ईरानी कमांडर जनरल क़ासिम सुलेमानी की अमरीकी हवाई हमले में मौत

  • 3 जनवरी 2020
General Qasem Soleimani, जनरल क़ासिम सोलेमानी इमेज कॉपीरइट Fars

ईरान की क़ुद्स फ़ोर्स के प्रमुख जनरल क़ासिम सुलेमानी बग़दाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हवाई हमले में मारे गए हैं. इस हमले की ज़िम्मेदारी अमरीकी ने ली है. इस हमले में कताइब हिज़बुल्लाह के कमांडर अबू महदी अल-मुहांदिस भी मारे गए हैं.

अमरीकी रक्षा विभाग की तरफ से बयान में कहा गया है कि "अमरीकी राष्ट्रपति के निर्देश पर विदेश में रह रहे अमरीकी सैन्यकर्मियों की रक्षा के लिए क़ासिम सुलेमानी को मारने का कदम उठाया गया है. अमरीका ने उन्हें आतंकवादी घोषित कर रखा था."

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इस बयान में कहा गया है कि "सोलेमानी बीते 27 दिसंबर समेत, कई महीनों से इराक़ स्थित अमरीकी सैन्य ठिकानों पर हमलों को अंजाम देने में शामिल रहे हैं. इसके अलावा बीते हफ़्ते अमरीकी दूतावास पर हुए हमले को भी उन्होंने अपनी स्वीकृति दी थी."

बयान के अंत में कहा गया कि, "यह एयरस्ट्राइक भविष्य में ईरानी हमले की योजनाओं को रोकने के उद्देश्य से किया गया. अमरीका, चाहे जहां भी हो, अपने नागरिकों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई को करना जारी रखेगा."

अमरीकी मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि जनरल सुलेमानी और ईरान समर्थित मिलिशिया के अधिकारी दो कार में बगदाद एयरपोर्ट जा रहे थे तभी एक कार्गो इलाके में अमरीकी ड्रोन ने उन पर हमला कर दिया.

इस काफिले पर कई मिसाइलें दागी गईं. बताया गया कि कम से कम पांच लोगों की इसमें मौत हो गई है.

उनके मौत की पुष्टि ईरान की रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने भी कर दी है.

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जनरल क़ासिम सुलेमानी की मौत मध्य-पूर्व से जुड़ी एक बड़ी घटना बताई जा रही है और आशंका यह भी जताई गई है कि ईरान और इसकी समर्थित मिडिल ईस्ट ताक़तें अब इसराइल और अमरीका के ख़िलाफ़ ज़ोरदार जवाबी कार्रवाई करेंगी.

बीते रविवार को ही अमरीका ने पूर्वी सीरिया और पश्चिमी इराक़ में स्थित कताइब हिज़बुल्लाह संगठन के ठिकानों को निशाना बनाया था. जिसमें कम से कम 25 लड़ाके मारे गए थे.

इसके बाद सोमवार को इराक़ी प्रधानमंत्री आदिल अब्दुल महदी ने कहा था कि अमरीकी हवाई हमला उनके देश की संप्रभुता का उल्लंघन है और इसके बाद वो अमरीका के साथ अपने रिश्तों की समीक्षा करेंगे.

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Image caption बग़दाद स्थित अमरीकी दूतावास पर हमला

वहीं कताइब हिज़बुल्लाह के (आज मारे गए) कमांडर अबू महदी अल-मुहांदिस ने कहा था कि वो इराक़ में स्थित अमरीकी बलों को मुंहतोड़ जवाब देंगे.

इसके बाद मंगलवार को बग़दाद स्थित अमरीकी दूतावास पर प्रदर्शनकारियों ने हमला किया और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने इसके लिए ईरान को ज़िम्मेदार ठहराया.

जनरल सुलेमानी का परिचय

जनरल सुलेमानी ईरानी की एक ख़ास शख़्सियत थे. उनकी क़ुद्स फोर्स सीधे देश के सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली ख़ामेनेई को रिपोर्ट करती है. सुलेमानी की पहचान देश के वीर के रूप में थी.

सुलेमानी को पश्चिम एशिया में ईरानी गतिविधियों को चलाने का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता रहा है.

क़ुद्स फोर्स के कमांडर जनरल क़ासीम सुलेमानी को ईरान के सुप्रीम लीडर आयतोल्लाह अली ख़ामनेई ने 'अमर शहीद' का ख़िताब दिया है.

जनरल क़सीम सुलेमानी ने यमन से लेकर सीरिया तक और इराक़ से लेकर दूसरे मुल्कों तक रिश्तों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया ताकि इन देशों में ईरान का असर बढ़ाया जा सके.

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Image caption इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स में डेढ़ लाख से अधिक सैन्यकर्मियों के होने का अनुमान है

क़ुद्स फोर्स

क़ुद्स फ़ोर्स ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स की एक शाखा है जो देश के बाहर के अभियानों को अंजाम देती है और इसके प्रमुख मेजर जनरल क़ासिम सुलेमानी सीधे तौर पर देश के सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली ख़ामेनेई के प्रति जवाबदेह थे. उन्हें ख़ामेनेई का बहुत क़रीबी माना जाता था और भविष्य के नेता के तौर पर देखा जाता था.

2003 में अमरीका के नेतृत्व में हुए सैन्य हमलों में इराक़ में सद्दाम हुसैन की सत्ता ख़त्म हो गई. इसके बाद से मध्यपूर्व में क़ुद्स सेना ने अपने अभियान तेज़ किए.

ईरान का समर्थन करने वाले दूसरे देशों के सरकार विरोधी गुटों को क़ुद्स ने हथियार, पैसे और ट्रेनिंग देनी शुरू की.

साथ ही इसने युद्ध के ग़ैर-पारंपरिक तरीक़ों को भी अपनाना शुरू किया जिसका नतीजा ये हुआ कि पारंपरिक हथियारों पर निर्भर रहने वाले अपने विरोधियों पर ईरान को बढ़त मिली.

इन तकनीकों में स्वार्म तकनीक (बड़ी सैन्य टुकड़ी के साथ अलग-अलग ठिकानों से लड़ना), ड्रोन का इस्तेमाल और साइबर हमले महत्वपूर्ण हैं.

इसी साल अप्रैल में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड्स समेत क़ुद्स फ़ोर्स को "विदेशी आतंकवादी संगठन" क़रार दिया था.

ये पहली बार था जब अमरीका ने किसी दूसरी सरकार से जुड़े एक संगठन को चरमपंथी बताया था.

अमरीका के इस फ़ैसले पर ईरान ने इशारों इशारों में ये कहते हुए प्रतिक्रिया दी कि खाड़ी क्षेत्र में "अमरीकी सेना ख़ुद आतंकवादी गुट से कम नहीं है."

2001 से 2006 के बीच में ब्रिटेन के विदेश मंत्री रहे जैक स्ट्रॉ ने कई बार ईरान का दौरा किया और उनका मानना था कि जनरल क़ासिम सुलेमानी की भूमिका महज़ एक सैन्य कमांडर से कहीं अधिक है.

उनका कहना था कि, "सेना की ताक़त के साथ सुलेमानी मित्र देशों के लिए ईरान की विदेश नीति चला रहे हैं."

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Image caption ईरान के सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली ख़ामेनेई

कताइब हिज़्बुल्लाह अमरीका के निशाने पर क्यों?

अमरीका का कहना है कि हिज़्बुल्लाह इराक़ में उसके सैन्य ठिकानों पर लगातार हमला करता रहा है.

2009 से ही अमरीका ने कताइब हिज़्बुल्लाह को आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है. उसने इसके कमांडर अबु महदी अल-मुहांदिस को वैश्विक आतंकवादी भी क़रार दिया था. अमरीका का कहना है कि यह संगठन इराक़ की स्थिरता और शांति के लिए ख़तरा है.

अमरीका के डिफेंस डिपार्टमेंट का कहना है कि कताइब हिज़्बुल्लाह का संबंध ईरान के इस्लामिक रिवॉल्युशनरी गार्ड्स कॉर्प्स यानी आईआरजीसी के वैश्विक ऑपरेशन आर्म क़ुद्स फ़ोर्स से है जिसे ईरान से कई तरह की मदद मिलती है.

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