2020 में दुनिया की नज़रें किन मुद्दों पर होगी?

  • 26 दिसंबर 2019
2019 से 2020 की ओर जंप करता एक व्यक्ति इमेज कॉपीरइट Getty Images

नया साल और एक नया दशक 1 जनवरी 2020 से शुरू हो रहा है जिसके लेकर अलग-अलग भविष्यवाणियां जारी हैं.

लेकिन भविष्य में इसको लेकर क्या सुर्ख़ियां बन रही होंगी?

यहां हमने उन लोगों और कार्यक्रमों की सूची बनाई है जो आने वाले साल में चर्चा बटोरेंगे.

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एक और अमरीकी चुनाव

अमरीकी राष्ट्रपति की दौड़ को लेकर अभी से अंदाज़ा लगाना जल्दबाज़ी होगी.

व्हाइट हाउस में अभी रिपब्लिकन के डोनल्ड ट्रंप सत्ता में है. उनके ख़िलाफ़ अभी महाभियोग की प्रक्रिया जारी है. वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी ने अभी भी उम्मीदवार नहीं चुना है.

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Image caption 2020 के चुनावों में रिपब्लिकन नेता मिच मैकॉनल की सीट भी दांव पर होगी.

लेकिन यह तय है कि सीनेट की रेस महत्वपूर्ण होगी क्योंकि अमरीका में 3 नवंबर से इसकी चुनावी प्रक्रिया शुरू होगी.

ऊपरी सदन में नियंत्रण राष्ट्रपति के लिए चीज़ें आसाना या कठिन बना देता है. सीनेट ही विधायी एजेंडों, बजट और क़ानूनी फ़ैसलों पर अंतिम मुहर लगाता है.

वर्तमान में रिपब्लिकन्स का 100 सीटों में से 53 पर क़ब्ज़ा है लेकिन ट्रंप की पार्टी चुनावों में 23 सीटों पर क़ब्ज़ा कर चुकी है जबकि डेमोक्रेट्स के पास 12 सीटें हैं. निचले सदन हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव में इस समय डेमोक्रेट्स का बहुमत है.

ट्रंप फिर से चुनाव जीत सकते हैं लेकिन सीनेट में पासा पलटा तो यह उनके लिए मुश्किल होगा.

एक नई अरब क्रांति?

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Image caption 2020 में क्या अरब जगत फिर एक बार सुर्ख़ियां बटोरेगा?

2019 के आधे बचे साल में इराक़, मिस्र और लेबनान में विरोध प्रदर्शन हुए जबकि शुरुआती आधे साल में अल्जीरिया और सूडान में प्रदर्शन हुए थे. इसके बाद विश्लेषकर्ताओं ने इसे नई 'अरब क्रांति' कहा था.

इसको 2011 से जोड़कर देखा गया था जब अरब देशों में विरोध प्रदर्शन चल रहे थे.

कार्नेज मध्य पूर्व केंद्र में शोधकर्ता दालिया ग़ानम कहती हैं, "2019 में अल्जीरिया, सूडान, इराक़ और लेबनान जैसे चार देशों ने विरोध प्रदर्शन देखे 2011 की 'अरब स्प्रिंग' से ये देश बाहर थे."

"असहमति का यह नया सीज़न है."

लेकिन क्या 2020 में ये प्रदर्शन और गति पकड़ेंगे? इस पर पेरिस की पीएसएल यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर और अरब मामलों के जानकार इशाक दीवान कहते हैं, "लोगों की असहमति की ये लहर दूसरे देशों तक भी फैल सकती है."

वो कहते हैं, "2011 में प्रदर्शनों की लहर आर्थिक स्थिति के कारण पैदा हुई थी. तब आर्थिक गति धीमी थी, लोगों का क़र्ज़ बढ़ गया था और बेरोज़गारी दर बहुत ऊंची थी."

"2011 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान लोगों में एक तड़प थी और आज हो रहे प्रदर्शनों में एक भूख है."

क्या कोई और भी है वहां?

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Image caption कीओप्स स्पेस टेलिस्कोप अगले तीन सालों में 400-500 नए ग्रहों की खोज करेगा.

हमारे सौर मंडल के बाहर किसी दूसरे ग्रह का अस्तित्व होना कोई नई बात नहीं है. 1990 के बाद से अब तक 4,000 ग्रह खोज चुकी है.

18 दिसंबर को प्रक्षेपित किए गए कीओप्स स्पेस टेलीस्कोप के ज़रिए इस दिशा में नए द्वार खुलने जा रहे हैं. यूरोपीयन स्पेस एजेंसी का यह अंतिरक्षयान अगले तीन सालों में 400-500 नए जटिल ग्रहों की खोज करेगा.

यह अंतरिक्षयान अगली पीढ़ी के खोजकर्ताओं के लिए अन्य ग्रहों को लेकर अधिक जानकारियां देगा. 2021 में नासा का जेम्स वेब टेलीस्कोप प्रक्षेपित किया जाना है जिसको लेकर भी यह जानकारियां देगा.

इस चुनाव पर बीजिंग की रहेगी कड़ी नज़र

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Image caption साई की जीत को बीजिंग पसंद नहीं करेगा

हॉन्गकॉन्ग में कई महीनों तक चल विरोध प्रदर्शनों के बाद उसके नेता आने वाले साल में एक नई उभरती हुई चुनौती देख सकते हैं.

'पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना' यानी चीन और 'रिपब्लिक ऑफ़ चाइना' यानी ताइवान एक-दूसरे की संप्रभुता को मान्यता नहीं देते. दोनों ख़ुद को आधिकारिक चीन मानते हुए मेनलैंड चाइना और ताइवान द्वीप का आधिकारिक प्रतिनिधि होने का दावा करते रहे हैं.

ताइवान में 11 जनवरी को राष्ट्रपति चुनाव होने हैं.

बीजिंग के लिए यह एक बुरी ख़बर हो सकती है क्योंकि चुनावी सर्वे में कहा जा रहा है कि साई इंग-वेन दोबारा राष्ट्रपित चुनी जा सकती हैं.

साई की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी एक मज़बूत राष्ट्रवादी पार्टी है और स्वतंत्रता समर्थक रुख़ रखने के कारण हॉन्गकॉन्ग में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों को उसने हवा दी है.

17 दिसंबर को आए सर्वे में साई अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी हान कुओ-यू (बीजिंग समर्थित उम्मीदवार) पर 38 पॉइंट की बढ़त बनाए हुए हैं.

अफ़्रीकी शेर दहाड़ने को तैयार

30 मई 2019 को अफ़्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र (एएफ़सीएफ़टीए) अस्तित्व में आ गया है. देशों की संख्या (54) के आधार पर यह दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार क्षेत्र है.

इसको 'राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक क्षेत्र के मील के पत्थर' के रूप में परिभाषित किया गया है जो इस प्रायद्वीप की वृद्धि में सहायक होगा.

मुक्त व्यापार जुलाई से शुरू हो रहा है और उम्मीद है कि इससे अफ़्रीकी देशों में व्यापार को प्रोत्साहन मिलेगा. साल 2018 में अफ़्रीकी देशों के बीच व्यापार 20 फ़ीसदी से कम रहा था.

ओलंपिक में होंगे नए बच्चे

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Image caption स्काई ब्राउन

ओलंपिक खेलों में युवाओं की धमक रही है.

अमरीकी तैराक मार्जोरी गैस्ट्रिंग 13 वर्ष की थीं जब उन्होंने 1936 में बर्लिन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था और वो सबसे युवा ओलंपिक चैंपियन बनी थीं.

हालांकि, ये भी माना जाता है कि 7-10 वर्ष की आयु के एक फ़्रेंच लड़के ने डच नौकायान टीम को 1900 में पेरिस ओलंपिक में शीर्ष पुरस्कार दिलाया था.

लेकिन स्काई ब्राउन इससे भी आगे जा रही हैं. 11 वर्षीय ब्रिटिश स्केटबॉर्डर ने सितंबर में विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था. अगर वो ओलंपिक के लिए क्वॉलिफ़ाई करती हैं तो ब्रिटेन की सबसे युवा ओलंपिक खिलाड़ी होंगी.

ओलंपिक खेल 24 जुलाई से 9 अगस्त तक टोक्यो में होने हैं. ओलंपिक में स्केटबोर्डिंग के अलावा, वॉल-क्लाइंबिंग, सर्फिंग, कराटे और सॉफ़्टबॉल को पहली बार शामिल किया जा रहा है.

बहुत से देशों में ख़त्म होगा मलेरिया?

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Image caption 2020 में नौ देश अपने यहां मलेरिया को समाप्त कर देंगे

मच्छरों के काटने से होने वाली मलेरिया बीमारी के कारण 2018 में 4 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई थी. ये उन मौतों का आंकड़ा है जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के पास रिपोर्ट हुए थे. उसको मलेरिया के 22.8 करोड़ मामलों के बारे में पता चला था.

अच्छी ख़बर ये है कि मलेरिया के मामले लगातार कम हो रहे हैं और नौ देश 2020 तक अपने यहां इस बीमारी को समाप्त कर देंगे.

चीन इनमें से एक है. दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाले इस देश में एक समय 3 करोड़ मलेरिया के मामले आए थे जिनमें 3 लाख लोगों की मौत हुई थी.

दूसरे देशों में ईरान, बेलीज़, अल साल्वाडोर, सूरीनाम, काबो वर्डे, भूटान, पूर्वी तिमोर और मलेशिया जैसे नाम शामिल हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि ख़तरे के निशान वाले 91 देशों में से 38 देश अपने यहां ये बीमारी ख़त्म कर चुके हैं.

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