'तीसरे विश्वयुद्ध के काले बादल मंडराने लगे हैं'- पाकिस्तान से उर्दू प्रेस रिव्यू

  • 5 जनवरी 2020
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पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते ईरानी सैन्य कमांडर की अमरीकी हमले में मौत, पाकिस्तानी सेना प्रमुख के कार्यकाल में विस्तार और भारत में नागरिकता संशोधन क़ानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (सीएए-एनआरसी) के ख़िलाफ़ हो रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी ख़बरें सुर्ख़ियों में रहीं.

सबसे पहले बात ईरानी सैन्य कमांडर की हत्या की. ईरान की क़ुद्स फ़ोर्स के प्रमुख जनरल क़ासिम सुलेमानी बग़दाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक अमरीकी हवाई हमले में मारे गए.

इस पर अमरीकी रक्षा विभाग ने एक बयान जारी कर कहा, "अमरीकी राष्ट्रपति के निर्देश पर विदेश में रह रहे अमरीकी सैन्यकर्मियों की रक्षा के लिए क़ासिम सुलेमानी को मारने का क़दम उठाया गया. अमरीका ने उन्हें आतंकवादी घोषित कर रखा था."

क़ुद्स फ़ोर्स ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स की एक शाखा है जो देश के बाहर के अभियानों को अंजाम देती है और इसके प्रमुख मेजर जनरल क़ासिम सुलेमानी सीधे तौर पर देश के सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली ख़ामेनेई के प्रति जवाबदेह थे. उन्हें ख़ामेनेई का बहुत क़रीबी माना जाता था और भविष्य के नेता के तौर पर देखा जाता था.

पाकिस्तान के सभी अख़बारों में ये ख़बर पहले पन्ने पर है.

अख़बार 'जंग' ने सुर्ख़ी लगाई है, "मध्य-पूर्व में जंग का ख़तरा."

ईरान के सर्वोच्च नेता आयातोल्लाह ख़ामेनेई ने कहा है कि जनरल क़ासिम सुलेमानी की मौत का अमरीका से बदला लिया जाएगा. उधर अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा कि जनरल क़ासिम सुलेमानी को तो बहुत पहले ही मार दिया जाना चाहिए था.

इसराइल ने भी अमरीकी क़दम का स्वागत किया है. इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा कि अमरीका अपनी आत्मरक्षा का अधिकार रखता है लेकिन अमरीकी संसद अध्यक्ष नैन्सी पेलोसी ने कहा कि अमरीकी हमले से हिंसा में इज़ाफ़ा होगा.

अख़बार 'जंग' के मुताबिक़ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि अमरीकी हमले के बाद क्षेत्र में हालत और ख़राब होंगे.

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पाकिस्तान को अपनी अर्थव्यवस्था की चिंता

अख़बार 'दुनिया' ने लिखा है, "अमरीका-ईरान तनाव पर विदेश मंत्री सीनेट में तलब, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था और स्थिरता पर भी असर."

अख़बार के मुताबिक़ पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी को छह जनवरी को संसद में तलब किया गया है. विदेश मंत्री को ये बताना है कि ईरान और अमरीका के बीच बढ़ते तनाव में पाकिस्तान की विदेश नीति क्या है और पाकिस्तान इस मामले में कहां खड़ा है.

अख़बार 'एक्सप्रेस' ने सुर्ख़ी लगाई है, "सेना प्रमुख को अमरीकी विदेश मंत्री का फ़ोन, मध्य-पूर्व में मौजूदा तनाव पर बातचीत."

पाकिस्तानी सेना ने एक बयान जारी कर कहा कि अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा को फ़ोन कर उनसे मध्यपूर्व की ताज़ा स्थिति पर बातचीत की.

सेना के बयान के अनुसार सेना प्रमुख जनरल बाजवा ने अमरीकी विदेश मंत्री से कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए सभी पक्ष संयम से काम लें और सोच विचार कर कोई क़दम उठाएं.

जनरल बाजवा ने ये भी कहा कि बढ़ते तनाव के बीच सभी पक्षों को बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए.

अख़बार दुनिया ने सुर्ख़ी लगाई है, "तीसरे विश्वयुद्ध के काले बादल मंडराने लगे हैं."

अख़बार के मुताबिक़ जनरल क़ासिम सुलेमानी की मौत के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और सब की निगाहें अब रूस की तरफ़ हैं. अख़बार के अनुसार हाल के दिनों में मध्यपूर्व में रूस का हस्तक्षेप बढ़ा है और आने वाले दिनों में रूस की भूमिका अहम होगी.

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Image caption पाकिस्तान के आर्मी प्रमुख क़मर जावेद बाजवा

बाजवा के लिए बनाया गया क़ानून

पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल बाजवा के सेवा विस्तार से जुड़ी ख़बरें भी पाकिस्तान के उर्दू अख़बारों की सुर्ख़ियों में रहीं.

अख़बार 'एक्सप्रेस' के अनुसार आर्मी एक्ट संशोधन बिल को दोनों सदनों की रक्षा संसदीय समिति ने सर्वसम्मति से मंज़ूरी दे दी है जिसके बाद अब इस बिल का संसद में पास होना महज औपचारिकता है.

इस बिल के क़ानून बन पर जाने पर प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति तीनों सेना के प्रमुखों की सेवा को तीन साल तक के लिए बढ़ा सकते हैं और इस क़ानून को अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकेगी.

अख़बार 'जंग' के अनुसार प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि उन्होंने जनरल बाजवा की सेवा में विस्तार बहुत सोच समझकर दिया है और न्यायपालिका ने कार्यपालिका के कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप किया है.

अख़बार के अनुसार इमरान ख़ान ने अपनी पार्टी के नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि अहम पदों पर तैनाती सरकार का अधिकार है और ये मामला अदालत में नहीं जाना चाहिए था.

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नागरिकता क़ानून पर क्या बोले पाकिस्तानी अख़बार?

अब बात भारत में नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) और एनसीआर के ख़िलाफ़ हो रहे देश-व्यापी विरोध प्रदर्शनों की.

भारत में नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. कई जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हुए हैं और अब तक कम से कम 25 लोग मारे जा चुके हैं.

पाकिस्तानी मीडिया में भी इस ख़बर के बारे में ख़ूब चर्चा हो रही है.

अख़बार 'एक्सप्रेस' ने लिखा है कि भारत में नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन जारी है.

अख़बार के अनुसार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पाकिस्तान का राजदूत क़रार दिया है.

ममता ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी भारत के बजाए दिनभर पाकिस्तान के बारे में बात करते रहते हैं, जैसे वो पाकिस्तान के राजदूत हों."

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