पर ही वोट करते हैं या वो इसके लिए स्वतंत्र होते हैं?

प्रत्येक सीनेटर को अपने विवेक के आधार पर यह तय करना होता है कि उन्हें कैसे वोट देना चाहिए.

वो इसके लिए स्वतंत्र होते हैं. इस बार निचले सदन में डेमोक्रेटिक पार्टी के दो सदस्यों ने महाभियोग चलाने के ख़िलाफ़ वोट दिया.

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